फलोदी में हादसा, 15 श्रद्धालुओं की मौत
जोधपुर जिले के फलोदी के निकट शनिवार शाम एक भीषण सड़क हादसे में 15 लोगों की मौत हो...

आस्था की यात्रा मातम में बदली
जोधपुर जिले के फलोदी के निकट शनिवार शाम एक भीषण सड़क हादसे में 15 लोगों की मौत हो गई। कुछ श्रद्धालु घायल भी हुए हैं। यह सभी श्रद्धालु कोलायत से दर्शन कर सूरसागर (जोधपुर) लौट रहे थे। जानकारी के अनुसार मतौड़ा के पास एक ट्रैवलर सड़क किनारे खड़े ट्रेलर में जा घुसी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि वाहन के परखच्चे उड़ गए और कई लोगों की मौत मौके पर ही हो गई।
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सूचना मिलते ही फलोदी पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे। राहत-बचाव कार्य देर रात तक जारी रहा। घायलों को फलोदी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जिनमें कई की हालत गंभीर बताई जा रही है। इसी बीच, मुख्यमंत्री ने प्रशासन से हादसे के कारणों की जांच रिपोर्ट भी तलब की है।
मुख्यमंत्री ने जताया दुख
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने कहा, “मतौड़ा क्षेत्र, फलोदी में हुए इस सड़क हादसे में मानव जीवन की इतनी बड़ी क्षति अत्यंत दुखद है। जिला प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि सभी घायलों को समुचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए तथा मृतक परिवारों को हरसंभव सहायता दी जाए। मैं दिवंगत आत्माओं की शांति-कामना करता हूं और घायलों के शीघ्र स्वस्थ-होने की प्रार्थना करता हूं।”
हृदयविदारक हादसा- शेखावत
सांसद एवं केंद्रीय मंत्री गजेन्द्रसिंह शेखावत बोले, पीड़ित परिवारों के साथ पूरा प्रदेश खड़ा है। उन्होंने
घटना पर शोक व्यक्त करते हुए कहा, “फलोदी के निकट हुआ यह हादसा बेहद हृदयविदारक है। जिन्होंने अपने परिजनों को खोया है, उनके प्रति मैं गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं। संकट की इस घड़ी में पूरा प्रदेश उनके साथ खड़ा है। प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि राहत व उपचार में कोई कमी न रहे।”
शेखावत ने कहा कि वे लगातार प्रशासनिक अधिकारियों से संपर्क में हैं और घायल श्रद्धालुओं को यथाशीघ्र बेहतर इलाज मिले, इसके लिए हर स्तर पर सहयोग किया जा रहा है।
सड़कें फिर बनीं श्मशान
हर बार की तरह इस बार भी हादसे के बाद सवाल वही हैं, आखिर हमारी सड़कें कब तक लहू मांगती रहेंगी, कब तक सफर पर निकले लोग मंज़िल तक पहुंचने से पहले मौत की मंज़िल पा लेंगे? प्रशासन की लापरवाही और वाहन चालकों की असावधानी का परिणाम हर बार निर्दोष जानें क्यों बनती हैं?
कोलायत दर्शन से लौटते ये श्रद्धालु जीवन में पुण्य कमाने निकले थे, पर नियति ने उन्हें एक पल में ही काल के मुंह में धकेल दिया। सड़क किनारे खड़े ट्रेलर पर कोई चेतावनी नहीं थी, यही कारण रहा होगा कि अंधेरे में दौड़ती ट्रैवलर उसे नहीं देख पाई और आस्था की यात्रा एक पल में मातम बन गई। कहने को जांच होगी, रिपोर्ट बनेगी, मुआवजा मिलेगा, मगर प्रश्न वहीं रहेगा कि क्या हम सचमुच सुरक्षित हैं? क्या सड़कें अब भी सफर का माध्यम हैं या हर मोड़ पर एक संभावित मौत की प्रतीक्षा?






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