‘धुरंधर’ से बॉक्स ऑफिस धुआं-धुआं
‘धुरंधर’ की रिकॉर्डतोड़ कमाई केवल बॉक्स ऑफिस की सफलता नहीं, बल्कि बदलते दर्शक स्वभाव और नैरेटिव की जीत है। यह फिल्म दिखाती है कि अब पसंद और अस्वीकृति का फैसला जनता खुद करती...

बदलते दर्शक और नए सिनेमा की ऐतिहासिक कमाई
सुधांशु टाक,
लेखक, समीक्षक
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साल 2025। साल के आखिरी महीने यानी दिसंबर का पहला शुक्रवार यानी 5 दिसंबर। हिंदी सिनेमा के परदे पर निर्देशक आदित्य धर की फिल्म ‘धुरंधर’ रिलीज हुई। जैसा कि एक आम मल्टीस्टारर हिंदी फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर स्टार्ट मिलता है, वैसा ही इस फिल्म को भी मिला। ‘धुरंधर’ ने पहले दिन 28 करोड़ रुपए की ओपनिंग ली। इसके बाद दूसरे दिन आंकड़ा 32 करोड़ रुपए पहुंच गया। दो दिनों में इस फिल्म को सोशल मीडिया के माध्यम से जबरदस्त माउथ पब्लिसिटी मिली। इसके बाद तीसरे दिन 43 करोड़ का कलेक्शन कर फिल्म ने जो रफ्तार पकड़ी, उसने सभी को हैरान कर दिया। यह फिल्म वाकई बॉक्स ऑफिस पर सब कुछ धुआं-धुआं कर रही है। बताया जा रहा है कि अपने तीसरे हफ्ते में प्रवेश करने के साथ ही इस फिल्म ने अब वर्ल्डवाइड 1000 करोड़ रुपये का कलेक्शन पार कर लिया है।
साल 2025 की शुरुआत जहां ‘छावा’ की ब्लॉकबस्टर सक्सेस से हुई थी, वहीं इसका अंत ‘धुरंधर’ की ऐतिहासिक कमाई से हो रहा है। यह फिल्म हर दिन एक नया बेंचमार्क बना रही है। कमाई के मामले में यह ‘छावा’ और ‘एनिमल’ से कहीं आगे निकलने की ओर बढ़ रही है। इसका अगला बड़ा बेंचमार्क आमिर खान और राजकुमार हिरानी की ‘पीके’ को पीछे छोड़ना है, जिसने दुनियाभर में 792 करोड़ रुपये का ग्रॉस कलेक्शन किया था।
कई पुरानी मान्यताएं बदली
असल में ‘धुरंधर’ की सफलता ने कई पुरानी मान्यताओं को बदल दिया है। पहले होता यह था कि देश के कुछ तथाकथित बड़े समीक्षक मिलकर तय करते थे कि देश की जनता क्या देखेगी और क्या नहीं। कौन-सी किताब पढ़नी चाहिए, कौन-सा संगीत सुना जाए और किसे वोट देना देशहित में होगा, यह सब वही चुनिंदा वर्ग तय करता था और चुनिंदा पत्रिकाओं, समाचार पत्रों और टीवी चैनलों के माध्यम से उसे स्थापित करता था।
लेकिन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सोशल मीडिया के इस दौर ने उस व्यवस्था को पूरी तरह बदल दिया है। अब जनता खुद तय करती है कि उसे कौन-सी फिल्म देखनी है, कौन-सी किताब पढ़नी है और किसे समर्थन देना है। आज देश की जनता के पास अपना कल्चरल और पॉलिटिकल एक्सपोजर है, जो पहले की तुलना में कहीं अधिक व्यापक हो चुका है और लगातार बढ़ रहा है। यही बदलाव उस छोटे से तथाकथित बौद्धिक वर्ग को सबसे ज्यादा असहज कर रहा है।
आज साहित्य, सिनेमा और राजनीति के स्वयंभू धुरंधर जैसे ही अपना नैरेटिव सेट करने में नाकाम रहते हैं, वे बेचैन हो जाते हैं। उन्हें समझ नहीं आता कि उनके तमाम विरोध के बावजूद देश की जनता अलग-अलग पहलुओं पर अपनी पसंद और नापसंद क्यों जाहिर कर रही है।
दर्शक व परदे के बीच जुड़ाव का संकेत
आज थिएटर में जनता खुलकर अपनी प्रतिक्रिया दे रही है। कभी रणवीर की एंट्री पर, कभी रहमान डकैत बने अक्षय खन्ना के संवाद पर, तो कभी जमील जमाली बने राकेश बेदी की अदा पर। यह प्रतिक्रिया किसी प्रचार अभियान का परिणाम नहीं, बल्कि उस जुड़ाव का संकेत है, जो दर्शक और परदे के बीच बन रहा है। जनता यह भी देख रही है कि कैसे पाकिस्तान जाली नोटों का कारोबार करता था। कौन-सा मंत्री नोट छापने वाला उपकरण वहां तक पहुंचा गया। नेपाल के रास्ते उत्तर प्रदेश के बूचड़खानों में जाली नोट कैसे खपाए जाते थे। क्या यह संयोग ही था कि 2017 में नई सरकार बनते ही अवैध बूचड़खाने बंद कर दिए गए।
जनता सवाल कर रही है, सोच रही है और अपने निष्कर्ष खुद निकाल रही है। उसे यह कहानी अपनी कहानी लग रही है। एक ऐसी कहानी, जो पहले इस तरह सामने नहीं आई थी।
आज का दर्शक अनछुआ और ईमानदार सच देखना चाहता है। वह केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि अनुभव चाहता है। ‘धुरंधर’ ने उसे शानदार संगीत, सधी हुई एक्टिंग और ठोस डिटेलिंग के साथ यह अनुभव दिया है।
कभी महान फिल्ममेकर मार्टिन स्कॉर्सेसी ने कहा था कि
Cinema is a matter of what’s in the frame and what’s out.
आज असली सवाल यही है कि बदलते सिनेमा के इस नए फ्रेम में कौन भीतर है और कौन बाहर। ‘धुरंधर’ की ऐतिहासिक सफलता के बाद अब सभी की नजरें इसके दूसरे भाग पर टिकी हैं। अच्छी खबर यह है कि ‘धुरंधर-2’ पहले से ही तैयार है और यह 19 मार्च 2026 को दुनिया भर के सिनेमाघरों में रिलीज होगी। फैंस के लिए इंतजार ज्यादा लंबा नहीं है और उम्मीद की जा रही है कि दूसरा भाग भी उतना ही रोमांचक और सफल साबित होगा।






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