कोटा, एक जिद्दी शहर
अनुभव से सीखने की है और विरासत को और आगे ले जाने की है। चम्बल के पानी की तासीर कहें या यहां के लोगों की मेहनत की पराकाष्ठा, इतिहास में देखें तो कोटा ने जब-जब जिद पाली है कुछ करके दिखाया...

Table Of Content
- एक ऐसा शहर जहां कोचिंग होगी, कॅरियर होगा, लेकिन इन सबसे पहले केयर होगी
- कोटा को माॅडल सिटी बनाने की कवायद
- कलक्टर कर रहे विद्यार्थियों से संवाद
- एसपी भी बनी विद्यार्थियों की मेंटोर
- जनप्रतिनिधि भी आगे आए
- कोटा के हर व्यक्ति का प्रयास कम नहीं
- आॅटो यूनियन की सुरक्षित यात्रा की पहल
- ओपीडी, आईपीडी व जांचों में भी रियायत
- छवि को नए सिरे से गढ़ने के प्रयास
- देश का पहला इमोश्नल वेलबीइंग सेंटर
- कामयाबी की कहानियां लिखता है कोटा
- फैक्ट फाइल
- यहां सपने सजते हैं…
- कोटा एक अलग शहर है
- मेरे बच्चों का जीवन बनाया है कोटा ने
एक ऐसा शहर जहां कोचिंग होगी, कॅरियर होगा, लेकिन इन सबसे पहले केयर होगी
राजस्थान टुडे
कोटा ब्यूरो
देश-दुनिया में मेडिकल व इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी, आईआईटी-जेईई और नीट के परिणामों के साथ स्टूडेंट्स सुसाइड के लिए चर्चा में रहने वाला शहर कोटा एक बार फिर नई कहानी लिखने के लिए जिद लिए हुए है। यह जिद नई परिभाषा गढ़ने की है। अनुभव से सीखने की है और विरासत को और आगे ले जाने की है। चम्बल के पानी की तासीर कहें या यहां के लोगों की मेहनत की पराकाष्ठा, इतिहास में देखें तो कोटा ने जब-जब जिद पाली है कुछ करके दिखाया है।
कोटा को माॅडल सिटी बनाने की कवायद
अब यहां के लोगों ने कोशिश शुरू की है कोटा को मॉडल सिटी बनाने की, जहां कोचिंग और करियर तो होगा, लेकिन इससे पहले होगी केयर। कोटा को अब केयर सिटी बनाने की कोशिश है। यहां न सिर्फ कोचिंग संस्थान और हॉस्टल्स, वरन जिला प्रशासन, जनप्रतिनिधि और हर शहरवासी एकजुट होकर प्रयास कर रहा है। इसके तहत यहां ‘कोटा केयर्स और कामयाब कोटा’ अभियान चलाया जा रहा है।
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कलक्टर कर रहे विद्यार्थियों से संवाद
कोटा के कलक्टर संभवतः इस देश के पहले ऐसे कलक्टर होंगे जो एक शिक्षक की तर्ज पर कक्षाओं में जा रहे हैं और देशभर के बच्चों से बात कर रहे हैं। वे अब तक 25 हजार से अधिक स्टूडेंट्स से सीधे संवाद कर चुके हैं और खुद के उदाहरण से समझा रहे हैं कि पढ़ाई कैसे करनी है, दिनचर्या, सोच, स्वभाव को कैसे बदलना है। पहले नीट और फिर यूपीएससी क्रेक करने वाले जिला कलक्टर डॉ.रविन्द्र गोस्वामी बच्चों को फिजिक्स, कैमेस्ट्री के साथ सेल्फ डाउट, ओवर थिंकिंग, अटेंशन स्पान, मेंटल हेल्थ, स्लीपिंग लूप सहित कई ऐसे विषयों पर चर्चा कर रहे हैं जो स्टूडेंट्स के लिए पढ़ाई के साथ बहुत जरूरी है। क्लास के अलावा उन्होंने ‘डिनर विद कलक्टर’ अभियान शुरू किया हुआ है, जिसमें हॉस्टल्स में जाकर स्टूडेंट्स के साथ डिनर करते हैं और इस दौरान उनके सवालों के जवाब भी देते हैं। बच्चों को मोटिवेट करते हुए उनकी समस्याओं के समाधान देते हैं। जिला कलक्टर डॉ. गोस्वामी ने पिछले दिनों देश के अभिभावकों के नाम एक ओपन लेटर भी लिखा, जिसमें यहां आने वाले स्टूडेंट्स के अभिभावकों को विश्वास दिलाया कि यहां उनके बच्चे सुरक्षित वातावरण में अपने सपने पूरे करने के लिए तैयारी करेंगे।
एसपी भी बनी विद्यार्थियों की मेंटोर
इसी तरह डॉक्टर बनने के बाद आईपीएस के रूप में भूमिका निभा रहीं कोटा शहर की पुलिस अधीक्षक डॉ. अमृता दुहन भी कोटा में स्टूडेंट्स की मेंटोर के रूप में काम कर रही हैं। कोटा संभवतः ऐसा पहला शहर है, जहां थड़ियों पर मादक पदार्थों की बिक्री रोकने के लिए बने कानूनों के तहत गिरफ्तारियां हो रही हैं। स्टूडेंट्स के लिए पुलिस द्वारा ‘के-सॉस’ (कोटा-सेफ्टी ऑफ स्टूडेंट्स) एप जारी किया गया। ‘दरवाजे पर दस्तक’ अभियान के तहत स्टूडेंट्स को पैनिक बटन के बारे में बताया जा रहा है। इस एप के पैनिक बटन दबाते ही पुलिस तुरंत स्टूडेंट्स की मदद के लिए पहुंच रही है। यही नहीं स्टूडेंट्स में सुसाइड व सेल्फ हार्म जैसी दुर्घटनाओं को रोकने के लिए मेटा के साथ टाइ-अप किया गया है, जिससे सोशल मीडिया पर इस तरह के शब्द काम में लेने के साथ ही स्टूडेंट्स की पहचान कर ली जाती है और उसे काउंसलिंग दी जाती है।
जनप्रतिनिधि भी आगे आए
इसके साथ ही कोटा के जनप्रतिनिधि भी कोटा में आने वाले स्टूडेंट्स और पेरेन्ट्स को मोटिवेट कर रहे हैं। पिछले दिनों ही स्थानीय सांसद और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने देश के अभिभावकों को आह्वान करते हुए कहा कि कोटा में विद्यार्थियों के लिए बहुत अच्छा माहौल है और यहां जो भी कमियां हैं, उन्हें दूर किया जा रहा है। आने वाले समय में कोटा देश में एक मॉडल सिटी के रूप में सामने आएगा, जहां हर सुविधा और हर व्यवस्था स्टूडेंट्स के लिए होगी। उन्होंने बच्चों से बात करते हुए भी कहा है कि हम आपके अभिभावक हैं, जो बच्चे अपने घर से दूर कोटा में रहकर पढ़ाई कर रहे हैं वे निश्चिंत होकर पढ़ें। यहां किसी भी तरह की समस्या होगी तो उसे हम देखेंगे।
कोटा के हर व्यक्ति का प्रयास कम नहीं
प्रशासन, पुलिस और जनप्रतिनिधियों के साथ अब बात करें यहां के आमजन की तो कोटा का हर व्यक्ति इन दिनों अपने स्तर पर कोटा के लिए बेहतर प्रयास में जुटा है। यहां कोटा स्टूडेंट्स वेलफेयर सोसायटी द्वारा कोटा जिला प्रशासन के साथ मिलकर कोटा केयर्स अभियान के तहत अलग-अलग हित धारक अपने-अपने क्षेत्रों में नवाचार कर रहे हैं। हॉस्टल संचालकों ने स्टूडेंट्स की शिकायतों और उनकी परेशानियों को देखते हुए अब कॉशन मनी और सिक्योरिटी राशि लेना बंद कर दिया है। अब स्टूडेंट्स आसानी से एक से दूसरे हॉस्टल ज्वाइन कर सकेंगे। स्टूडेंट्स के लिए बेहतर सुविधाएं तथा केयरिंग के लिए हॉस्टल में अटेंडेंस, मेडिकल फेसिलिटी और अन्य कई व्यवस्थाओं में सुधार किया जा रहा है। कोटा में करीब 4 हजार हॉस्टल्स हैं और इनमें 25 हजार से अधिक कर्मचारी हैं।
आॅटो यूनियन की सुरक्षित यात्रा की पहल
इसी तरह शहर के 10 हजार से अधिक ऑटो चालकों की ऑटो यूनियन्स ने स्टूडेंट्स को सुरक्षित यात्रा करवाने की पहल की है। ऑटो यूनियन के पदाधिकारियों ने एक किराया निर्धारित कर लिया है, जिससे अधिक चार्ज अभिभावक व आमजन से नहीं लिया जाएगा। वहीं वेटिंग राशि और नाइट चार्ज को लेकर भी निर्णय लेकर प्रशासन को बता दिए गए हैं। ऑटो यूनियन ने आश्वस्त किया है कि अब पेरेन्ट्स को अधिक किराया वसूलने की शिकायत नहीं रहेगी।
ओपीडी, आईपीडी व जांचों में भी रियायत
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) कोटा चैप्टर के पदाधिकारियों ने भी स्टूडेंट्स को ओपीडी, आईपीडी व जांचों पर रियायत का प्रस्ताव दिया है। इसके लिए अलग-अलग दरें तय कर दी गई है, जिसका जिला कलक्टर ने स्वागत भी किया है। डॉक्टर्स ने यह भी कहा है कि जिस भी हॉस्टल या कोचिंग में साइकोलॉजी काउंसलिंग की आवश्यकता होगी, आईएमए के एक्सपर्ट्स हमेशा तैयार रहेंगे। इसके तहत कोचिंग संस्थानों में मेडिकल हेल्थ चेकअप कैम्प भी लगाए जाएंगे। साथ ही शहर के अन्य स्टैक हॉल्डर्स भी आगे आ रहे हैं, जो स्टूडेंट्स की मदद के लिए तत्पर है।
छवि को नए सिरे से गढ़ने के प्रयास
ये सभी प्रयास कोटा की छवि को नए सिरे से गढ़ने के लिए हो रहे हैं। कोटावासियों का कहना है कि कोटा ने अब तक स्टूडेंट्स के कॅरियर संवारे हैं। पिछले 40 वर्षों में करीब 30 लाख स्टूडेंट्स को डॉक्टर व इंजीनियर बनाया, लेकिन अब केयरिंग के क्षेत्र में भी नया आयाम स्थापित करेंगे, जो देश में नजीर बनेगी। इसके बाद देशभर में जिस तरह आज कोटा कोचिंग पैटर्न को माना जाता है, उसी तरह कोटा केयरिंग पैटर्न को भी माना जाएगा और इसको फोलो किया जाएगा।
देश का पहला इमोश्नल वेलबीइंग सेंटर
कोटा अनुभवों से सीख रहा है। यहां वर्तमान में 200 से अधिक काउंसलर्स स्टूडेंट हेल्थ पर काम कर रहे हैं। यहां आने वाले स्टूडेंट्स की एडवांस केयर और शिक्षा के साथ उनके मानसिक स्वास्थ्य पर बेहतर काम के लिए भी कोटा अब देश के अन्य शहरों से आगे बढ़ रहा है। या यूं कह लें कि कोटा देश का एकमात्र शहर है जहां स्टूडेंट्स के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर प्रयास किए जा रहे हैं। यहां सबसे पहले इमोशनल वेल बीइंग सेंटर की स्थापना की गई। यह एक ऐसा इंटीग्रेटेड कैंपस है, जहां सभी तरह के काउंसलर 24 घंटे स्टूडेंट्स की मदद के लिए उपलब्ध रहते हैं। यहां अलग-अलग विधाओं के काउंसलर स्टूडेंट्स को मानसिक तौर पर मजबूत बना रहे हैं। इसमें एकेडमिक, साइकोलॉजिकल, कॅरियर, क्लीनिक सहित सभी तरह के एक्सपर्ट काउंसलर यहां मौजूद रहते हैं। कोटा द्वारा अपनाए गए इस मॉडल को राजस्थान सरकार ने भी सराहा है और अब राजस्थान सरकार ने भी कोटा में स्टूडेंट्स के मानसिक स्वास्थ्य पर चिंतन शुरू करते हुए प्रदेश के जोधपुर व कोटा में युवा साथी केन्द्र शुरू किए जा रहे हैं।
कामयाबी की कहानियां लिखता है कोटा
जिंदगी बदलने के साथ ही कोटा अब कामयाबी की कहानियां लिख रहा है, वो कहानियां जो समाज में बदलावों के लिए प्रेरक साबित हो रही है। गांव-ढाणी के निर्धन परिवार की प्रतिभा को कामयाबी दिलाने की जिद हो या देश को नई दिशा देने के लिए आगे बढ़ रहे युवाओं के सपने सच करने का जुनून, कोटा हर कदम पर स्टूडेंट्स के साथ है। यहां की कोचिंग की पढ़ाई पर अभिभावकों को विश्वास तो है ही, अब इस शहर को पर्यटन की दृष्टि से भी नया रूप दे दिया गया है। कोटा कोचिंग ने बीते वर्षों में सैकड़ों ऐसी कहानियां लिखी हैं जिसमें छोटे गांव कस्बों के निर्धन परिवारों की प्रतिभाओं का जीवन बदला। वे सामाजिक बदलाव के उदाहरण बने। उन्हें आस-पास के गांव कस्बे के युवा और समाज के लोगों ने फोलो किया और आज दूर-दराज के क्षेत्रों में कोटा कोचिंग के चलते शिक्षा का उजियारा फैला।
फैक्ट फाइल
15 लाख वर्तमान कोटा शहर की आबादी
2 लाख स्टूडेंट्स आते हैं यहां तैयारी करने
आईआईटी, एनआईटी और एमबीबीएस की 25 प्रतिशत सीटों पर कोटा कोचिंग स्टूडेंट
500 से अधिक आईआईटीयन-एनआईटीयन व 100 से ज्यादा एमबीबीएस फैकल्टीज
50 हजार से अधिक छात्राएं।
4 हजार हॉस्टल्स में 1.30 लाख से अधिक की कैपेसिटी।
1500 से अधिक मैस
60 हजार से अधिक साइकिल यूजर्स
25 हजार से अधिक स्टूडेंट्स का पीजी में निवास
30 आल इंडिया टॉपर इंजीनियरिंग व मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में कोटा से
शहर के 3 इलाकों में फैली हुई है कोचिंग
देश के हर कोने से स्टूडेंट्स आते हैं, मिनी इंडिया है कोटा
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यहां सपने सजते हैं…
कोटा की गलियों में सपने सजते हैं, यहां मेहनत के आंसू भी मुस्कुरा के सिलते हैं। मैं नीट की तैयारी कर रही हूं। अपनी कोटा की लाइफ को शब्दों में बयां नहीं कर सकती। मुझे ऐसा शहर चाहिए था, जहां कम्पीटिशन हो, सेल्फ असेसमेंट बेस्ट हो, जहां मैं जान सकूं कि मेरा कम्पीटिटर कौन है, जान सकूं कि कितनी मेहनत हो रही है। यहां इमोशनल सपोर्ट और एजुकेशन मटेरियल दोनों देश में बेस्ट हैं। यहां वार्डन, टीचर्स, फ्रेंड्स सभी इतने सपोर्टिव हैं कि आपको नेशनल लेवल के कॉम्पिटिशन के लिए तैयार कर देते हैं।
- रितिका राजवंशी, नीट स्टूडेंट
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कोटा एक अलग शहर है
मैं कोटा बैंक सर्विस के लिए 42 साल पहले आया था। इसके बाद कोटा इतना पसंद आया कि यहीं बस गया। मेरे दोनों बेटे आईआईटीयन हैं और बेटी डॉक्टर है। यह सब कोटा की बदौलत है। हम यहां आईएल मंदिर में सेवा भी करते हैं, बच्चों को मोटिवेट करते हैं। कोटा दुनिया के किसी भी दूसरे शहर से कोटा बेहतर है।
– मनोहर लाल खंडेलवाल, कोटा
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मेरे बच्चों का जीवन बनाया है कोटा ने
मैं दो साल से कोटा में हूं। पहले मेरी बेटी ने यहां पढ़कर आईआईटी खड़गपुर में एडमिशन लिया, अभी बेटे ने जेईई-मेन क्लीयर कर लिया है। एडवांस्ड की तैयारी है। मेरे बच्चों का जीवन कोटा ने बनाया है। यहां माहौल का फर्क है। बच्चे एक दूसरे को देखकर सीखते हैं। कोटा शहर और यहां के लोग भी बहुत अच्छे हैं।
– नीलू गौतम, अभिभावक, बिहार






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