श्रद्धा सुमन : अंतरिक्ष से शिक्षा तक एक उज्ज्वल तारे की विदाई
आज विज्ञान का आकाश थोड़ा और सूना हो गया। एक ज्योति, जो अंतरिक्ष की गहराइयों से लेकर शिक्षा के पन्नों तक रौशनी बिखेरती रही, नाम है के. कस्तूरीरंगन चिरनिद्रा में चली...

आज विज्ञान का आकाश थोड़ा और सूना हो गया। एक ज्योति, जो अंतरिक्ष की गहराइयों से लेकर शिक्षा के पन्नों तक रौशनी बिखेरती रही, चिरनिद्रा में चली गई। के. कस्तूरीरंगन… एक ऐसा नाम, जो सिर्फ वैज्ञानिक नहीं, एक दूरद्रष्टा युगद्रष्टा थे। उनके विचार अंतरिक्ष से भी ऊंचे और दृष्टिकोण ज़मीन से जुड़े हुए थे।जिस तरह अंतरिक्ष में उपग्रह पृथ्वी की परिक्रमा करते हैं, वैसे ही कस्तूरीरंगन की सोच देश की नीतियों, भावी पीढ़ियों और ज्ञानमूल्य शिक्षा के इर्द-गिर्द घूमती रही। उन्होंने आकाश को छुआ, पर अपने पांव ज़मीन पर रखे।नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति उनकी कलम से निकली एक ऐसी राह है, जो अंधेरे में दीपक बनकर लाखों छात्रों का मार्ग प्रशस्त करेगी।उनकी जीवन यात्रा एक सतत शोध थी — एक ऐसा प्रोजेक्ट जिसे आज भले ही विराम मिला हो, लेकिन उसका प्रभाव युगों तक ज़िंदा रहेगा।आज वह नहीं हैं, लेकिन उनकी सोच, उनके मिशन, और उनके द्वारा रोपे गए ज्ञान के बीज, आने वाले वर्षों में वटवृक्ष बनकर देश को दिशा देंगे।के. कस्तूरीरंगन — अब वे एक नाम नहीं, एक प्रेरणा बन चुके हैं।






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