मुनियों पर हमला — संयम, संस्कृति और संवेदना पर प्रहार
मध्यप्रदेश के नीमच जिले के सिंगोली क्षेत्र में तीन जैन मुनियों पर हुआ हमला सिर्फ एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, सहिष्णुता और संत परंपरा पर गहरा आघात...

मध्यप्रदेश के नीमच जिले के सिंगोली क्षेत्र में तीन जैन मुनियों पर हुआ हमला सिर्फ एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, सहिष्णुता और संत परंपरा पर गहरा आघात है। शैलेश मुनि जी, बलभद्र मुनि जी और मुनिंद्र मुनि जी — ये तीनों साधु किसी विवादास्पद स्थल पर नहीं, बल्कि एक मंदिर में विश्राम कर रहे थे। तभी नशे में धुत कुछ असामाजिक तत्वों ने उनसे पैसे मांगे, और इनकार करने पर लाठियों व धारदार हथियारों से हमला कर दिया।
आत्मचिंतन को विवश करने वाली घटना
यह घटना जितनी दुखद है, उतनी ही आत्मचिंतन के लिए विवश करने वाली भी। इन मुनियों की जीवनचर्या कोई साधारण जीवन नहीं, बल्कि वह संयम और तप का आदर्श मार्ग है जो आत्मकल्याण और मोक्ष की ओर ले जाता है। वे निरंतर ब्रह्मचर्य, अपरिग्रह, सत्य और अहिंसा के पथ पर चलते हैं। दिन भर पांव-पांव चलकर गांव-शहर में भ्रमण करना, बिना किसी वाहन या सुविधा के, केवल भिक्षा से गुजर-बसर करना, रात्रि में किसी सुरक्षित स्थान पर विश्राम करना — यह साधारण नहीं, अत्यंत तपस्वी जीवन है।
सामाजिक चेतना में गिरावट
इन मुनियों ने रात में चिकित्सा न लेकर यह सिद्ध कर दिया कि उनका धर्म उनके लिए केवल आडंबर नहीं, बल्कि आचरण है। सूर्यास्त के बाद चिकित्सा न लेना, रात्रि भोजन का त्याग, जीवों के प्रति करुणा— ये सभी उनके उस संयमपथ के प्रमाण हैं जिसकी कल्पना मात्र से आधुनिक व्यक्ति विचलित हो सकता है।
यह सोचने का विषय है कि जिस भारत भूमि पर राजा खुद संन्यासियों के चरण धोते थे, वहां आज कुछ नशे में चूर लोग उन्हें अपमानित और घायल कर रहे हैं। यह हमारी सामाजिक चेतना की गिरावट का संकेत है।
इस अमानवीय कृत्य के खिलाफ जैन समाज ने सिंगोली बंद का आह्वान किया, जिसे जनता का व्यापक समर्थन मिला। प्रशासन ने तत्परता से आरोपियों को गिरफ्तार किया, और मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया — यह सराहनीय है। किंतु केवल कार्रवाई भर से संतोष नहीं किया जा सकता।
हमला त्याग की परम्परा पर
अब आवश्यक है कि धर्माचार्यों, मुनियों और संतों की सुरक्षा के लिए एक ठोस नीति बने। साथ ही, समाज में फैलती नशाखोरी और नैतिक पतन के विरुद्ध व्यापक जनजागरण आवश्यक है। यह हमला केवल तीन मुनियों पर नहीं हुआ — यह हमला संयम, करुणा, तप और त्याग की उस परंपरा पर है जिसने भारत को ऋषियों, मुनियों और तपस्वियों की भूमि बनाया।






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