सेल्फी बिना होली
आप शर्मा जी को नहीं जानते। जान भी नहीं सकते, क्योंकि वह आपकी कॉलोनी में नहीं, हमारी कॉलोनी में रहते हैं। होली से पहले "प्री-वेडिंग फोटोग्राफी" की तर्ज़ पर जब उनकी होली वाली फोटोग्राफी, सोशल मीडिया पर...

अरविंद तिवारी
शिकोहाबाद (फिरोजाबाद)
आप शर्मा जी को नहीं जानते। जान भी नहीं सकते, क्योंकि वह आपकी कॉलोनी में नहीं, हमारी कॉलोनी में रहते हैं। होली से पहले “प्री-वेडिंग फोटोग्राफी” की तर्ज़ पर जब उनकी होली वाली फोटोग्राफी, सोशल मीडिया पर वायरल होती है, तब जाकर शहर में होली का मूड बनता है। बंदा वसंत पंचमी से ही होली के मूड में आ जाता है। चेहरे पर खुशी ऐसे झलकती है, जैसे उन्हें दो प्रमोशन एक साथ मिल गए हों! शर्मा जी जैसे लोगों की नस्ल अब विलुप्त होने के कगार पर है।
इस बार होली की सुबह जब कल्लू दूधिया ने शर्मा जी को बताया, कॉलोनी के तीन घरों में सन्नाटा पसरा है तो शर्मा जी का माथा ठनका! होली हुड़दंग का त्योहार है, सन्नाटे का नहीं। शर्मा जी सन्नाटे वाले घरों की तरफ रवाना हो गए। पहला घर सन्नी जी का था, जो एक लेखक थे। सन्नी जी ने बेमन से शर्मा जी का स्वागत किया। पता चला घर की असीम शांति के पीछे होली पर लिखे एक ललित निबंध का हाथ है, जो तीन अख़बारों को भेजा था, पर कहीं नहीं छपा। अख़बारों में सन्नी के प्रतिद्वंदियों के लेख, उन्हें चिढ़ा रहे थे। शर्मा जी ने कहा, “वह लेख मुझे मेल कर दो। अपने शहर के वरिष्ठ नागरिकों की संस्था, एक पत्रिका छपवा रही है, जिसका मैं संपादक हूं।” सन्नी जी की उदासी टूट गई। उनकी पत्नी ने शर्मा जी को गुझिया खिलाई और अबीर लगाया।
दूसरा सन्नाटा वाला घर कवि घसीटा का था। इस बार होली के महामूर्ख सम्मेलन में उन्हें कविता पढ़ने के लिए आमन्त्रित नहीं किया गया था। शर्मा जी ने सम्मेलन के आयोजकों की लानत मलामत करते हुए घसीटा को समझाया, “घसीटा जी आप तो देखने में ही महामूर्ख लगते हैं! ये सब एक न एक दिन ज़रूर पछताएंगे। अब उदासी छोड़ो और होली खेलो। दो दिन बाद कॉलोनी का होली मिलन समारोह है। तब आपको सम्मान के साथ काव्य पाठ हेतु आमन्त्रित किया जाएगा। “किसी कवि के लिए काव्य पाठ का आमंत्रण होली दीवाली सब होता है। हर कवि कविता पाठ के लिए हमेशा लालायित रहता है। घसीटा जी के घर भी होली का हुड़दंग शुरू हो गया। शर्मा जी के साथ घसीटा ने होली खेली और उनके साथ ही तीसरे घर का सन्नाटा दूर करने चल पड़े।
तीसरा घर कपूर साहब का था, जो न कवि थे और न लेखक। यहां जो सन्नाटा था, वह मातमी किस्म का था। पूछने पर पता चला उनके सभी रिश्तेदार सही सलामत हैं। सिर्फ इतना हुआ कि उन्होंने आज सुबह अपने नौकर को मार पीट कर निकाल दिया है। “होली के दिन आपने ऐसा अनर्थ क्यों किया”, जब शर्मा जी ने पूछा तो कपूर साहब और उदास हो गए। बहुत पीछे पड़ने पर उन्होंने बताया, “पूरा घर अपने अपने मोबाइल में व्यस्त रहता था। नौकर को परेशानी होती थी। उसने कहीं पढ़ लिया कि होली के दिन मोबाइल, जलती होली में फेंकने से असीम सुख मिलता है। घर में समृद्धि आती है। वह इस जोक को समझ नहीं पाया। नौकर ने आधी रात के बाद घर भर के स्मार्ट फोन बटोर कर, जलती होली में फेंक दिए। सुबह जब घरवालों ने नौकर पर फोन चोरी का आरोप लगाया, तो उसने सच सच बता दिया। किसी घर में यदि एक भी स्मार्ट फोन न हो, तो इससे बड़ा मातम और क्या हो सकता है?”
कपूर साहब की पीड़ा सुनकर शर्मा जी की हंसी नहीं रुक रही थी। उन्होंने कपूर साहब से कहा, “जैसा नौकर आपको मिला, इस ज़माने में दुर्लभ है। आप नौकर को मनाकर घर ले आओ। रही स्मार्ट फोन जाने की, तो फिर से खरीद लेना। नौकर का भाव आपके घर के प्रति वफादारी वाला है। वह आपके परिवार में प्रेम बढ़ाना चाहता है जो स्मार्ट फोन के कारण लुप्त हो गया है। अब होली खेलने निकलो। आज देखना, सेल्फी बिना होली कितनी रंगीन होती है!”






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