भाजपा: किसके सिर सजेगा राष्ट्रीय अध्यक्ष का ताज़ ?
वर्तमान में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद पर केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा स्थापित है। पार्टी के ‘एक व्यक्ति-एक पद’ के पार्टी संविधान पर जाए तो अब देशभर में हरेक के मन में ये सवाल उठ रहा है कि अब...

मोदी सरकार 3.0 में राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को ‘गुजरात’ से राज्यसभा स्वास्थ्य मंत्रालय संभालने का काम दिया गया। वर्तमान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह (पार्टी में नंबर 1 एवं नंबर 2 की पदवी प्राप्त), दोनों ही गुजरात से हैं। अब ऐसे में तय सा है कि दिल्ली विधानसभा चुनाव के परिणाम बाद 2025 के फरवरी माह में बीजेपी में नया राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव होगा। भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष कौन होगा, इस सवाल को लेकर कयासबाजी तेज है। इसे लेकर कई नाम सामने आ रहे हैं लेकिन ये तय तब होगा जब पार्टी के पार्लियामेंट्री बोर्ड की बैठक होगी।
नामों पर मंथन से पहले बीजेपी में अध्यक्ष पद की योग्यता और चुनाव पर प्रकाश ड़ालते हैं।
अध्यक्ष बनने की क्या है योग्यता
बीजेपी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के लिए सबसे जरूरी है कि इसके लिए होने वाले चुनाव के लिए नामांकन दर्ज करने वाला व्यक्ति कम से कम 15 साल तक पार्टी का प्राथमिक सदस्य रहा हो। इसके साथ ही प्रदेश या राष्ट्रीय कार्यकारिणी के कम से कम 20 सदस्य अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए किसी व्यक्ति के नाम का प्रस्ताव पेश कर सकते हैं और इस प्रस्ताव पर कम से कम 5 प्रदेशों के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्यों की सहमति होनी चाहिए। सबसे जरूरी बात कि अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए प्रस्ताव पर उम्मीदवार का दस्तखत होना चाहिए।
कैसे होता है भाजपा के अध्यक्ष पद का चुनाव
वर्ष 2023 में 18 फरवरी को दिल्ली में भाजपा के राष्ट्रीय अधिवेशन में राष्ट्रीय अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर एक प्रस्ताव पास हुआ। इसके मुताबिक पद खाली होने पर पार्लियामेंट्री बोर्ड अध्यक्ष की नियुक्ति कर सकेगा। भाजपा के अपने संविधान की धारा-19 में अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए कुछ विशेष नियम बनाए गए हैं। इस नियम के मुताबिक पार्टी के राष्ट्रीय परिषद और प्रदेश परिषदों के सदस्य मिलकर राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव करते हैं। अध्यक्ष पद का चुनाव पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारिणी के बनाए गए नियमों के मुताबिक ही होता है।
पार्टी के संविधान के अनुसार बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का कार्यकाल 3 वर्ष का होता है। वैसे पाठकों को बता दें कि भाजपा अध्यक्ष पार्टी का सर्वाेच्च पद होता है और उस पर पूरी पार्टी की अहम जिम्मेदारी होती है। लेकिन…जाहिर सा है, निर्णय की बानगी में एकाधिकार, पार्टी के नेता प्रधानमंत्री के साथ-साथ पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष (वर्तमान राजनीति के परिदृश्य में ‘चाणक्य’ से सुशोभित) गृह मंत्री अमित शाह का प्रभाव परिलक्षित होता रहा हैं।
चलिए, अब इस पद के मजबूत एवं अप्रत्याशित चेहरों पर प्रकाश ड़ालते हैं…
2024 के लोकसभा चुनाव से पहले पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा का बयान, ‘‘अब बीजेपी बड़ी हो गई हैं, उन्हें आरएसएस की जरूरत नहीं हैं’’ से संघ नाराज हुआ। नाराजगी का परिणाम बीजेपी को मिली सीटों में स्पष्ट दिखा और 240 सीटों से संतुष्ट होना पड़ा। संघ के केरल अधिवेशन में आपसी नाराजगी का निपटारा हुआ और भाजपा ने हरियाणा व महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में अप्रत्याशित जीत के साथ ही उपचुनावों में बेहतर प्रदर्शन किया। ऐसे में पार्टी के नए अध्यक्ष के चुनाव में संघ की इच्छा का पूरा सम्मान दिया जाना तय है। राजनीतिक हलकों में कुछ नामों की चर्चाएं हैं। लेकिन मोदी-शाह की जोड़ी हमेशा चौंकाने वाले निर्णय लेती है। ऐसे में कुछ मजबूत एवं अप्रत्याशित चेहरों की संभावनाओं को खंगालते हैं।
बिप्लब कुमार देब: बिप्लब कुमार देब एक ऐसे पूर्व मुख्यमंत्री है, जिनके पास फिलहाल कोई बड़ी जिम्मेदारी नहीं है। त्रिपुरा के मुख्यमंत्री रहे देब आरएसएस के पूर्व स्वयंसेवक रहे चुके हैं। पार्टी ने 2015 में त्रिपुरा राज्य में महासंपर्क अभियान के प्रदेश संयोजक की जिम्मेदारी देकर भेजा। अपनी सक्रियता से 2016 में ही स्थानीय इकाई का प्रदेश अध्यक्ष बनाया। उनके नेतृत्व में भाजपा ने 15 साल बाद वापसी कर 2018 में सरकार बनाई। जीत के सूत्रधार रहे देब को सीएम पद का इनाम भी मिला। वर्तमान में वे वेस्ट त्रिपुरा से लोकसभा सांसद है। उनकी संगठन क्षमता का इस्तेमाल पार्टी ने गत हरियाणा विधानसभा चुनाव में कर चुकी है। देब वर्तमान दिल्ली विधानसभा चुनाव में भी अहम भूमिका निभा रहे है। युवा के साथ ही, संघ की पृष्ठभूमि और लो-प्रोफाइल रहने की प्रवृत्ति से राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के ‘‘अंडरडॉग’’ उम्मीदवार हो सकते हैं।
डी पुरंदेश्वरी: प्रधानमंत्री मोदी के महिला सशक्तिकरण की दृष्टि से भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद की दूसरा अप्रत्याशित चेहरा डी पुरंदेश्वरी है। आंध्रप्रेदश की पूर्व मुंख्यमंत्री और प्रसिद्ध अभिनेता एनटी रामाराव की बेटी और टीडीपी दल के नेता एवं मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की साली पुरंदेश्वरी 2014 से भारतीय जनता पार्टी में है। पूर्व में भाजपा महिला मोर्चा प्रभारी के रूप में अपनी संगठात्मक कौशल का प्रदर्शन कर चुकी वे वर्तमान में स्थानीय संगठन की प्रदेश अध्यक्ष है। अपनी वाकपटुता, स्पष्टता और भावपूर्ण भाषणों से उन्हें ‘दक्षिण की सुषमा स्वराज’ की उपाधि भी मिली हुई है। लोकसभा में सीटों की संख्या और सहयोगी दलों को साथ में लाने के लिए पुरंदेश्वरी लोकसभा अध्यक्ष पद की प्रबल दावेदार थी। भाजपा संगठन द्वारा दक्षिण में अपनी स्थिति को मजबूत करने के साथ ही राष्ट्रपति, उप राष्ट्रपति पदों पर दक्षिण से कोई काबिज न होने पर वे अब राष्ट्रीय अध्यक्ष की सशक्त उम्मीदवार भी दिखाई दे रही हैं। विदित है कि वैंकेया नायडू के बाद पार्टी ने दक्षिण से कोई भाजता नेता को प्रमुख पदों पर जिम्मेदारी दी नहीं है।
वसुंधरा राजे: राजस्थान में मुख्यमंत्री पद की सशक्त दावेदारी थी। पार्टी की ओर से सबसे अधिक जनसभाएं भी की। लेकिन मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में नए चेहरों को मुख्यमंत्री बनाने की कड़ी में राजस्थान में भजनलाल शर्मा के रूप में एक नए चेहरे को राजस्थान की कमान दी गई। घोषणा के समय मुख्यमंत्री न बनने का दर्द भी आंखों से छलका। बाद में राजे ने कुछ समय तक पार्टी और सार्वजनिक कार्यक्रमों में सीधे तौर पर न सही लेकिन तीखे शब्दों के बाणों से फैसले की अंर्तःमन की पीड़ा को बताया भी। प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात, संघ से नजदीकियां और अब पार्टी के संगठन कार्यक्रमों में उनकी सक्रियता ने राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए अप्रत्याशित उम्मीदवार बना दिया है। उनके पास पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष का पद लंबे समय से है। वहीं मुख्यमंत्री पद का बलिदान दे चुके शिवराज सिंह चौहान और मनोहर लाल खट्टर को पार्टी ने केन्द्रीय मंत्री बनाकर सम्मान दिया है। इस परिदृश्य में भी केवल राजे ही पार्टी की बड़ी नेता है, जिन्हें बलिदान का ‘‘इनाम’’ नहीं मिला है। हां, जरूर पार्टी का असल संचालन कर रहे पुरानों से उनकी पुरानी कड़वी यादें रोडा बन सकती है।
वहीं आम्बेडकर मुद्दे पर घिरी भाजपा इस पद पर किसी दलित चेहरे को भी मौका दे सकती है। लेकिन संगठन में मजबूत आधार रखने के साथ ही संघ के समर्थन वाले दलित नेताओं के विकल्प गिने-चुने हैं। इसमें केन्द्रीय मंत्री अर्जुनलाल मेघवाल, पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री बेबी रानी मौर्य शामिल है। वहीं मीडिया में जिनकी चर्चा आए दिन होती है, उनमें- केन्द्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान, भूपेन्द्र यादव, महासचिव विनोद तावड़े का नाम शामिल है। खैर…आपके हाथों में जब तक पत्रिका पहुंचेगी, तब तक नए राष्ट्रीय अध्यक्ष की ताजपोशी होना संभावित है।






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