सात समंदर पार खिलता फागुन
विदेशों में बसे भारतीयों के लिए होली केवल उत्सव नहीं, बल्कि अपनी पहचान और जड़ों से जुड़ाव का अवसर है। वतन से दूरी के बावजूद सामूहिक उत्सव अपनत्व को जीवित रखता है। समुदाय के साथ मनाई गई होली...

वतन से दूर भी फीका नहीं पड़ता संस्कृति का रंग
मधुलिका सिंह,
लेखक व पत्रकार
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भारत में होली केवल एक त्योहार नहीं, एक धड़कन है। फागुन की हवा में घुला गुलाल, गलियों में गूंजती हंसी- ठिठोली, ढोल की थाप पर थिरकते कदम, बच्चों से बुज़ुर्ग तक हर चेहरा रंगों में भीगा दिखाई देता है। इस दिन मान-मनुहार पिघल जाती है, दूरी मिट जाती है और रिश्ते फिर से खिल उठते हैं। लेकिन जो लोग सरहदों के पार, अपने वतन से दूर हैं, उनके लिए होली यादों की दस्तक लेकर आती है। आंगन की रौनक, मां के हाथों की गुझिया की मिठास, दोस्तों की शरारतें- सबकुछ जैसे आंखों के सामने तैर जाता है। फिर भी अपने देश और अपनों से दूरी के बावजूद त्योहार की गर्माहट कम नहीं होती। विदेशों में बसे भारतीय छोटे-छोटे समूहों में इकट्ठा होकर उसी अपनत्व, उसी उल्लास और उसी रंगत के साथ होली खेलते हैं, ताकि मिट्टी की खुशबू जिंदा रहे।
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महज त्योहार नहीं है होली
दुनिया के हर कोने में भारतीय समुदाय मौजूद है। काम, शिक्षा और बेहतर अवसरों की तलाश में गए ये लोग अपने साथ केवल सामान नहीं, अपनी संस्कृति भी लेकर गए। विदेशों में होली का स्वरूप भले थोड़ा बदला हो, लेकिन उसका मूल भाव वही है- मिलना, हंसना, रंगना और रंग जाना। वहां गली- मोहल्लों की जगह सोसायटी पार्क या कम्युनिटी हॉल होते हैं। पानी की होली सीमित होती है, लेकिन गुलाल का रंग उतना ही गाढ़ा होता है। सभी प्रवासी भारतीय अपनों और विदेशी दोस्तों के साथ होली के रंगों में सराबोर होते हैं। यह सिर्फ एक आयोजन नहीं, बल्कि पहचान का उत्सव बन जाता है।
देश बदला है संस्कृति और पहचान नहीं
यूरोप के छोटे से देश माल्टा में बसे भारतीयों के लिए होली अब एक बड़ा सामूहिक आयोजन बन चुकी है। यहां रहने वाले रजिस्टर्ड नर्स रोहित सिंह तंवर बताते हैं, ‘मुझे होली खेलना बहुत पसंद है और खासतौर पर तब जब मैं भारत में अपने घर पर होता हूं। यार-दोस्तों के साथ बाहर होली खेलने जाना, जमकर रंग लगाना और डीजे की धुन पर थिरकना, ये कभी नहीं भूल सकता। माल्टा में भी रंगों का त्यौहार धूमधाम से मनाया जाता है। जहां हम प्रवासी भारतीय जमकर होली का आनंद लेते हैं। इस मौके पर कभी ऐसा लगा ही नहीं कि मैं भारत से बाहर हूं। यहां सभी एकजुट होकर रंगों के त्यौहार का जमकर लुत्फ उठाते हैं और माहौल को खास बना देते हैं।’
माल्टा में ही रहने वाले मनजीत सिंह बताते हैं, ‘यहां होली पर माहौल ऐसा हो जाता है कि हमें लगता ही नहीं कि हम भारत से बाहर हैं। यहां प्रवासी भारतीय एक साथ मिलकर होली का त्यौहार पूरे जोश एवं उमंग के साथ मनाते हैं। डीजे की धुन पर थिरकते हैं और एक साथ मिलकर पूरा एन्जॉय करते हैं। सभी भारतीय परिवार इस आयोजन में सम्मिलित होकर एक साथ खुशनुमा माहौल में रंगों का पर्व मनाते हैं। यह हमारे लिए बहुत ही गर्व की बात है कि हमारा पर्व विदेश में भी सिरमौर बना हुआ है।’
होली का अलग ही क्रेज
यूरोप के माल्टा में रहने वाले अरूण गौड़ बताते हैं- ‘दीपावली के बाद मुझे सबसे ज्यादा क्रेज होली का रहता है। भारत की होली की बात अलग है लेकिन यहां भी होली जरूर खेलते हैं। होली की तैयारियां हम पहले से ही करने लग जाते हैं। यहां पर एक साथ होली खेली जाती है, सभी एक- दूसरे के साथ पूरे सौहार्द्रपूर्ण वातावरण में होली खेलते हैं और होने वाले सभी आयोजनों में भागीदारी निभाते हैं। छोटे बच्चे भी पीछे नहीं रहते। यहां की होली मेरे लिए विशेष रहती है। झूमते-नाचते-गाते होली का त्यौहार यहां का विशेष आकर्षण है।’
इसी तरह ललित कुमार नागदा कहते हैं, ‘होली पर घर की याद तो आती है लेकिन यहां होने वाले खास आयोजन से हमारी कमी दूर हो जाती है। हमारे साथ यहां के लोग भी रंग में रंग जाते हैं और ये लोग भी जमकर होली खेलते हैं। वाकई में यहां की होली खास ही रहती है। सभी दोस्त एवं परिवारजन एक साथ होली खेलने का आनंद उठाते हैं।’
सिंगापुर में होली की धमाल
सिंगापुर में कस्टमर सक्सेस मैनेजर दिव्या सिंघल कहती हैं, ‘जब भी होली आती है तो हमें घर की याद जरूर आती है। वो म्यूजिक की मस्ती पर झूमना और एक-दूसरे को रंग लगाकर पानी की होली खेलना आज भी जेहन में बसा हुआ है। फिलहाल यहां चार साल से सिंगापुर में रहने के बाद जब भी होली आती है तो यहां की सोसायटी द्वारा होली का पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। कई भारतीय परिवार एक साथ इकट्ठा होते हैं और एक-दूसरे को रंग लगाकर होली की बधाई देते हैं। बच्चे भी इस माहौल में पीछे नहीं रहते। हमारे साथ स्थानीय लोग भी होली का आनंद लेते हैं। सामूहिक रूप से होली का पर्व मनाने से यह हमारे लिए बहुत ही रोचक और विशेष पर्व बना हुआ है।’
अमूर्त सांस्कृतिक विरासत में शामिल कराने के प्रयास
दीपावली के बाद अब रंगों के पर्व होली को भी यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत (आईसीएच) सूची में शामिल कराने की दिशा में प्रयास तेज हुए हैं। यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल होना किसी भी परंपरा के लिए वैश्विक मान्यता का प्रतीक माना जाता है। संस्कृति मंत्रालय द्वारा इसके लिए जरूरी दस्तावेज तैयार किए जा रहे हैं। इनमें होली के अवसर पर देश के विभिन्न हिस्सों में गाए जाने वाले फाग लोकगीत, पारंपरिक रीति-रिवाज और सामुदायिक सहभागिता को भी शामिल करने की योजना है। यदि यह प्रस्ताव स्वीकृत होता है, तो होली को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सांस्कृतिक धरोहर के रूप में नई पहचान मिलेगी।





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