’अच्छा चलता हूं, दुआओं में याद रखना…’
मुर्शिदाबाद की गलियों से निकलकर करोड़ों दिलों की धड़कन बनने वाले अरिजीत सिंह का पार्श्व गायन छोड़ना सिर्फ एक कलाकार का विदा लेना नहीं है; यह उस सुरीले दौर का अवसान है जहां को शब्दों से ज्यादा सुरों...

सुरों के सरताज का चौंकाने वाला फैसला: संगीत जगत में गहराया सन्नाटा
सुधांशु टाक,
समीक्षक, लेखक
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भारतीय संगीत जगत में पिछले एक दशक से अगर कोई एक नाम धड़कन बनकर गूंज रहा है, तो वह है अरिजीत सिंह। अपनी मखमली आवाज से करोड़ों दिलों को सुकून देने वाले इस फनकार के प्लेबैक संगीत से संन्यास लेने की खबरों ने प्रशंसकों को स्तब्ध कर दिया है। इसे केवल एक गायक का जाना नहीं, बल्कि हिंदी सिनेमा के एक ‘सुरीले युग’ का विराम माना जा रहा है।
अरिजीत का सफर किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। साल 2005 में एक रियलिटी शो ‘फेम गुरुकुल’ से छठे स्थान पर बाहर होने के बाद, किसी ने नहीं सोचा था कि यह लड़का एक दिन भारतीय संगीत का चेहरा बनेगा। लेकिन अरिजीत टूटे नहीं, उन्होंने सालों तक म्यूजिक प्रोग्रामर और असिस्टेंट के तौर पर पर्दे के पीछे काम किया। ‘आशिकी-2’ की सफलता से पहले का वह गुमनाम संघर्ष ही था, जिसने उनकी आवाज में वह ठहराव और दर्द पैदा जाता, जिसे आज दुनिया ‘रूहानियत’ कहती है।
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संगीत की विरासत जियागंज से मुंबई तक
अरिजीत की संगीत यात्रा पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के एक छोटे से शहर जियागंज से शुरू हुई। 25 अप्रैल 1987 को जन्मे अरिजीत को विरासत में ही संगीत का माहौल मिला। उनकी मां गायिका थीं और मामा तबला वादक, इसलिए संगीत उनके रक्त में था। उन्होंने राजेंद्र प्रसाद हजारी जैसे दिग्गजों से शास्त्रीय संगीत सीखा। हारमोनियम और तबले पर उनकी पकड़ ने उन्हें अन्य गायकों से अलग एक ‘कम्प्लीट म्यूजिशियन’ बनाया।
उपलब्धियों का शिखर
अरिजीत ने न केवल लोकप्रियता हासिल की, बल्कि आलोचकों का भी दिल जीता। उनके खाते में राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जैसा प्रतिष्ठित सम्मान है, जो उन्हें फिल्म ‘पद्मावत’ के गाने “बिन्ते दिल” के लिए मिला। इसके अलावा, लगातार पांच वर्षों तक फिल्मफेयर अवार्ड जीतना उनकी निरंतरता का प्रमाण है। वर्तमान दौर में जब संगीत शोर-शराबे और ऑटो-ट्यून के बीच अपनी पहचान खो रहा था, तब अरिजीत सुरों की शुद्धता के ध्वजवाहक बने रहे।
संन्यास के पीछे का दर्शन
अरिजीत हमेशा से चकाचौंध से दूर रहने वाले इंसान रहे हैं। अक्सर बड़े कलाकार खुद को व्यावसायिक बंधनों से मुक्त करने के लिए ऐसे फैसले लेते हैं। शायद वे अब फिल्म निर्माण की बंदिशों से बाहर निकलकर संगीत की किसी नई और गहरी साधना में उतरना चाहते हैं। हालांकि, उनके गाए हुए गीत आने वाली पीढ़ियों के एकांत और प्रेम के स्थायी साथी बने रहेंगे।
आगे क्या: निर्देशन की नई पारी!
फैंस के मन में सवाल है कि अरिजीत अब आगे क्या करेंगे? चर्चा है कि उनके स्टेज शो की भारी मांग है, जिसके लिए वे 15 से 20 करोड़ रुपए तक की फीस चार्ज करते हैं। लेकिन ‘राजस्थान टुडे’ को अपने फिल्मी सूत्रों से जो चौंकाने वाली जानकारी मिली है, वह यह है कि अरिजीत सिंह अब निर्देशक बनने जा रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, अरिजीत ‘जंगल एडवेंचर’ पर आधारित एक हिंदी फिल्म का निर्माण अपनी पत्नी कोयल सिंह के साथ मिलकर करने का निर्णय कर चुके हैं। इसे महावीर जैन सह-निर्माता के रूप में प्रोड्यूस करेंगे। चर्चा यह भी है कि शांतिनिकेतन में फिल्म की शूटिंग शुरू हो चुकी है और इसमें मुख्य भूमिका में नवाजुद्दीन सिद्दीकी नजर आ सकते हैं। हालांकि, अभी आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है।
एक नजर में
सफर की शुरुआत: फिल्म ‘मर्डर-2’ का गाना “फिर मोहब्बत”।
ग्लोबल स्टारडम: 2013 में “तुम ही हो” से मिली वैश्विक पहचान।
बड़ी उपलब्धि: फिल्म ‘पद्मावत’ के लिए सर्वश्रेष्ठ पार्श्व गायक का राष्ट्रीय पुरस्कार।
अनोखा रिकॉर्ड: फिल्मफेयर और आईफा जैसे दर्जनों पुरस्कारों से सुशोभित।
प्रारंभिक शिक्षा: उस्ताद राजेंद्र प्रसाद हजारी से शास्त्रीय संगीत का प्रशिक्षण।






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