रेत के कणों से सितारों तक: जोधपुर की त्रिशला की उड़ान
त्रिशला लूँकड़, डीपीएस आरकेपुरम, दिल्ली (कक्षा 9), को ISRO–NASA के ऐतिहासिक संयुक्त मिशन NISAR की स्टूडेंट टीम में प्रतिनिधित्व हेतु चुना गया...
सूर्यनगरी की गलियों में जब कोई सपना उड़ान भरता है, तो लगता है जैसे रेत के कणों ने पंख उगा लिए हों। त्रिशला लुंकड़ की यह उड़ान भी कुछ ऐसी ही है जैसे थार के सूखे टीले अचानक आकाश से बातें करने लगें।
वरिष्ठ अर्थशास्त्री महेंद्र झाबक की दोहिती और समाजसेविका प्रियंका झाबक व सीए आशीष लुंकड़ की बेटी त्रिशला ने अपनी मेहनत की चोंच से सपनों का घोंसला बनाया, और अब वह इसरो-नासा के ‘निसार’ मिशन की छात्र टीम में शामिल होकर अंतरिक्ष की खिड़की से झांकने वाली है।
यह उपलब्धि वैसी ही है, जैसे किसी रेगिस्तान में अचानक एक नखलिस्तान खिल उठे। त्रिशला का नाम उस सूची में दर्ज हुआ है जो भविष्य के विज्ञान की किताबों में सुनहरी स्याही से लिखी जाएगी। वह श्रीहरिकोटा के प्रक्षेपण स्थल पर खड़ी होगी, जहां रॉकेट की गड़गड़ाहट में उसके सपनों की धड़कनें घुल जाएंगी।
कभी-कभी लगता है, जैसे जोधपुर का नीला आसमान भी उसके लिए दुआ कर रहा हो “जा, उस ऊंचाई को छू जो यहां की हवाओं ने सिर्फ कल्पना में देखी थी।” त्रिशला का यह सफर बच्चों के लिए एक दीपक है, जो दिखाता है कि रेत के कणों से भी सितारों तक का रास्ता बन सकता है।






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