शून्य के शहंशाह
नतीजे आते ही कांग्रेस की ‘हैटट्रिक’ हो गई या कहे कि कांग्रेस ‘हिट विकेट’ हो गई। यानी साल 2015 के बाद इस बार भी कांग्रेस के खाते में...

सुरेश व्यास
वरिष्ठ पत्रकार
बात दिल्ली विधानसभा चुनावों के नतीजे आने वाले दिन की है। देश की राजधानी दिल्ली में किसकी सरकार बनेगी, ये सवाल दिल्ली ही नहीं, पूरे देश के लोगों के दिमाग में घूम रहा था। हम कौनसा इस सवाल से अछूते रह सकते थे। कहने को पत्रकार न पक्ष, ना विपक्ष, सिर्फ निष्पक्ष होता है, लेकिन पिछले एक दशक से दिल्ली में हर साल जानलेवा होने वाले वायु प्रदूषण का साइड इफेक्ट ऐसा हुआ है कि पत्रकारों पर भी छाप लगी हुई नजर आती है। पार्टियों की डेली ब्रीफिंग हो या फिर कोई नेतायुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस, पत्रकार भी दो धड़ों में बंटे नजर आते हैं। ‘लैग, पैग ते मारूती’ के अनुयायी पत्रकार तो पहले भी थे और अब भी हैं। उन्हें तो मीन्यू व गिफ्ट से मतलब रहता है। भाड़ में जाए सुचिता, वुचिता। दरअसल सही मायने में निष्पक्ष तो अब ये ही लोग रह गए हैं। बाकी हम जैसों को तो लोग प्रेस कॉन्फ्रेंस में पानी भी नहीं पीने की आदत के चलते ‘एलिंयस’ ही मानते हैं।
खैर, वोटों की गिनती शुरू होते ही लगने लगा था कि इस बार आर या पार है। फिर भी हर मीडिया हाउस से भाजपा, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (आप) की बीट सम्भालने वाले पत्रकार अपने झोली-डंडों के साथ कमर कसे हुए थे। पूरे चुनावी परिदृश्य में अन्ना आंदोलन से निकल कर बनी आप अपने शैशवकाल से ही कांग्रेस और भाजपा जैसी पार्टियों को चुनावी अखाड़े में धूल चटा कर सत्ता में अंगद के पैर की तरह अड़ी हुई थी, लेकिन इस बार भाजपा ने भगवान राम से लगभग दूना वनवास खत्म करने की जैसे कसम ही खा रखी थी और कांग्रेस ने केजरीवाल के श्रीमुख से भाजपा की ‘बी-टीम’ का खिताब मिलने से पहले ही गुजरात से पंजाब तक का बदला लेने की ठान ली थी। फिर भी सारा संशय कांग्रेस के प्रदर्शन पर था। उसे लग रहा था कि भाजपा-आप की लड़ाई में वह पांच-सात सीटें तो निकाल ही लेगी, लेकिन नतीजे आते ही कांग्रेस की ‘हैटट्रिक’ हो गई या कहे कि कांग्रेस ‘हिट विकेट’ हो गई। यानी साल 2015 के बाद इस बार भी कांग्रेस के खाते में शून्य।
नतीजे तो नतीजे हैं, एक वोट से अटल जी की सरकार गिर गई थी तो एक वोट से राजस्थान के दिग्गज कांग्रेसी नेता सीपी जोशी चुनाव हार गए थे। अब भले ही कोई ईवीएम पर भूंड का ठीकरा फोड़ दे या फिर धनबल-बाहूबल पर। कांग्रेस की झोली में तो शून्य ही रहा, लेकिन कभी देश की राजनीति में शेर मानी जाने वाली कांग्रेस अब देश और अन्य राज्यों की बजाय शून्यता के महल में राज करती नजर आती है। इस शून्यता की दुनिया में सब कुछ होता है, लेकिन होता कुछ नहीं है। इस शून्यता पर कांग्रेस का हाल जानने हम पहुंचे अलग-अलग जगह तो दृश्य भी अलग अलग नजर आए। आइए आपको भी लाइव बताते हैं, कहां क्या हाल दिखा।
दृश्य एक-
कांग्रेस मुख्यालय
उसके मुख्यालय 24-अकबर रोड़ पहुंचे तो वहां सन्नाटा था। हालांकि इससे पहले कोटला रोड पर कांग्रेस के नए मुख्यालय इंदिरा भवन का उद्घाटन हो गया था, लेकिन शिफ्टिंग अभी पूरी नहीं हुई थी। ऐसे में बड़े नेता पुराने मुख्यालय में ही मिलने की आस थी। ये आस भी निराश भई। कोई बड़ा नेता नहीं। इलेक्शन वार रूम में भी जैसे मरघट पसरा हो। सोशल मीडिया कक्ष में कुछ कर्मचारी जरूर ‘शोकाकुल’ मुद्रा में नजर आए। कक्षा की मुखिया सुबह 10 बजे ही नतीजों की शुरुआत, मध्य और अंत के हिसाब से ट्वीट डिक्टेट करवा के पिछले रास्ते निकल चुकी थी। फोन उनका नो-रिप्लाई होता रहा। दफ्तर में बतिया रहे कुछ कर्मचारियों को टटोला तो कोई कुछ बोलने को ही तैयार नहीं। इसी दौरान मीडिया विभाग के मुखिया के आस-पास डोलते रहने वाले चूनिया जी पर नजर पड़ गई। वे लॉन के एक कौने में मोबाइल पर किसी से बतियाते दिखे। राजस्थान-हरियाणा के बॉर्डर वाले गांव के रहने वाले चूनिया जी से नजीदीकी का फायदा उठाने की गरज से कदम बढ़ाए तो उन्होंने दूर से ही रुकने का इशारा कर दिया। हम इंतजार करते रहे। आखिर स्टोरी जो फाइल करनी थी। कुछ देर बाद चूनिया जी मुंह लटकाए नमूदार हुए। राम-राम करने के साथ बोला कि बॉस से बतिया रहा था। परेशानी ये है कि शाम को ब्रीफिंग में कोई बड़ा नेता सामने आने को तैयार नहीं है। फरके जी ने सफदरजंग रोड वाले अपने बंग्ले पर ‘समीक्षा’ बैठक बुला रखी है। उनका दुःख कुछ कम करने की गरज से हमने कहा, विशोक जी तो दिल्ली में ही होंगे। वे तो पर्यवेक्षक भी रहे हैं। कर दीजिए आगे। उन्हें भी धोरों में मिली हार के बाद एकांतवास से बाहर आने का मौका मिल जाएगा। सुनते ही चूनिया जी ने कहा- ‘जे हुई ना बात…’ और चहकते हुए फोन लेकर बॉस से बतियाने फिर उसी कौने की ओर निकल पड़े। मुझे लगा कि शायद वहां नेटवर्क ठीकठाक पकड़ता होगा।
दृश्य-दो, इंदिरा भवन (कांग्रेस का नया मुख्यालय)
अकबर रोड से निकल पड़े हम कोटला की ओर। यहां कांग्रेस का नया मुख्यालय बना है। नाम है इंदिरा गांधी भवन। दुनिया की सबसे तेज बढ़ती भाजपा के मुख्यालय के करीब है यह नया कांग्रेस दफ्तर। ‘कहां राजा भोज और कहां गंगू तेली….’ वाली कहावत भवन देखकर ही दिमाग में उमड़-घुमड़ आई। कोई दौर था कि देश में किसी ने ‘इंदिरा इज इंडिया एंड इंडिया इज इंडिया’ कहते हुए इंदिरा गांधी की ताकत का अहसास करवाया था। देश ने भी उन्हें कई मौकों पर ‘आयरन लेडी’ के रूप में देखा और महसूस किया था। कहावत और इंदिरा इज…वाक्यांश की सामयिकता को याद करते मन ही मन शून्य वाली कांग्रेस को उस दौर से कम्पेर कर बैठे।
सोचते सोचते रिसेप्शन पर पहुंचे थे कि आवाज आई, ‘आपको किससे मिलने है…?’ हम कुछ जवाब देते इससे पहले ही कानों में एक चिरपरिचित आवाज में ‘आगे पीछे हमारी….यहां के हम हैं राजकुमार….’ गाना गुनगुनाए जाने के स्वर सुनाई दिए। नजरें घुमाई तो साइड वाली सीढ़ियों से कांग्रेस के युवराज उतरते दिखाई दिए। हमारा चेहरा खिल गया कि भई हो गई आज की स्टोरी तो…वह भी एकदम एक्सक्लुजिव। इतने में ही अभिवादन हो गया और काले रंग का लोअर व आधी बांह का सफेद टीशर्ट पहने युवराज सामने आते ही बोले कि अरे भाई यहां कैसे…आपको तो खुशियों में शरीक होना चाहिए, यहां वीराने में कैसे? हमने कहा कि आपकी पार्टी हार गई और दिल्ली में लगातार शून्य की हैटट्रिक…ऐसा कैसे हो गया। कहने लगे- देखिए…धनबल-बाहूबल का खेल है। मोदी जी और उनकी सरकार ने पूरा इस्तेमाल किया। हम लोगों को अपनी बात नहीं समझा सके। मोदी जी को बहुत बधाई….।
‘लेकिन आप तो कहीं भूमिका में भी नहीं रहेंगे दिल्ली में?’
‘देखिए…ये विचारधारा की लड़ाई है…हम लड़ेंगे….यहां नहीं संसद में अपनी बात रखेंगे…कोई कितना ही दमन कर ले, हम बोलते रहेंगे….लड़ते रहेंगे।’ उन्होंने यह भी बता दिया कि अभी फरके जी समीक्षा बैठक करेंगे…इसमें नतीजों का पोस्टमार्टम किया जाएगा।
फिर हमने ‘…यहां के हम हैं राजकुमार’ गाने के बारे में पूछा तो डेढ़ इंच की मुस्कुराहट के साथ युवराज तेज कदमों से आगे बढ़े और कहते गए कि वे तो इस गाने की लाइन पर लिरिक्स बनाने की कोशिश कर रहे थे कि ‘हम हैं…शून्य के सरताज।’
दृश्य तीन
फरके जी का घर, सफदरजंग रोड
कोटला से राजपथ को पार कर हम कांग्रेस के सदर (?) परके जी के सफदरजंग लेन वाले घर के बाहर पहुंचे। शाम करीब सात बज चुके थे। अंदर बैठक शुरू हो चुकी थी और बैरीकेट्स के एक तरफ स्टैंड पर कैमरे और उन पर लगी फ्लैश लाइट्स चमचमा रही थी। पत्रकारों का हुजूम था। हम भी शामिल हो लिए। कुछ भाई लोग हाथों में सींगदाना-वैफर्स के पैकेट लिए नतीजों का पोस्टमार्टम करते दिखे। हमने भी कान लगा लिए। सभी लोग एक बड़े चैनल के राजनीतिक सम्पादक को घेरकर बैठे थे और वे कहे जा रहे थे कि ‘कांग्रेस ने तो जैसे शून्य को गले लगा लिया है….दिल्ली में तो भई रिकॉर्ड ही बन गया…हीरो से एकदम जीरो….।’ इसी दौरान एक कृष्ण मंदिर रिटर्न पंच पटेल बोल उठे कि दिल्ली में कांग्रेस ने पूरे पंद्रह साल तक राज किया। किसी को बढ़ने नहीं दिया, लेकिन फिर ऐसी झाड़ू फिरी है कि जीरो पे जीरो आए जा रहे हैं।
इतने में कांग्रेस को अरसे से देख रही एक वरिष्ठ पत्रकार छेनू कुंत्तल अपना चश्मा सही कहते हुए आगे आई और बोली कि अब इन बातों में क्या रखा है….कांग्रेस कहीं दो पर है….कहीं पांच पर। राज्य गिन लो..धीरे धीरे खिसकते जा रहे हैं। राजस्थान को विशोक ने निपटा दिया….कर्नाटक डी-टीम निपटा देगी। ये बैठकें तो रीत का रायता है बस….। दिल्ली से वैसे लोकसभा में भी कांग्रेस की शून्य वाली शंहशाहत 2014 से लगातार बनी हुई है। वहां भी तो हैटट्रिक हो चुकी।
इसी दौरान हंसी के ठहाके गूंजे। एक ने कहा सही बात है। कांग्रेस ने शून्य को गले लगा लिया है और अब छोटे-भाई मोटे भाई की जगह कांग्रेस के नेता राज्यों में मूकदर्शक की भूमिका को ही अपनी नियती मान बैठे हैं।
फिर एक सटीर कमेंट आया कि चुनावी हार से खुद को होने वाले फायदों की गलतफहमी में समय काट रही कांग्रेस सभी जगह सड़कों की बजाय ट्वीटर पर ज्यादा संघर्ष करती नजर आती है।
इसी दौरान कुछ हलचल हुई और रिपोर्टर माइक गन लिए अलर्ट हो गए। बैठक शायद खत्म हो गई थी। सबसे पहले युवराज के साथ चांदिया जी का काफिला तेजी से बाहर निकला और फिर द्रियंका जी मीडिया की ओर वैव करते हुए निकल पड़ी।
दृश्य चार
विशोक जी की ब्रीफिंग
फरके जी के घर से एक एक कर सभी नेता निकल गए। इसके बाद जेसी माधूगोपाल और गले में काला मफलर डाले विशोक जी कुछ अन्य नेताओं व चूनिया जी के साथ चहल कदम करते हुए बाहर निकले। सभी ऐसे अलर्ट् हो गए जैसे कि बहुत बड़ा धमाका होने वाला हो। स्टैंड पर लगे आईडी माइक के पास आकर सबसे पहले माधूगोपाल बोले कि बैठक हो गई। हमने दिल्ली के नतीजों की समीक्षा की है। साथ ही पार्टी संगठन पर भी विचार हुआ है। हम हार स्वीकार करते हैं और दिल्ली की जनता से वादा करते हैं कि जी-जान से उनकी सेवा करेंगे। इतना कहकह उन्होंने विशोक जी को आगे कर दिया।
गला खंगारते हुए विशोक जी बोले- ‘कांग्रेस अध्यक्ष जी ने नतीजों को गम्भीरता से लिया है…ये नतीजे हमारी उम्मीदों के विपरीत हैं….हमने महशूश किया है कि चुनाव में सत्ता का दुरुपयोग हुआ….लोगों को डराया धमकाया गया…वोटर्स को झूठे वादे किए गए… ईवीएम का भी खेल है…जनता हमारे खिलाफ नहीं थी…फिर भी हम हारे…अब हम प्रत्याशियों से फीडबैक लेंगे और अपनी गलती सुधारने की कोसिस करेंगे…।’
इसी दौरान सवालों की बारिश शुरू हो गई। विशोक जी माधुगोपाल की ओर ताकने लगे। इतने में एक महिला पत्रकार ने पूछ लिया कि दिल्ली के नतीजे तो साफ हैं। आप राजस्थान की बात कीजिए। एक सवा साल पहले सरकार के अच्छे काम और कांग्रेस की गारंटियों के बावजूद बुरी तरह मिली हार से आप लोगों ने क्या सबक लिया है? कुछ जवाब आता, इससे पहले ही पीछे से किसी ने पूछा लिया कि राजस्थान में हार के बाद कांग्रेस ने तो सड़क पर दिख रही है और न ही सदन में। क्या हार का गम अभी तक गलत नहीं हुआ है?
विशोक जी थोड़ा सकपकाए…फिर बोले कि राजस्थान की पर्ची सरकार की हकीकत सभी के सामने हैं। मंत्री के इस्तीफे पर भी चार महीनों से कोई फैसला नहीं लिया जा रहा। सरकार अफसर चला रहे हैं। जनता परेशान हैं। उसे अपनी गलती समझ में आने लगी है। अगले चुनाव में हम इस पर्ची सरकार को उखाड़ फैंकेंगे। सदन में मजबूती से अपना बात रखना चाहते हैं, लेकिन आसन भी दिल्ली की तरह चल रहा है। सही बात कहने वाले सदन से सस्पैंड किए जा रहे हैं। ये लोग शुरू से लोकतंत्र के दुश्मन रहे हैं और लगातार सच्चाई का गला घोंट रहे हैं….।
बीच में ही किसी ने बात काटकर अचिन पाइलेट से विवाद और फोन टेपिंग पर सवाल किया तो विशोक जी मफलर सम्भालते हुए….’अच्छा सुभ रातरी….चाय पीजिए…’ कहते हुए माधुगोपाल के कंधे पर हाथ रखकर भीतर लौट गए।






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