राजस्थान का रत्न– जिसने पाकिस्तान में तिरंगा फहराया
कैलाश दान उज्ज्वल ने छाछरो की हवेली पर तिरंगा फहराकर न सिर्फ इतिहास रचा, बल्कि यह दिखा दिया कि राष्ट्र की असली जीत केवल रणभूमि में नहीं, बल्कि उसके बाद की जिम्मेदारी निभाने में...

राजस्थान की धरती ने अनेक रत्न दिए हैं, पर कुछ नाम ऐसे होते हैं जो केवल पदों से नहीं, अपने कर्मों से इतिहास रचते हैं। ऐसा ही एक नाम है—कैलाश दान उज्ज्वल, जिनका जन्म जैसलमेर जिले के ऊजलां गांव में हुआ और जिन्होंने जोधपुर की मिट्टी में परवरिश पाई। वे भारतीय प्रशासनिक सेवा के एक ऐसे अधिकारी थे, जिनकी कार्यशैली में दूरदृष्टि, साहस और राष्ट्रसेवा का अद्वितीय संगम था।
1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान जब भारतीय सेना ने पाकिस्तान के छाछरो क्षेत्र को नियंत्रण में लिया, तब वहां भारत की प्रशासनिक उपस्थिति स्थापित करने का कार्य कैलाश दान उज्ज्वल को सौंपा गया। उन्होंने छाछरो की हवेली पर तिरंगा फहराकर न सिर्फ इतिहास रचा, बल्कि यह दिखा दिया कि राष्ट्र की असली जीत केवल रणभूमि में नहीं, बल्कि उसके बाद की जिम्मेदारी निभाने में है।
यह कोई साधारण घटना नहीं थी—यह भारत की प्रभुता, साहस और आत्मबल का उद्घोष था, जो दुश्मन की भूमि पर गूंज उठा।
बाद में वे राजस्थान के पहले गृह सचिव, मुख्य सचिव और जयपुर के पहले जिलाधीश बने। प्रशासन में उनका हर निर्णय जनता की भलाई से प्रेरित होता था। वे केवल कागज़ों के अधिकारी नहीं, जनभावनाओं को समझने वाले सेवक थे। राजस्थान को गर्व है उस सपूत पर, जिसने ऊजलां से निकलकर पाकिस्तान की हवाओं में तिरंगा फहराया और पूरे देश को गौरव से भर दिया।






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