अम्मा-बीवी के झगड़े मे
अम्मा-बीवी के झगड़े में फटते रहते हम! अम्मा छोड़े हथगोले तो बीवी फोड़े बम!

अम्मा-बीवी के झगड़े मे
अशोक ‘अंजुम’
अलीगढ
अम्मा-बीवी के झगड़े में फटते रहते हम!
अम्मा छोड़े हथगोले तो बीवी फोड़े बम!
अम्मा कहती- जादूगरनी बहू ब्याह लाई
बेटा मेरा बना लिया है अपनी परछाई
बेडरूम से नहीं निकलता, बेची हया-शरम!
अम्मा छोड़े हथगोले…
बीवी कहती- जब देखो तब मां के पल्लू में,
बाबुल तुमने क्या देखा इस बोंगड़ लल्लू में,
किस भोंदू से ब्याह दिया है, फूटे हाय करम!
अम्मा छोड़े हथगोले…
अम्मा कहती- मां से अपनी चुगल जोड़ती है,
अगर कहो कुछ दीवारों पर मूड़ फोड़ती है,
झूठे दोष लगाती- इस पर होते बड़े जुलम!
अम्मा छोड़े हथगोले….
बीवी कहती- अपनी लड़की प्यारी लगती है,
बहू मगर इस बुढ़िया को बीमारी लगती है,
सास-बहू ने हिला दिया है कुल घर का सिस्टम!
अम्मा छोड़े हथगोले…
अम्मा कहती- आठ-आठ को मैंने पाल दिया,
इसने इक पैदा करके ही पर्दा डाल दिया,
बस उसकी ही पाल पोस में निकल रहा है दम!
अम्मा छोड़े हथगोले…
बीवी कहती- देवरानी से लाड़ लड़ाती है,
मुझ पर बात बात पर बुढ़िया बस गुर्राती है,
उस पर सदा नरम रहती है, मुझ पर रहे गरम!
अम्मा छोड़े हथगोले..
किसे दिखाऊं घाव हृदय के किससे दुख बांटू,
जी करता है जा जंगल में अब जीवन काटूं,
कुछ भी असर नहीं करता अब क्या व्हिस्की क्या रम!
अम्मा छोड़े हथगोले….
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