सितारों की फ़ुआरें…यादों के झरोखों से
होता यह है कि कई बार हमारे पास आने वाले लोग अपनी जिंदगी के महत्वपूर्ण मुद्दों को भुलाकर ऐसे प्रश्न पूछ बैठते हैं जो ज्योतिषियों की जिंदगी में भूचाल ले...

विपुल डोभाल
ज्योतिषी
किसी ने सच ही कहा है कि जीवन का दूसरा नाम चुनौती है। आपने सुना होगा ग्रामीण भाषा में चूना रखने वाली डिब्बी को भी चुनौती कहते हैं। हालांकि इन दोनों चुनौती में मुझे बहुत ज्यादा फर्क नहीं दिखाई पड़ता। एक चुनौती से चूना निकालकर लगाया जाता है और दूसरी चुनौती जीवन में जब कोई चूना लगा दे तब सामने आती है। अगर आप ध्यान दें तो जीवन में अनुभवों का जन्म चुनौतियों से ही होता है। जीवन में वर्तमान की चुनौती ही भविष्य में अनुभव कहलाई जाती है। आप सभी की तरह मेरे पास भी कुछ चटपटे अनुभवों का पिटारा है जिसे इस होली पर खोलकर रंगों की फुहार करने का मन हो रहा है।
ज्योतिषी होने के नाते जीवन में प्राप्त हुए कुछ हास्यास्पद अनुभव आपके साथ बांटता हूं। होता यह है कि कई बार हमारे पास आने वाले लोग अपनी जिंदगी के महत्वपूर्ण मुद्दों को भुलाकर ऐसे प्रश्न पूछ बैठते हैं जो ज्योतिषियों की जिंदगी में भूचाल ले आएं। मेरे एक बहुत बेहतरीन क्लाइंट हुआ करते थे जो आध्यात्म, मोक्ष, सामाजिक बदलाव और न जाने क्या-क्या गंभीर विषयों पर बात करते-करते अचानक अपने बच्चों के एयर टिकट का मुहूर्त पूछने पर आ गए। कौन सी फ्लाइट शुभ रहेगी, कितने बजे बैठना चाहिए इत्यादि इत्यादि। अब आप सोचिए यात्रा उनका पुत्र कर रहा है, पैसा एयरलाइन कमा रही है और जब तक वह बच्चा हवा में है, सांस इस निरीह ज्योतिषी की अटकी हुई है । मैं उन सज्जन को कहता था कि प्रभु मुझे क्षमा करें, आपके ये प्रश्न एक दिन मेरा रक्तचाप बढ़ा कर मेरा ही टिकट ना कटवा दें। बहुत मुश्किल से उनको इस प्रकार के छोटे-छोटे वहम की दुनिया से वापस इस अहम की दुनिया में लाया। वैसे वहम और अहम दोनों ही सांसारिक गोते लगवाते हैं। मोक्ष इन दोनों के परे हैं। लोग मोक्ष को लेकर बड़ी-बड़ी बातें करते हैं किंतु इस संसार का गुरुत्वाकर्षण बल भी तो कोई चीज है जो मोक्ष के पलायन वेग में संभवतः बाधा उत्पन्न करता होगा। हम जो कुछ भी मोह माया के रूप में त्यागते हैं वह वापस हमारे ही भीतर जाकर पुनः गिर जाता है।
खैर, एक किस्सा और याद आता है। एक बार बहुत आग्रह करने पर एक बुजुर्ग महिला के घर पर मैं वास्तु की जांच करने गया था। महिला ने बड़े आदर पूर्वक मुझे अपने ड्राइंग रूम में सोफे पर बैठने का आग्रह किया अंदर से चाय और बिस्किट मंगवाए। वह कहने लगी कि मेरे पति अचानक चल बसे हैं। आप जांच करके बताएं कोई वास्तु दोष या किसी ने कोई टोना टोटका तो नहीं कर दिया है। व्यावहारिकता के नाते मैं पूछ बैठा कि क्या हुआ था पतिदेव को? कैसे चले बसे? अब उन्होंने जिस अंदाज में दुखांतिका सुनाई वो मैं इनवर्टेड कोमा के अंदर लिख रहा हूं। उन्होंने मुझे बिस्किट लेने का आग्रह करते हुए दास्तान कुछ यूं सुनानी शुरू की, ” एक शाम को मैं और मेरे पति यहीं बैठे थे। वह इसी सोफे पर बैठे थे जिस पर अभी आप बैठे हैं। हम चाय पी रहे थे। उन्होंने एक बिस्किट उठाया जैसे आपने उठाया है और अपने मुंह तक ले गए, ठीक ऐसे ही जैसे अभी आप ले रहे हैं, और वह वहीं गिर पड़े”। उनकी बात पूरी होने तक बिस्किट मेरे होठों के पास पहुंच चुका था, वापस रखना अशोभनीय लगा और मुंह के भीतर ले जाने की हिम्मत नहीं हो रही थी। बड़ी चुनौतीपूर्ण स्थिति में फंस गया। फिर भी कुंडली में अपने मारक स्थान को स्मरण करते हुए इष्ट देव को याद किया और बिस्किट दांतों से तोड़ लिया। बहरहाल मैं अभी जीवित हूं इसी वजह से आपके सम्मुख हूं। किंतु मैं आज तक नहीं समझ पाया कि वह महिला अपने पति की मृत्यु का वृतांत सुना रही थी या बिस्किट बचाने की कोशिश कर रही थी।
यह दुनिया बड़ी रंग बिरंगी और रोचक है। इतने रंग बिखरे पड़े हैं की होली तो आप साल भर मना सकते हैं। कई बार दो विभिन्न भाषाओं में हुआ वार्तालाप बड़े हास्यास्पद क्षण पैदा कर देता है। ऐसी ही एक घटना याद आती है। मैं तेजपुर में पोस्टेड था और एक बंगाली दादा मेरे पास जन्म कुंडली दिखाने आए। मैंने आकलन के बाद उनको बताया कि बोट नेल रिंग (नाव की कील से बनी अंगूठी) आपको धारण करनी चाहिए। वो बड़े जोश में उसी शाम को बना लेने का प्रण करके निकल गए। शाम को मैं, श्रीमती जी के साथ सब्जी लेने निकला तो देखा वो शक्श एक मोची के पास बैठे थे। मुझ पर उनकी नज़र पड़ी तो एकदम खड़े हो गए और कहने लगे कि सर ये तो कह रहा है नहीं बनेगी। मेरा सर चकरा गया कि ये बंधु यहां क्या कर रहे हैं। पूछने पर वो बोले ” दादा आप ही बोला था ना बूट की कील का रिंग बनाना है “। मैने अपनी हथेली अपने ही माथे की तरफ उछाली और उनको बताया प्रभु जी बोट की कील कहा था बूट की नहीं। बहरहाल तब तक उनके फौजी बूट की हील दो टुकड़ों में बंट चुकी थी। मेरी हंसी और उनकी शर्मिंदगी, दोनों एक ही समय पर हमारे चेहरों पर बिखर पड़ी।
मैं चाहूंगा कि इस महीने आप ग्रह नक्षत्रों के प्रभावों से दूर खुद को रंगीन रखें। फाग का महीना रंग बिरंगी खुशियों का महीना है। आपका हर पल रंगो भरा बीते इस कामना के साथ होली की शुभकामनाएं।






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