बाड़मेर बालोतरा जैसलमेर में बीजेपी का स्पष्ट संदेश: पार्टी बड़ी, व्यक्ति गौण
विपक्षी और विरोधी चीखते चिल्लाते रहे कि पर्ची से सरकार बनी , पर्ची से संगठन बना। लेकिन , बीजेपी के इन आवाज़ों को दरकिनार कर दिया। बीजेपी ने संसदीय क्षेत्र बाड़मेर जैसलमेर और बालोतरा में ऐतिहासिक...

राजस्थान टुडे ब्यूरो
विपक्षी और विरोधी चीखते चिल्लाते रहे कि पर्ची से सरकार बनी , पर्ची से संगठन बना। लेकिन , बीजेपी के इन आवाज़ों को दरकिनार कर दिया।
बीजेपी ने संसदीय क्षेत्र बाड़मेर जैसलमेर और बालोतरा में ऐतिहासिक संगठनात्मक निर्णय लेकर सभी को पार्टी के निर्णय पर सहमत कर दिया।
यह वो निर्णय था जिसने बड़ी बड़ी जातियों को जिनका वोट बैंक अकूत हो उनको ही प्रतिनिधित्व देने की बात की ध्वस्त कर दिया।
तीन जिलों से बनने वाली लोकसभा बाड़मेर जैसलमेर बालोतरा जिसमें प्रमुख वोट बैंक जाट, मुसलमान एसटी-एससी वर्ग हैं।
यहां इस बार भी मुसलमानों को छोड़कर दो जातियों पर ज्यादा महत्व देने के कयास लगाए जा रहे थे।
जाट और मेघवाल जाति।
साथ में कुछ नाम रावणा राजपूत और राजपूत समाज से थे।
बाड़मेर की जिलाध्यक्ष सीट बीते विधानसभा चुनावों के बाद से कार्यवाहक और निष्क्रिय माने जाने वाले नेता के भरोसे थी।
दिल्ली और जयपुर में सरकार होने के बावजूद कार्यकर्ता हताश निराश थे। ऊपर से कार्यवाहक जिलाध्यक्ष का दायरा ऐसा जिसमें जिलाध्यक्ष और उनके कुछ लोगों के अलावा कोई कार्यकर्ता फिट नहीं बैठता। पार्टी ने इसे बेहद गंभीरता से लिया और अग्रवाल पंचायत में मदन दिलावर ने कार्यवाहक जिलाध्यक्ष को 1990 की मित्रता का उपहार विदाई के रूप में दे दिया। दिलीप पालीवाल विदाई का साफा सजाए हुए साफ़गोई से मानो कह रहे हो कि अपना काम अब 2014 के बाद इतना ही था।
बाड़मेर में संघ के चेहरे के रूप में जाने पहचाने अनंत बिश्नोई को बीजेपी का नया जिलाध्यक्ष बनाया गया हैं।
जिला अध्यक्ष बनाए जाने से पहले ही अनंत बिश्नोई के नाम की चर्चा बाड़मेर ही नहीं बल्कि राज्य भर में चल रही थी कि संभवत: बाड़मेर के नए जिला अध्यक्ष के रूप में उन्हें यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंप दी जाए।
हुआ भी कुछ ऐसा ही।
पार्टी की तरफ से कैबिनेट मंत्री मदन दिलावर जिला अध्यक्ष के नाम की घोषणा करने के लिए बाड़मेर पहुंचे और उन्होंने बाड़मेर के सर्किट हाउस में पहले कुछ नेताओं के साथ औपचारिक कही जा रही बैठक में हिस्सा लिया और उसके बाद वह अग्रवाल पंचायत भवन पहुंचे।
कुछ देर के बाद कुर्ते की जेब से नाम निकला और इसकी घोषणा कर दी गई
वहां काफी चेहरे उदास और फ़क्क पड़े नजर आए। जो बीते कई महीनों से जिला अध्यक्ष बनाए जाने के आश्वासन के कारण खिले हुए थे। एकाएक कईयों का चेहरे का ग्लो सफेद पड़ता दिखा।
असल में बाड़मेर की राजनीति जातियों के आधार पर बीते कई वर्षों से राजनीति के परिणाम दे रही है।
ऐसे में कयास इस बात को लेकर लगाए जा रहे थे कि कोई ऐसा बड़ा वोट बैंक जो चुनाव में एकमुश्त पार्टी से जुड़कर फायदा पहुंचाए ऐसे ही निर्णय होंगे।
लेकिन हुआ थोड़ा अलग और उलट। 40 वर्ष के युवा को पार्टी की अनंत उम्मीदों का जिला सारथी बनाया हैं। यह बड़ी परीक्षा भी हैं।
बालोतरा में भी बहुत बड़ा फैसला ,
बड़े नाम एक तरफ भाजपा को रास आया भरत मोदी का नाम
ऐसा नहीं हैं कि आश्चर्य मिश्रित आवाजें बाड़मेर से ही आई हो।
संसदीय क्षेत्र के बालोतरा जिले से भी भरत मोदी का नाम जिलाध्यक्ष के लिए घोषित हुआ तब भी लोग आश्चर्य चकित थे।
भरत मोदी के बारे में कहा जाता हैं कि संगठन की खिंची लकीर के दायरे में रहकर वो काम करने वाले नेता हैं।
यहां निवर्तमान जिलाध्यक्ष बाबू सिंह राजपुरोहित के स्थान पर इन्हें पद पर बिठाया गया हैं।
मोदी के अलावा यहां कई नाम थे जो जिलाध्यक्ष की दौड़ में दौड़े जा रहे थे बिना किसी उम्मीद के। जबकि , शुरुआत से ऐसा लग रहा था कि बालोतरा में पार्टी का फैसला बहुत गंभीरता से होगा। हुआ भी ऐसा ही।
वैसे तो भरत मोदी की पहचान एक कपड़ा व्यवसायी की रही हैं। जिनका संगठनात्मक अनुभव , संघ एवं विभिन्न सामाजिक संगठनों में सक्रियता ने उन्हें अलग पहचान दी।
भरत मोदी एक समर्पित सामाजिक कार्यकर्ता और संगठन के प्रति निष्ठावान व्यक्तित्व माने जाते हैं । इन्होंने वर्ष 1990 से 2003 तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) में स्वयंसेवक के रूप में कार्य किया और विभिन्न दायित्वों का निर्वहन किया। इसके बाद, 2003 में वे सीमा जनकल्याण समिति के जिला संयोजक बने।
भरत मोदी स्वदेशी जागरण मंच में जिला सहसंयोजक के रूप में कार्यरत रहे, साथ ही वे लघु उद्योग भारती की कार्यकारिणी में भी शामिल रहे। शिक्षा के क्षेत्र में भी उनकी सक्रियता रही, वे विद्या भारती के व्यवस्थापक पद पर कार्यरत रहे।
राजनीतिक और संगठनात्मक अनुभव की बात करें तो भरत मोदी ने 2015 में नगर महामंत्री का पद संभाला। इसके बाद 2019 से 2021 तक वे जिला मंत्री रहे और 2021 से 2023 तक जिला महामंत्री के पद पर कार्य किया। संगठन में उनकी कर्मठता और समर्पण को देखते हुए उन्हें आहोर विधानसभा प्रभारी बनाया गया।
उनकी निष्ठा और संगठन के प्रति समर्पण को देखते हुए प्रदेश नेतृत्व ने उन पर भरोसा जताते हुए बालोतरा जिले का जिला अध्यक्ष घोषित किया। इस पद के लिए 5-6 अन्य दावेदार भी थे,जिसमें गोविंद सिंह राजपुरोहित कालूडी,अमराराम सुन्देशा, खेताराम प्रजापत, डुंगरराम देवासी सहित लोगो के नाम थे। लेकिन उनके संगठनात्मक कौशल और ईमानदारी के कारण प्रदेश नेतृत्व ने उन्हें इस महत्वपूर्ण दायित्व के लिए चुना।
भरत मोदी ने अपने पूरे कार्यकाल में संगठन के प्रति पूर्ण निष्ठा, ईमानदारी और एकाग्रचित्त होकर कार्य किया, जिसका परिणाम यह रहा कि उन्हें जिले के शीर्ष पद पर आसीन किया गया।
इधर जैसलमेर में भी लॉबिंग करने वाले दरकिनार
बाड़मेर बालोतरा जैसलमेर 3 जिलों से बनी लोकसभा हैं। यहां राजनीतिक उठापटक भी देश की सुर्खियां बनती हैं।
सीमावर्ती जैसलमेर जिले में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी को नया अध्यक्ष पार्टी ने दे दिया है। पोकरण विधानसभा क्षेत्र के राजमथाई क्षेत्र निवासी दलपतराम मेघवाल को प्रदेश नेतृत्व के निर्देशानुसार यह जिम्मेदारी सौंपी गई है।
बीते मंगलवार को भाजपा के ट्रांसपोर्ट चौराहा स्थित कार्यालय में अध्यक्ष के निर्वाचन के लिए आयोजित हुई विशेष बैठक में प्रदेश सरकार में कानून मंत्री जोगाराम पटेल ने प्रदेश नेतृत्व से आए नाम को मोबाइल में दिखाया और चुनाव अधिकारी बिहारीलाल विश्नोई ने दलपतराम के नाम की घोषणा कर दी। इस पर वहां मौजूद कार्यकर्ताओं ने तालियां बजा कर इस निर्णय का स्वागत किया। जैसलमेर में चुने गए अध्यक्ष सामान्य परिवार से संबंध रखते हैं।






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