मुक्त व्यापार की छाया में केंद्रीय बजट
वैश्विक टैरिफ दबावों और मुक्त व्यापार समझौतों की पृष्ठभूमि में प्रस्तुत बजट 2026-27 में सरकार की प्राथमिकताएं बदली नजर आती हैं। पूंजीगत खर्च, कर राहत और कृषि जैसे मुद्दों पर खामोशी के बीच एमएसएमई,...

बजट विश्लेषण – वैश्विक दबावों के बीच बजट 2026-27 की आर्थिक दिशा
डॉ पी एस वोहरा,
आर्थिक मामलों के जानकार
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मोदी सरकार द्वारा वर्ष 2026-27 का बजट पूर्णतया वैश्विक स्तर पर हुए बदलावों के दबाव में और इसके चलते ही तीव्र आर्थिक सुधार बजट से नदारद दिखे। इस बजट में आम जनता को ना तो किसी तरह से करों की दरों में कमी मिली और ना ही महंगाई से पड़ रही मार से कोई राहत। सबसे अधिक हैरानी वाली बात सरकार के द्वारा पूंजीगत खर्चों में बढ़ोतरी के संबंध में भी कोई घोषणा नहीं हुई जो बीते कई वर्षों में मोदी सरकार की एक बहुत बड़ी ताकत रही है और इसी के चलते बजट के तुरंत बाद स्टॉक मार्केट में बहुत बड़े स्तर गिरावट पर दर्ज हुई।
बजट 2026-27 के संबंध में विश्लेषण का आधार यही बताता है कि सरकार, राष्ट्रपति ट्रंप की टैरिफ नीतियों के दबाव के चलते पहले से ही दिवाली से पूर्व जीएसटी की दरों में बहुत बड़े स्तर पर कमी कर चुकी है और उसे राजस्व में बड़ी कमी हुई और इसके साथ ही पिछले वित्तीय वर्ष में सरकार के द्वारा आयकर की सीमा में भी बड़ा बदलाव किया गया जिसके चलते भी प्रत्यक्ष करों के संग्रहण में तुलनात्मक रूप से कमी हुई है। इसी कारण पूंजीगत खर्चों में बढ़ोतरी पर कोई घोषणा नहीं हुई जो यकीनन मोदी सरकार की उस सोच पर एक प्रश्न उठता है जो हमेशा से उसकी पहचान हुआ करती थी।
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विश्लेषण का अन्य आधार यह भी है कि ये बजट पूर्णतया सरकार के द्वारा ट्रंप की टैरिफ नीतियों से बचने के लिए बीते कुछ महीनों में बड़ी तेजी से हुए मुक्त व्यापार समझोतों की छाया में बना है। सरकार जीएसटी के दरों में कमी से घरेलू बाजार में बचत को पहले से ही बढ़ा चुकी है और अब सरकार का पूरा फोकस मुक्त व्यापार समझौते के तहत निर्यातों को बढ़ाने पर है और उसी के माध्यम से विदेशी पूंजी बाजार के संग्रहण पर भी। सरकार ने राजकोषीय घाटे पर नियंत्रण को स्थापित कर लेने के लिए अपनी पीठ भी थपथपाई है। और इस संबंध में वर्ष 2021-22 में की गई घोषणा के तहत राजकोषीय घाटे 4.5 प्रतिशत से नीचे लाने में सफलता का जिक्र भी किया है और आगामी बजट में इसे 4.3 प्रतिशत पर लाने के उद्देश्य को बड़ी प्रमुखता के साथ रखा भी है।
बजट के अंतर्गत मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बढ़ाने के लिए एमएसएमई पर ध्यान केंद्रित किया गया है जो बहुत उत्साह जनक है। एमएसएमई को पूंजी सहायता के लिए 10000 करोड़ रुपए के घोषणा की गई है, इसके अतिरिक्त जोखिम से निपटने के लिए 2000 करोड़ के अतिरिक्त फंड की भी घोषणा है। छोटे शहरों में एमएसएमई को विभिन्न प्रकार की सहायता के लिए सरकार ने एक अच्छी पहल करते हुए विभिन्न प्रोफेशनल संस्थानों को छोटे उद्योगों के साथ एकीकृत करने की घोषणा भी की है।
एआई के क्षेत्र में भारत को अपनी बढ़त बहुत तेजी से बढ़ानी होगी और इसके लिए सरकार के द्वारा सभी विदेशी कंपनियों को जो भारत में क्लाउड सर्विसेज के अंतर्गत अपनी सेवाएं प्रदान करेगी उनसे 2047 तक शत प्रतिशत कर छूट देने की घोषणा की है, यह कदम बहुत उत्साहजनक है। परंतु एआई के वे भारतीय स्टार्टअपस जो भारत छोड़कर अमेरिका में सेवाएं दे रहे हैं उन्हें वापस आकर्षित करने के प्रयासों पर बजट में चुप्पी अखरती है।
वैश्विक बाजार में भारत की जैविक दवाइयां के उत्पादन में बढ़त को स्थापित करने की पहल फार्मा सेक्टर के लिए बहुत उत्साहजनक है। इसके अलावा स्वास्थ्य के क्षेत्र में सरकार के द्वारा निजी क्षेत्र के साथ आगे बढ़ते हुए पांच क्षेत्रीय मेडिकल हब बनाने की बात की गई है जिसके अंतर्गत विभिन्न प्रकार की बीमारियों की की जांच, आवश्यक देखभाल और मरीज की पुनर्वास से संबंधित सभी सुविधाओं को एक छत के नीचे लाने की बात की गई है इससे आने वाले समय में स्वास्थ्य के क्षेत्र में रोजगारों की भरने की काफी संभावना है। कैंसर की 17 दावों को कस्टम ड्यूटी खत्म करना भी एक आवश्यक अच्छी पहल के रूप में रखा जा सकता है। इससे समाज को एक बड़ी राहत मिलेगी।
रेल कॉरिडोर के अलावा कोई बड़ी घोषणा नहीं
इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट में 7 रेल कॉरिडोर के अलावा कोई बड़ी घोषणा नहीं दिखी जो बड़ा हतप्रभ करती है। किसानों के संबंध में उनकी आय को शुरू से दुगना करने की बात करने वाली मोदी सरकार इस बजट में पूर्ण रूप से शांत दिखी। मात्र कुछ घोषणाएं काजू और नारियल की खेती के संबंध में की गई है ताकि उस संबंध में भारत आत्मनिर्भरता को प्राप्त करके निर्यातों की तरफ बड़ी तेजी से बढ़े। परंतु उसके अलावा किसानों के ऋण व एमएसपी इत्यादि पर कोई बात नहीं रखी गई है जो बहुत निराशाजनक है। बैंकिंग सेक्टर के लिए जरूर सरकार ने एक कदम आगे बढ़ते हुए विकसित भारत की सोच के अंतर्गत उन्हें मुख्यधारा में सम्मिलित करने के लिए एक कमेटी बनाने की बात रखी है जिससे आने वाले समय में ग्रामीण क्षेत्र के अंतर्गत बैंकिंग का और विस्तार संभव है और आधुनिकीकरण की तरफ भी एक कदम आगे बढ़े।
सिर्फ उच्च स्तरीय कमेटी बनाने की बात
सरकार ने इस बजट के माध्यम से रोजगारों को सर्विस क्षेत्र के माध्यम से बढ़ाने के लिए पहला जरूर की है परंतु प्राथमिक स्तर पर अभी सिर्फ एक उच्च स्तरीय कमेटी बनाने की बात की गई है जिसके माध्यम से ऐसे क्षेत्र की पहचान करने की कोशिश की जाएगी जहां पर उन्नति की संभावना है और उसे हेतु शैक्षणिक संस्थानों में युवाओं के अंतर्गत आवश्यक स्किल और क्षमता के विकास के लिए पारस्परिक तालमेल को स्थापित किया जाएगा। परंतु इसके परिणाम भी अभी भविष्य की गर्त में ही है। शोध व अनुसंधान की बात करें तो इस पक्ष पर सरकार ने बढ़ोतरी करने के लिए पांच विश्वविद्यालय कॉरिडोर बनाए जाएंगे जो निजी क्षेत्र उद्योगों के साथ कार्य इस पक्ष पर कार्य करेंगे। लड़कियों व महिलाओं को इस हेतु मुख्यधारा में रखने की कोशिश की गई है और उनकी शिक्षा हेतु शहरों में अलग से हॉस्टल्स बनाने की बात भी रखी है। पर्यटन के क्षेत्र के लिए सरकार के द्वारा 20000 जगहों के लिए 10000 गाइड की ट्रेनिंग की व्यवस्था की गई है और इस हेतु सभी आवश्यक क्रियांवन भारतीय प्रबंधन संस्थान के द्वारा किया जाएगा।
हालांकि 16 वित्त आयोग द्वारा अपनी रिपोर्ट 17 दिसंबर 2025 को ही संसद में प्रस्तुत की गई थी परंतु उसे शीत सत्र के अंतर्गत सरकार ने संसद के पटल पर नहीं रखा था परंतु इस बजट में वित्त आयोग द्वारा 41 प्रतिशत राजस्व का बंटवारा राज्यों को करने के वित्त आयोग के प्रस्ताव को सरकार ने स्वीकार कर लिया है और इसके अंतर्गत तकरीबन एक लाख करोड़ से ऊपर की वित्तीय रकम राज्यों को दी जाएगी। कर से संबंधित घोषणाओं के अंतर्गत कंपनियों में अल्पसंख्यक अंश धारकों के हितों को सुरक्षित रखने हेतु बायबैक योजना के अंतर्गत अब कंपनियों के प्रमोटर्स को 22 प्रतिशत कर देना होगा और वहीं अन्यों को 30 प्रतिशत।
स्टॉक मार्केट धराशायी
स्टॉक मार्केट में आम दिवेशक अपना हाथ न जला पाए इस हेतु फ्यूचर व ऑप्शन में होने वाले निवेश पर सरकार के द्वारा कर (एसटीटी) पर बढ़ोतरी की गई है जो अवनी बेसिक केतु हित में है लेकिन स्टॉक मार्केट में इसका नकारात्मक रूप तुरंत देखने को मिला और उसी के चलते भारी गिरावट दर्ज हुई।
इन सब के बीच में इस बात की निराशा बहुत अधिक हुई कि सोने और चांदी के मूल्य पर लगातार हो रही बढ़ोतरी पर सरकार के द्वारा किसी भी प्रकार की ड्यूटी कम नहीं की गई। चांदी के मूल्य में हो रही अप्रत्याशित वृद्धि जिसने असंगठित क्षेत्र के रोजगार पर बहुत बड़ी मार पहले से ही कर दी है उसे पर सरकार का मौन रहना समझ से बाहर है। ये विदित है कि चीन ने चांदी के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया है और ये उसका ही नतीजा है। हालांकि सोने के मूल्य में हो रही बढ़ोतरी पर सरकार के द्वारा ये कहा जाता रहा है कि ये सब केंद्रीय बैंक के द्वारा हो रही खरीदारी के चलते हैं ताकि भविष्य में डॉलर के मूल्य पर हो रही वृद्धि को नियंत्रित किया जा सके हालांकि ये पक्ष भी आम जनता के समझ से बाहर है। इसके चलते भारतीय समाज में अब आम आदमी सोना व चांदी दोनों के आभूषणों की खरीदारी से दूर हो जाएगा।
इसके अलावा इस बात से सभी परिचित है कि चीन बड़ी तेजी सेएआई, ग्रीन टेक्नोलॉजी व दुर्लभ मुद्रा खनिज पर अपनी बढ़त बना रहा है और इन्हीं सबके चलते भारत की चीन पर निर्भरता बढ़ भी रही है, इस पक्ष पर भी मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए किसी भी तरह के कोई प्रोत्साहन बजट में नहीं दिखा।
सरकार ने सर्विसेज सेक्टर के अंतर्गत आईटी सेक्टर पर बहुत भरोसा जा रहा है और उन्हें सेफ हार्बर की सीमा जिसके माध्यम से वह विभिन्न प्रकार की तकनीकी वह वैधानिक अर्चना से बच सकते हैं वह 300 करोड़ से बढ़कर 2000 करोड़ कर दिया है। इसके माध्यम से आने वाले समय में आईटी सेक्टर के अंतर्गत विभिन्न सुविधाओं में सरलीकरण देखने को मिलेगा और लागत में कमी तथा कार्य कुशलता में वृद्धि होगी जिससे वैश्विक स्तर पर भारत की पहचान इस पक्ष पर और तेजी से बढ़ेगी और बीते दिनों हुए मुक्त व्यापार समझौता के माध्यम से कुछ देशों में भारत अपनी भारत को तेजी से स्थापित कर सकेगा।






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