नई उड़ान की ओर कोटा
कोचिंग की राजधानी कोटा अब पर्यटन, हेरिटेज और प्राकृतिक सौंदर्य के नए आयाम गढ़ रहा है। एयरपोर्ट, रिवर फ्रंट और मुकुंदरा रिजर्व जैसे प्रोजेक्ट शहर को नई पहचान दे रहे...

कोचिंग नगरी से पर्यटन हब बनने की राह
अरविंद गुप्ता,
वरिष्ठ पत्रकार
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चंबल नदी किनारे बसा कोटा। इस शहर की आबोहवा में सफलता की खुशबू है। देश के विभिन्न राज्यों से यहां पढ़ाई के लिए आने वाले किशोर उम्र के हजारों बच्चे अपने लक्ष्य को लेकर दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। जिससे यह शहर जीवंत दिखाई देता है। बीते तीन दशकों से शिक्षा और विद्यार्थियों से जुड़े कई तरह के छोटे-बड़े व्यवसाय कोटा की अर्थव्यवस्था को संभाले हुए हैं। देश के हर राज्य की संस्कृति की झलक यहां दिखाई देती है। पढ़ाई के लिए अच्छे स्कूल, कॉलेज, छह यूनिवर्सिटी, ट्रिपल आईटी एवं ब्रांड कोचिंग संस्थानों के साथ यहां के मेस व रेस्टोरेंट में भोजन, हॉस्टल में हर राज्य का पहनावा, भाषा, रहन-सहन और त्योहारों का उल्लास यहां की संस्कृति को समृद्ध बनाए हुए हैं।
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इस साल कोचिंग की राजधानी कोटा को कुछ नई चुनौतियां मिली हैं। कभी औद्योगिक नगरी की पहचान रखने वाले इस शहर ने वक्त के साथ कई करवटें बदली हैं। जब कई बड़े और छोटे उद्योग बंद होने लगे तो पिछले तीन दशक से कोचिंग संस्थानों ने छोटे से शहर की इकॉनमी को नई ऊंचाइयां दी। गत तीन वर्षों में यहां बाहर से आने वाले कोचिंग विद्यार्थियों की संख्या धीरे-धीरे कम होने लगी तो कुछ बड़े कोचिंग संस्थानों का संचालन भी प्रभावित हुआ। इसका सीधा असर मुख्य बाजारों की रौनक पर दिखाई देने लगा है।
पर्यटन का नया अध्याय
लेकिन कोटा अपनी जिद पर फिर से खड़ा होना जानता है। यहां के नागरिकों ने बच्चों की नियमित काउंसलिंग को आगे रखते हुए विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों के विश्वास को हमेशा बनाए रखा। दूसरे फलक पर देखें तो कोटा ने विकास की राह पर चलते हुए पर्यटन का नया अध्याय प्रारंभ किया है।
दिल्ली-मुंबई ब्रॉडगेज रेलवे लाइन पर कोटा जंक्शन अपनी विशेष पहचान रखता है। नए वर्ष में कोटा जंक्शन और न्यू कोटा रेलवे स्टेशन का नया स्वरूप आकार ले लेगा। बूंदी रोड पर शंभूपुरा में प्रस्तावित ग्रीन फील्ड एयरपोर्ट का निर्माण कार्य प्रारंभ होने को है। एग्रो उद्योगों के साथ ही ट्रिपल आईटी कोटा, पांच प्रमुख यूनिवर्सिटी, निजी एवं सरकारी मेडिकल व इंजीनियरिंग कॉलेज, बड़े कोचिंग संस्थान कोटा को छोटी काशी का ताज पहनाते हैं। कोटा साड़ी, कोटा स्टोन, कोटा कचौरी, कोटा कोचिंग, कोटा बैराज से इस शहर को वैश्विक पहचान मिली है।
सैलानियों को हेरिटेज व प्राकृतिक सौंदर्य से लगाव
कोटा-बूंदी की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत है। यहां प्राचीन महलों, छतरियों और मंदिरों की अनूठी स्थापत्य कला, मूर्तिकला व चित्र शैली के साथ गढ़ पैलेस, म्यूजियम, किले, वन्यजीव एवं हस्तशिल्प आदि अलग पहचान रखते हैं। शहर में नदी के दोनों छोर पर विकसित विश्व स्तरीय चंबल रिवर फ्रंट, हरियाली से आच्छादित ऑक्सीजन सिटी पार्क, सेवन वंडर्स, जग मंदिर, चंबल गार्डन, यातायात पार्क, किला, म्यूजियम, चंद्रशेखर मठ, मथुराधीश मंदिर, खड़े गणेशजी मंदिर, आगरा गुरु द्वारा, हैंगिंग ब्रिज, अभेड़ा महल, बायोलॉजिकल पार्क, किशोर सागर, उदयपुरिया का बर्ड वॉचिंग सेंटर, कोटा बैराज आदि दर्शनीय स्थलों ने देश-विदेश के सैलानियों को आकर्षित किया है।
हाल में जर्मनी के 14 सैलानियों के एक दल ने कोटा के दर्शनीय स्थलों को बहुत सराहा। वे चंबल रिवर फ्रंट पर विभिन्न घाटों, भव्य स्मारक, म्यूजिकल फाउंटेन के साथ प्रतिदिन चंबल माता की आरती का मनोहारी दृश्य देख बहुत प्रभावित हुए।
मुकुंदरा रिजर्व में बढ़ी वन्यजीवों की हलचल
कोटा-झालावाड़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व बाघ एवं पैंथर देखने के लिए रणथंभौर सेंचुरी के बाद दूसरा बड़ा आकर्षण बन गया है। यह सात नर-मादा बाघ के अलावा जंगल में विचरण करते भेड़िया, सियार, जंगली बिल्ली, लकड़बग्घा, रीछ, चीतल, नीलगाय, सहेली, मोर, बंदर, सांभर आदि वन्यजीवों के लिए अनुकूल शरणस्थली है।






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