शिखर पर कदम, मगर दोस्त के लिए दिल अब भी जमीं पर
यह दृश्य किसी कृष्ण-सुदामा मिलन से कम नहीं था। जहाँ सत्ता के गलियारों में दोस्ती अक्सर औपचारिकताओं में बदल जाती है, वहीं भजनलाल ने दिखा दिया कि सच्चे रिश्ते समय और पद के बंधनों से मुक्त होते...

मुख्यमंत्री भजनलाल ने पुराने मित्र को गले लगाया
बलवंत राज मेहता
वरिष्ठ पत्रकार
राजनीति की दुनिया में अक्सर रिश्ते ओहदों के साथ बदल जाते हैं, लेकिन कुछ दोस्ती ऐसी होती हैं जो समय और सत्ता से परे होती हैं। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल जब बाड़मेर के दौरे पर थे, तो उनका काफिला सरपट आगे बढ़ रहा था। अचानक, उन्होंने अपनी कार रुकवाई, शीशा नीचे किया और सड़क किनारे खड़े एक व्यक्ति को अपने पास बुलाया। यह और कोई नहीं, बल्कि उनके पुराने मित्र सुभाष चंद्र छीपा थे, जो अब सरकारी शिक्षक के रूप में कार्यरत हैं।
यह दृश्य किसी कृष्ण-सुदामा मिलन से कम नहीं था। जहाँ सत्ता के गलियारों में दोस्ती अक्सर औपचारिकताओं में बदल जाती है, वहीं भजनलाल ने दिखा दिया कि सच्चे रिश्ते समय और पद के बंधनों से मुक्त होते हैं। मुख्यमंत्री ने आत्मीयता से सुभाष के हाल-चाल पूछे, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि ऊँचाइयों पर पहुँचने के बाद भी उन्होंने अपने पुराने दोस्तों को भुलाया नहीं है।
सत्ता में पहुँचकर अक्सर लोग अपने अतीत को धुंधला कर देते हैं, लेकिन भजनलाल की यह मुलाकात एक संदेश थी—”रिश्ते पद से नहीं, प्रेम से निभते हैं।” यह दोस्ती उस परंपरा की याद दिलाती है जहाँ संबंध स्वार्थ से नहीं, अपनत्व से निभाए जाते हैं।
यह सिर्फ़ दो दोस्तों की मुलाकात नहीं थी, बल्कि यह सच्चे रिश्तों की जीत थी। जब मुख्यमंत्री ने अपने दोस्त को गले लगाया, तो यह स्पष्ट हो गया कि उनका कद भले ही ऊँचा हो गया हो, लेकिन उनके दिल की जमीन दोस्ती के लिए अब भी उतनी ही कोमल है।





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