ओलों, अलार्म और अधिकारियों की दीपावली
राजस्थान में इस बार सबसे ज़्यादा एक्टिव दो ही विभाग हैं। एक मौसम वाला, दूसरा माप-तौल वाला। मौसम विभाग आसमान तौल रहा है, और माप-तौल विभाग दुकानदारों के बाट। जयपुर में अनेक दुकानों पर छापा मारकर लाखों...

बलवंत राज मेहता,
वरिष्ठ व्यंग्यकार
इस बार राजस्थान में दीपावली की शुरुआत फुलझड़ी से नहीं, फायर अलार्म से हुई है। जयपुर का आसमान आतिशबाज़ी नहीं, बादलों की बिजली से चमक रहा है और धरती पर सरकार “फायर सेफ्टी गाइडलाइन” की झिलमिलाती लड़ी टांग रही है। पश्चिमी विक्षोभ ने इस बार दीपावली को ‘बरसात उत्सव’ बना दिया है। मौसम विभाग रोज़ टीवी पर भविष्यवाणी करता है आज ओले गिरेंगे और जनता सोचती है चलो मिठाई तो नहीं खरीद पाए, ओले ही मुफ्त में गिर रहे हैं!
सम्पूर्ण दीपावली विशेषांक देखें-
RAJASTHAN TODAY DEEPAWALI EDITION
राजस्थान में इस बार सबसे ज़्यादा एक्टिव दो ही विभाग हैं। एक मौसम वाला, दूसरा माप-तौल वाला। मौसम विभाग आसमान तौल रहा है, और माप-तौल विभाग दुकानदारों के बाट। जयपुर में अनेक दुकानों पर छापा मारकर लाखों का जुर्माना ठोका गया। सरकार ने कहा उपभोक्ता हित में कार्रवाई।
जनता ने कहा अच्छा हुआ, दीपावली बोनस से पहले दुकानदारों की कमाई पर सेंध लग गई, वरना महंगाई की लक्ष्मी और चौड़ी मुस्कराती।
उधर एसएमएस अस्पताल में आग लगी और सरकार को अचानक याद आया कि अस्पताल में फायरमैन नहीं थे। अब तीन- तीन शिफ्ट में फायरमैन रहेंगे। मतलब मरीजों की जिंदगी पर भरोसा नहीं, पर फायर अलार्म पर पूरा विश्वास। जहां डॉक्टरों की कमी है, वहां अब फायरमैन इलाज करेंगे। मरीज बोले बुखार हो या ब्लास्ट, हर केस में फायरमैन तैयार है!
इधर रेल विभाग भी पटरी पर नहीं, पटरी से नीचे है। रींगस और श्रीमाधोपुर के बीच मालगाड़ी पटरी से उतर गई। कहते हैं, बैल को बचाने के चक्कर में। अब सवाल ये है कि इस देश में रेल को बैल से बचाना ज़रूरी है या जनता को रेल से? रेलवे ने राहत की खबर दी किसी की जान नहीं गई। जनता बोली क्यों जाती? जनता तो पहले ही ट्रेनों से उम्मीद छोड़ चुकी है।
सोने- चांदी की कीमतें इतनी तेज़ी से भागी हैं कि इस बार लोग दीपावली में सोना नहीं, सोने की दुकान के बोर्ड देखकर ही संतोष कर रहे हैं। चांदी खरीदना तो अब ऐसा लगता है मानो लोन पर ग्रहण लगवाना हो। और ऊपर से मिठाई इतनी महंगी कि लोग अब ‘मीठी शुभकामनाएं’ ही भेजकर काम चला रहे हैं।
सरकार ने घटाया, लेकिन…
जीएसटी घटाने का सरकारी ऐलान भी हुआ पर दुकानों तक पहुंचते-पहुंचते वो घटा नहीं, बढ़ा हुआ निकला। कहावत बन गई सरकार जीएसटी घटाती है, बाजार बढ़ा देता है। मिठाई वाला बोला साहब, टैक्स घटा है, पर दूध का भाव बढ़ गया। अब रसगुल्ले के डिब्बे में गुल्ले कम, रस ज़्यादा हैं। दीपावली की सजावट में इस बार दीये कम, पंफलेट ज़्यादा हैं, सुरक्षा अपनाइए, फायरमैन बुलाइए। शहर में हर गली में गड्ढे हैं, पानी है, बिजली के तार खुले हैं और सरकार कह रही है जयपुर जगमगा रहा है। जनता सोचती है हां, हर बार बिजली गिरने के बाद ही तो चमक आती है!
राजस्थान की यह दीपावली किसी उत्सव से ज़्यादा एक सरकारी फाइल जैसी है। ऊपर से रंगीन, अंदर से नम। जहां मिठाई की जगह नोटिस मिल रहे हैं, पटाखों की जगह ओले फूट रहे हैं, और दीयों की लौ में अब सरकारी बयान झिलमिला रहे हैं।
सरकार कह रही है सब नियंत्रण में है। मौसम कह रहा है अभी तो असली बरसात बाकी है। और जनता वो बस छत के नीचे दीया जलाते हुए सोच रही है इस बार दीपावली नहीं, फाइलावली है। हर घर में अलार्म, हर जेब में बिल, और हर दिशा में ओले गिर रहे हैं। मजे की बात तो ये है कि दशकों से चली आ रही त्योहार पूर्व बिजली कटौती की परम्परा रखरखाव के नाम पर बदस्तूर जारी है। फिर कैसे कह दें तुम्हें कि हम इस युग में बहुत आगे बढ़ गए हैं।






No Comment! Be the first one.