माननीय, कुर्सी संभालिए
बजट सत्र से लोकसभा में सांसदों की हाज़िरी व्यवस्था बदलने जा रही है। अब केवल रजिस्टर में नाम लिखना काफी नहीं होगा। सांसदों को सदन चलने के दौरान अपनी सीट पर पहुंचकर डिजिटल हाज़िरी दर्ज करनी...

संसद के गलियारों में हलचल है।
कारण ? हाज़िरी ।
जी हां, वही हाज़िरी जिसे अब तक कई माननीय सांसद हल्के में लेते आए थे। लेकिन अगले हफ्ते से शुरू हो रहे संसद के बजट सत्र में लोकसभा के सांसदों के लिए हाज़िरी का खेल पूरी तरह बदलने वाला है। अब सिर्फ रजिस्टर पर दस्तखत कर लेना काफी नहीं होगा, सीट तक पहुंचना भी ज़रूरी होगा।
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रजिस्टर से सीट तक का सफर
अब तक का सिस्टम बड़ा आरामदेह था। संसद भवन के गलियारे में रखे रजिस्टर में नाम लिख दिया, और माननीय “उपस्थित” माने गए। चाहे सदन में कदम रखा हो या नहीं—हाज़िरी पक्की। कई सांसद इसी हाज़िरी के भरोसे बाहर निकल जाते थे, बैठक हो या न हो।
लेकिन अब यह सुविधा इतिहास बनने जा रही है। लोकसभा सचिवालय ने साफ कर दिया है कि यदि सांसद अपनी सीट पर जाकर हाज़िरी दर्ज नहीं करते और सदन दिनभर के लिए स्थगित हो जाता है, तो उस दिन की उपस्थिति गिनती में नहीं आएगी।
डिजिटल हाज़िरी, डिजिटल सख्ती
अब हाज़िरी होगी पूरी तरह डिजिटल।
हर सांसद की सीट पर विशेष कंसोल लगाए गए हैं, जिनके ज़रिए उपस्थिति दर्ज होगी। मतलब साफ है—सदन चल रहा है, तो माननीय को अपनी कुर्सी पर होना ही होगा। गलियारे की हाज़िरी अब बीते ज़माने की बात हो गई।
स्पीकर का संदेश: मौजूदगी ज़रूरी है
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने लखनऊ में मीडिया से बातचीत में साफ कहा कि यह फैसला संसदीय प्रक्रिया को आधुनिक बनाने और विधायी सत्रों की उत्पादकता बढ़ाने के लिए लिया गया है।
सरल शब्दों में—अब सांसद सिर्फ सांसद नहीं, सक्रिय सांसद दिखने भी चाहिए।
बजट सत्र से लागू होगी नई व्यवस्था
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संसद का बजट सत्र 28 जनवरी से आहूत किया है। यानी उसी दिन से माननीयों की परीक्षा शुरू।
अब देखना दिलचस्प होगा कि कितने सांसद समय पर सीट तक पहुंचते हैं और कितनों की हाज़िरी रास्ते में ही रह जाती है।
जनता का सवाल
आम आदमी रोज़ दफ्तर, फैक्ट्री और खेत में हाज़िरी देता है। अब संसद में भी हाज़िरी सख्त हो रही है।
सवाल बस इतना है—क्या इससे सदन में बहस बढ़ेगी, कामकाज सुधरेगा और जनता की आवाज़ ज़्यादा मजबूती से उठेगी?






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