खुलकर सामने आ गई आंतरिक कलह
रेगिस्तानी जिला बाड़मेर अपनी सीमावर्ती शान और देशभक्ति की कहानियों के लिए ख्यात है। 26 मई को यहां आयोजित कांग्रेस की जयहिंद सभा भारतीय सेना के शौर्य और बलिदान को सम्मान देने के लिए कांग्रेस की...

राजनीति : बाड़मेर में कांग्रेस की जयहिंद सभा
दुर्गसिंह राजपुरोहित,
वरिष्ठ पत्रकार
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रेगिस्तानी जिला बाड़मेर अपनी सीमावर्ती शान और देशभक्ति की कहानियों के लिए ख्यात है। 26 मई को यहां आयोजित कांग्रेस की जयहिंद सभा भारतीय सेना के शौर्य और बलिदान को सम्मान देने के लिए कांग्रेस की राष्ट्रीय पहल का हिस्सा थी, लेकिन स्थानीय नेताओं की गुटबाजी, पुरानी रंजिशों और सियासी तकरार के कारण सियासी रंगमंच में तब्दील हो गई। अमीन खान, मेवाराम जैन और हरीश चौधरी के बीच का तीखा टकराव इस आयोजन का मुख्य आकर्षण रहा, जिसमें निष्कासन, नारेबाजी, और सियासी तंज ने माहौल को गरमा दिया। बाड़मेर की सियासत में यह घटना एक नए अध्याय की शुरुआत बन गई, जिसने कांग्रेस की आंतरिक कलह को नंगा कर दिया।
वीरेंद्र धाम में यह जयहिंद सभा ऑपरेशन सिंदूर की सफलता का जश्न मनाने, सेना के प्रति सम्मान व्यक्त करने और केंद्र सरकार से पहलगाम में आतंकी हमले तथा अचानक सीजफायर को लेकर जवाब मांगने के उद्देश्य से आयोजित की गई थी। सभा में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, प्रदेश अध्यक्ष गोविंदसिंह डोटासरा, सचिन पायलट, राज्य कांग्रेस प्रभारी सुखजिंदरसिंह रंधावा, और बायतु विधायक हरीश चौधरी आदि कांग्रेस के दिग्गज नेता मौजूद थे। गहलोत ने मंच से केंद्र की भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर सीजफायर की बात चल रही थी, तो देश को इसकी जानकारी दी जानी चाहिए थी। उन्होंने अमेरिका की मध्यस्थता पर तंज कसते हुए पूछा, “पंचायती करने वाला अमेरिका कौन होता है?” यह बयान भाजपा की तिरंगा यात्रा के जवाब में था, जिसे कांग्रेस ने “सियासी ड्रामा” करार दिया।
सभा का असली ‘तड़का’
सभा का असली तड़का तब लगा, जब निष्कासित नेताओं अमीन खान और मेवाराम जैन के समर्थकों ने हरीश चौधरी पर गंभीर आरोप लगाए। समर्थकों का दावा था कि हरीश ने जानबूझकर गहलोत, पायलट और डोटासरा के काफिले को जसदेर तालाब के रास्ते वीरेंद्र धाम भेजा, ताकि अमीन और मेवाराम के समर्थकों को नेताओं का स्वागत करने का मौका न मिले। यह आरोप इतना गंभीर था कि सभा स्थल पर “हरीश चौधरी मुर्दाबाद” और “गद्दार वापस जाओ” जैसे नारे गूंजने लगे। नाराज समर्थकों ने हरीश को “षड्यंत्रकारी” तक करार दिया, जिससे आयोजन का माहौल तनावपूर्ण हो गया। यह घटना बाड़मेर की कांग्रेस इकाई में गहरी गुटबाजी को उजागर करती है, जहां हरीश चौधरी का खेमा और अमीन-मेवाराम के समर्थक आमने-सामने हैं।
अमीन खान और मेवाराम जैन का निष्कासन इस सियासी ड्रामे का केंद्रीय हिस्सा है। शिव विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के कद्दावर नेता रहे अमीन खान को 2024 के लोकसभा चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार रविंद्रसिंह भाटी को समर्थन देने के लिए पार्टी से छह साल के लिए निलंबित किया गया था। दूसरी ओर, मेवाराम जैन का निष्कासन एक कथित अश्लील वीडियो कांड के बाद हुआ, जिसने उनकी सियासी और सामाजिक साख को गहरी चोट पहुंचाई। इस कांड ने हरीश चौधरी को उन पर हमला बोलने का मौका भी दिया। सभा में हरीश ने बिना नाम लिए तंज कसते हुए कहा कि “चरित्रहीन और दुराचारी” लोगों के लिए कांग्रेस में जगह नहीं है। इस बयान ने मेवाराम के समर्थकों को भड़का दिया, जिन्होंने हरीश पर “सियासी सफाई” के नाम पर व्यक्तिगत हमले करने का आरोप लगाया।
गहलोत ने सभा में अमीन खान का जिक्र करते हुए उनकी वापसी की संभावना जताई, लेकिन मेवाराम पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि पार्टी को “चरित्र और सिद्धांत” वाले नेताओं की जरूरत है। अमीन खान ने हरीश पर पलटवार करते हुए दावा किया कि उनकी “गलत रणनीति” और “अहंकार” के कारण कांग्रेस को बाड़मेर, जैसलमेर और जोधपुर में हार का सामना करना पड़ा। मेवाराम ने भी चुप्पी तोड़ते हुए कहा कि वे जल्द “सच्चाई सामने लाएंगे।” उन्होंने अपने निष्कासन को “सियासी साजिश” करार दिया।
सभा के बाद अमीन और मेवाराम ने पार्टी आलाकमान से मुलाकात की, लेकिन कांग्रेस ने साफ कर दिया कि उनकी वापसी के लिए स्थानीय स्तर पर सहमति जरूरी है। यह सहमति हरीश चौधरी के प्रभाव वाले बाड़मेर में आसान नहीं है, क्योंकि हरीश और उनके विरोधी खेमे के बीच सत्ता की जंग चरम पर है। इस तरह वीरेंद्र धाम की यह सभा, जो सेना के सम्मान का मंच बनना थी, हरीश, अमीन और मेवाराम की आपसी रंजिश का अखाड़ा बन गई। बाड़मेर की सियासत में यह नया अध्याय आने वाले दिनों में और रंग दिखाएगा, क्योंकि कांग्रेस की एकता पर सवाल गहराते जा रहे हैं।
मोदी सरकार और राजस्थान सरकार पर सवालों की बौछार
सीमावर्ती जिले बाड़मेर में 26 मई को आयोजित कांग्रेस की “जयहिंद सभा” ने न केवल भारतीय सेना के शौर्य और पराक्रम को सम्मान देने का मंच प्रदान किया, बल्कि केंद्र की मोदी सरकार और राजस्थान की भजनलाल शर्मा सरकार पर तीखे सवाल उठाने का अवसर भी बन गया। लंबे समय बाद बाड़मेर में हुए कांग्रेस के इस बड़े आयोजन में पार्टी के दिग्गज नेताओं का जमावड़ा देखने को मिला। इस आयोजन में ऑपरेशन सिंदूर, अमेरिकी हस्तक्षेप, और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे राष्ट्रीय मुद्दों व राज्य सरकार की नीतियों आदि पर भी चर्चा हुई। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के निर्देश पर 20 से 30 मई के बीच देश के 15 शहरों में जयहिंद सभाओं के आयोजन के तहत बाड़मेर को विशेष रूप से शामिल किया गया। सभा में उपस्थित भीड़ हालांकि आयोजकों के अनुसार सीमित थी, फिर भी पूर्व सैनिकों और स्वतंत्रता सेनानियों के परिजनों की भागीदारी ने इस सभा को प्रभावी बना दिया।
ऑपरेशन सिंदूर और अमेरिकी हस्तक्षेप पर सवाल
जयहिंद सभा का एक प्रमुख उद्देश्य ऑपरेशन सिंदूर के बाद की परिस्थितियों पर केंद्र सरकार से जवाब मांगना था। ऑपरेशन सिंदूर भारतीय सेना द्वारा पाकिस्तान और उसके कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाने के लिए चलाया गया एक सफल सैन्य अभियान था। इस अभियान ने 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले का जवाब दिया, जिसमें 26 लोग मारे गए थे, जिनमें ज्यादातर पर्यटक थे।
कांग्रेस नेताओं ने सभा में इस बात पर जोर दिया कि ऑपरेशन सिंदूर भारतीय सेना की वीरता और शौर्य का प्रतीक है, न कि किसी एक पार्टी या व्यक्ति की उपलब्धि। राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा, “मोदीजी को आदत हो गई है कि जब भी चुनाव आता है, वे सेना की वीरता के पीछे छुप जाते हैं। कभी बालाकोट, कभी ऑपरेशन सिंदूर को अपनी उपलब्धि बताकर वोट मांगते हैं, जबकि यह काम सेना ने किया है, सरकार ने नहीं।” कांग्रेस नेताओं ने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान का हवाला दिया, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि उनके प्रशासन ने भारत-पाकिस्तान के बीच सीजफायर में मध्यस्थता की थी। सचिन पायलट ने कहा, “जब अमेरिकी राष्ट्रपति ने खुद युद्धविराम की घोषणा की, तो सरकार को सामने आकर बताना चाहिए कि यह सीजफायर किन शर्तों पर हुआ।” अशोक गहलोत ने 1971 के युद्ध का जिक्र करते हुए कहा, “इंदिरा गांधी की सरकार ने पाकिस्तान के दो टुकड़े किए थे, और उस समय किसी तीसरे देश को हस्तक्षेप का मौका नहीं दिया गया। आज सरकार को चाहिए कि वह देश को स्पष्ट जवाब दे।”
राजस्थान सरकार पर निशाना
सभा में केंद्र सरकार के साथ-साथ राजस्थान की भजनलाल शर्मा सरकार भी कांग्रेस के निशाने पर रही। नेताओं ने राज्य सरकार पर बिजली, पानी और मूलभूत सुविधाओं के प्रबंधन में विफलता का आरोप लगाया। सचिन पायलट ने कहा कि उन्हें पता था कि कांग्रेस के नेता आ रहे हैं, इसलिए बिजली गुल कर दी गई। यह दुर्भावनापूर्ण रवैया है। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भी राज्य सरकार पर ढिलाई का आरोप लगाया। नेताओं ने स्थानीय मुद्दों पर भी ध्यान केंद्रित किया। बाड़मेर में पानी की कमी, बिजली की अनियमित आपूर्ति, और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर कांग्रेस ने सरकार को घेरने की कोशिश की। हरीश चौधरी ने कहा कि बाड़मेर की धरती ने हमेशा देश की रक्षा की है, लेकिन आज यहां के लोग मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं।
सेना का सम्मान और नेताजी का नारा
जयहिंद सभा में कई पूर्व सैनिकों और स्वतंत्रता सेनानियों के परिजनों को आमंत्रित किया गया था, जिन्हें मंच पर सम्मानित किया गया। गोविंदसिंह डोटासरा ने कहा कि जयहिंद का नारा नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने दिया था। इसका मतलब है- भारत की जय, भारतीयों की जय, सेना की जय। आज हम उसी भावना से सेना को सलाम कर रहे हैं। कांग्रेस ने यह स्पष्ट करने की कोशिश की कि उनकी यह सभा किसी राजनीतिक मकसद से नहीं, बल्कि सेना के सम्मान और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने के लिए आयोजित की गई है।
भाजपा ने इसे “खीज सभा” करार दिया
जयहिंद सभा को लेकर स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक चर्चा हुई। भाजपा ने इसे “खीज सभा” करार दिया और कांग्रेस के आरोपों को खारिज किया। राजस्थान भाजपा अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा कि कांग्रेस राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर गलत जानकारी फैलाकर जनता में भ्रम पैदा कर रही है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद पूरे देश में गर्व का माहौल है, लेकिन कांग्रेस बेवजह सवाल उठा रही है।






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