खाली कुर्सियां और खामोश मंच
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की पहली सिरोही सभा संगठनात्मक कमजोरियों, खराब समय प्रबंधन और स्थानीय मुद्दों की अनदेखी के कारण फीकी रही। भीड़ प्रबंधन और कार्यकर्ताओं की नाराजगी ने स्थानीय भाजपा नेतृत्व की...

सिरोही- सीएम की पहली सभा का राजनीतिक संदेश
गणपत सिंह मांडोली,
वरिष्ठ पत्रकार
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सीएम बनने के बाद 22 जनवरी को पहली बार सिरोही पहुंचे भजनलाल शर्मा की सभा को यादगार बनाने में स्थानीय भाजपाई विफल रहे। सिरोही, जालोर और पाली तीन जिलों की आमसभा में भाजपाई अपेक्षित भीड़ नहीं जुटा पाए और जो लाए वो भी सीएम का भाषण शुरू होते ही रवाना हो गई। आमजन को सभा का समय सुबह 10 बजे प्रचारित करने से लोग निर्धारित समय पर पहुंचने शुरू हो गए थे, जबकि सीएम भजनलाल शर्मा दोपहर ढाई बजे पहुंचे। सीएम के आने से पहले स्थानीय सांसद, विधायक समेत भाजपा नेताओं के भाषण हुए और इसके बाद सिरोही विधायक पंचायतीराज विभाग राज्यमंत्री ओटाराम देवासी, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ व सहकारिता मंत्री गौतक कुमार दक ने भाषण दिया।
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सीएम का भाषण शुरू होते-होते साढ़े 3 बज गए। चार घंटे से भी ज्यादा समय से बैठे लोग सीएम के भाषण में भी स्थानीय मुद्दें शामिल नहीं होने से रवाना होने लगे और देखते ही देखते 15-20 मिनट में पांडाल आधे से ज्यादा खाली हो गया।
भीड़ रोकने में संगठन की उदासीनता
खास बात यह है कि सीएम की माकूल सुरक्षा बंदोबस्त में प्रशासन की ही हुजूरी में लगे भाजपाईयों ने भीड़ को रोकने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। मंचासीन सिरोही भाजपा की मुखिया रक्षा भंडारी और राज्यमंत्री ओटाराम देवासी ने भी अपनी कुर्सी से उठकर लोगों को रोकने की जरूरत नहीं समझी। पूरा कार्यक्रम सिर्फ स्वागत और भाषण तक ही सीमित रहा। बतौर सीएम भजनलाल शर्मा के पहली बार सिरोही आगमन पर भाजपाई बेहद खुश थे और इसके प्रचार-प्रचार के लिए पोस्टर-बैनर भी लगवाए। हालांकि, यह अलग बात है कि सीएम की सभा के हिसाब से भाजपाई भीड़ जुटाने और जो लाई उसको रोकने में नाकाम रहे।
मांगें रखी गईं, सरकार खामोश रही
पहली बार सीएम की सभा से अतिउत्साहित स्थानीय विधायक राज्यमंत्री ओटाराम देवासी ने सिरोही में विकास की गंगा बहाने की बात करते हुए सिरोही में वेटरनरी कॉलेज की मांग की। करीब पौने घंटे तक के भाषण में सीएम ने सिरोही तो क्या जालोर और पाली जिले के लिए भी कोई सौगात का जिक्र नहीं किया। ओटाराम देवासी की मांग पर भी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
कड़ी सुरक्षा, अलग-थलग कार्यकर्ता
सिरोही में सीएम की सभा को लेकर कड़े सुरक्षा बंदोबस्त किए गए थे। चप्पे-चप्पे पर पुलिस और अन्य सुरक्षाकर्मी तैनात थे। मॉनिटरिंग में अफसरों की भी लंबी कतार थी। पहली बार किसी सीएम की इतनी सख्त सुरक्षा व्यवस्था देखी गई। इतनी सख्ती से खुद भाजपाई भी धक्के खाते दिखे। पार्टी के लिए दिन-रात मेहनत करने वाले कार्यकर्ताओं व पदाधिकारियों तक को पांडाल में आने की अनुमति नहीं दी गई। कार्यकर्ताओं ने अपनी पीड़ा संगठन की मुखिया और राज्यमंत्री को सुनाई, लेकिन उनकी तक अफसरों ने नहीं सुनी।
गैरहाजिरी और असहज संकेत
सभा में जिले के प्रभारी मंत्री केके विश्नोई की गैरहाजिरी ने राजनीतिक अटकलों को और हवा दी। मुख्यमंत्री की पहली यात्रा में ही ऐसी अनुपस्थिति को महज संयोग मानना कठिन है। यह स्थानीय सत्ता-संतुलन और अंदरूनी समन्वय की कमी की ओर इशारा करता है।
खाली कुर्सियों का राजनीतिक संदेश
सिरोही की सभा में खाली हुई कुर्सियां केवल अव्यवस्था का परिणाम नहीं थीं। वे सत्ता और संगठन के बीच बढ़ती दूरी, संवादहीनता और जमीनी मुद्दों की अनदेखी का प्रतीक बन गईं। मुख्यमंत्री की पहली यात्रा यदि उत्साह पैदा नहीं कर सकी, तो आने वाले समय में सरकार और संगठन दोनों को इस संकेत को गंभीरता से पढ़ना होगा।






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