कामेडियन सुनील ग्रोवर ने ‘जयपुर फुट’ के नाम लिखा कृतज्ञता का अध्याय
कौन बनेगा करोड़पति के उजले मंच पर जीते गए बारह लाख रुपये उनके लिए सिर्फ़ एक पुरस्कार नहीं थे, बल्कि एक धन्यवाद-पत्र थे। उस संस्था के नाम जिसने कभी उनके पिता को चलना सिखाया था। भगवान महावीर विकलांग...

कौन बनेगा करोड़पति टीवी शो के मंच पर जब सुनील ग्रोवर सवालों के जवाब दे रहे थे, तब यह महज़ खेल नहीं था, बल्कि एक जीवन यात्रा थी। वह यात्रा जिसमें हँसी और संवेदना दोनों के कदम साथ चल रहे थे। कौन बनेगा करोड़पति के उजले मंच पर जीते गए बारह लाख रुपये उनके लिए सिर्फ़ एक पुरस्कार नहीं थे, बल्कि एक धन्यवाद-पत्र थे। उस संस्था के नाम जिसने कभी उनके पिता को चलना सिखाया था। भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति, जिसे दुनिया जयपुर फुट के नाम से जानती है, वह जगह है जहाँ टूटी ज़िंदगियाँ फिर से खड़ी होना सीखती हैं। जहाँ निराशा के बीच उम्मीद के कृत्रिम पैर लगते हैं, और लोग दर्द की मिट्टी से फिर से चलना सीखते हैं।
सुनील के पिता ने भी वहीं से नया जीवन पाया था, और शायद इसी स्मृति ने बेटे के भीतर वह संकल्प जगाया कि सफलता का पहला फल उन्हीं हाथों में समर्पित किया जाए जिन्होंने कभी उनके परिवार के आँसू पोंछे थे।
सुनील ने अपने अंदाज़ में कहा हास्य मेरा पेशा है, लेकिन चलना मेरे पिता की कृपा थी, और उस कृपा के पीछे जयपुर फुट की सेवा। यह वाक्य केवल आभार नहीं था, बल्कि एक पुल था हँसी और मानवता के बीच। जयपुर की यह संस्था पांच दशकों से लाखों जीवनों में नया संतुलन दे रही है। जिन पैरों ने आशा छोड़ दी थी, वे यहाँ आकर फिर से सपनों की दिशा में चल पड़ते हैं। किसी ने इस कृत्रिम पैर को ‘मानवता का सबसे हल्का वजन’ कहा है क्योंकि यह उस पीड़ा को हल्का कर देता है जिसे शब्दों में तौलना असंभव है।
सुनील का यह निर्णय उस दीपक की लौ है जो बताती है कि जीवन में जब भी सफलता की ज्योति जले, उसका प्रकाश सेवा के मार्ग पर गिरना चाहिए। यह केवल दान नहीं, एक आत्मीय ऋण की अदायगी है और इस अदायगी में वह सुकून है जो मंच की तालियों से भी ऊँचा है। हास्य की दुनिया का यह कलाकार आज उस मिट्टी के क़र्ज़दार की तरह झुका है जिसने उसके पिता को चलना सिखाया था। सच तो यह है कि सुनील ग्रोवर ने बारह लाख नहीं, बल्कि बारह लाख मुस्कुराहटें लौटाई हैं। और जब कोई कलाकार अपनी कमाई से किसी और के जीवन में चलने की शक्ति देता है तब वह केवल कॉमेडियन नहीं, बल्कि मानवता का संवाददाता बन जाता है।






No Comment! Be the first one.