होली के रंग कवयित्रियों के संग –
होली गीत ओरे पिचकारी नहीं मार रे सांवरिया भीग जाएगी रे मोरी कोरी चुनरिया

होली के रंग कवयित्रियों के संग –
पूर्णिमा जायसवाल ‘अदा’, जोधपुर
होली गीत
ओरे पिचकारी नहीं मार रे सांवरिया
भीग जाएगी रे मोरी कोरी चुनरिया
सर पे जो रख्खू जो मैं भर के गगरिया
मरी मरी जाऊं मोरी लचके कमरिया
बतियां छुपा लूंगी मैं सारी लेकिन
कह कह जाए मोरी बाली उमरिया
बड़ी मुश्किल लागे प्रेम की डगरिया
भीग जाएगी रे कोरी कोरी चुनरिया
सखिया अकेले में क्या-क्या बतावे हैं
उनकी तो सुन सुन के लाज मोको आवे है
मलमल की झिलमिल सोने जरी की
चुनरी निगोड़ी मोरी सरक सरक जावे है
कैसे मैं पहनू कि तंग है अंगरिया
भीग जाएगी रे मोरी कोरी चुनरिया
हट तेरे आगे ना कोई चले है
कोई बहाना ना मुझको मिले है
कोई कामकाज तुझको सूझे नहीं है
प्रेम के ही फूल तेरे मन में खिले है
सौंप रही हूं मैं तो तुझको सांवरिया
भीग जाने दे रे अब कोरी चुनरिया
प्रीत के रंगों में तू रंग दे सांवरिया
भीग जाने दे रे कोरी कोरी चुनरिया
- पूर्णिमा जायसवाल © ‘अदा’ जोधपुर
डॉक्टर सरिता शर्मा, लखनऊ
1.
ओ ऋतुराज चले मत जाना
चुन लूं मैं कुछ फूल बसंती
सुन लूं कुछ बातें रसवंती
गगन सरीखे प्रिय से मिल लूं
बन जाऊं धरती लज वंती
उस वेळा तुम मंगल गाना
ओ ऋतुराज चले मत जाना
वासंती परिधान संवारे
तन मन प्राण हुए मतवारे
जन्म जन्म की आस संजोये
ज़ब आऊँ मैं उनके द्वारे
तुम राहों पर फूल बिछाना
ओ ऋतुराज चले मत जाना
कितने युग बीते भटकन में
जलते प्राण अत्रिप्त अगन में
ज़ब वे बनकर मेघ प्रणय का
अमृत बरसाएं कण कण में
मंगल परिणय पर्व मनाना
ओ ऋतुराज चले मत जाना।
होली पर छंद
अइयो रे तू होरी के खिलाड़ी पिचकारी धर
देखींगे अनाड़ी है के सांचो ही खिलाड़ी है
गोपीन के दल से तू जीत पावे, तोहे जानूं
वैसे तो सुनी है श्याम गिरिवर धारी है
जसुदा के लाल फिर करियो मलाल मत
होरीन में होरी एक बरसाने वारी है
छोरन में छोरा जैसे नन्द जू को लाल और
गोरीन में गोरी वृषभानु की दुलारी है
- डॉ. सरिता शर्मा, नोएडा
डॉ. सूरज माहेश्वरी, जोधपुर
दिलों में प्रीत की होली लबों पर जीत की होली
कि देखी है कहां तुमने मेरे मनमीत की होली
मेरी चाहत हो खुशहाली यहां पर सब के आंगन में
किसी के हार की ना हो, हो सबके जीत की होली
मैं ले आई हूं फूलों के सभी ये रंग होली में
बजे है प्रीत की मनुहार की है चांग होली में
जिधर देखूं मुझे तू ही, मुझे तू ही नजर आए
चढ़ी है इस कदर मुझको ये देखो भांग होली में
आया महीना फागुन का हम मिलकर धूम मचाएं
रंग देंगे तन मन सबका सब इंद्रधनुष बन जाएं
सखियां पूछ रही मुझसे तुम मिलने कब आओगे
तुम आओ तो सांवरिया हम मिलकर रंग लगाएं






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