सिर्फ कोडिंग नहीं, आगे बढ़ने के लिए तार्किक सोच जरूरी
एनवीडिया के सीईओ जेनसन हुआंग और टेस्ला के एलोन मस्क जैसे दिग्गजों का मानना है कि एआइ के युग में केवल कोडिंग जानना पर्याप्त नहीं है। आने वाले वर्षों में भौतिकी और गणित की गहरी समझ, वैज्ञानिक दृष्टिकोण...

कृत्रिम बुद्धिमत्ता के इस नए युग में कोडिंग से अधिक ज़रूरी है विज्ञान और गणित की गहरी समझ
राकेश गांधी,
वरिष्ठ पत्रकार
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तेज़ी से बदलती तकनीकी दुनिया में हाल ही में एनवीडिया के सीईओ जेनसन हुआंग का एक बयान चर्चा में रहा। बीजिंग में छात्रों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा, “यदि मैं आज 22 साल का छात्र होता, तो कंप्यूटर विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) की बजाय भौतिक विज्ञान (फिजिक्स) पढ़ता।” यह कथन केवल एक व्यक्तिगत राय नहीं, बल्कि तकनीकी दुनिया के गहरे बदलाव की ओर संकेत करता है। हुआंग का कहना है कि भविष्य की कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआइ) अब केवल कोडिंग पर आधारित नहीं रहेगी, बल्कि यह वास्तविक दुनिया को समझने और उसमें कार्य करने की क्षमता पर केंद्रित होगी।
कोडिंग से ज्यादा जरूरी है विज्ञान की समझ – जेनसन हुआंग
फर्स्ट प्रिंसिपल थिंकिंग की जरूरत – एलोन मस्क
हुआंग ने एआई विकास की चार लहरों का जिक्र किया, इनमें परसेप्शन एआइ यानी इमेज, वॉइस और पैटर्न पहचानने वाली एआइ, जेनेरेटिव एआइ जो चैटजीपीटी या इमेज जेनरेटिंग टूल्स जैसे टेक्स्ट और कंटेंट बना सके, रिजनिंग एआइ यानी एआइ का तार्किक सोच विकसित करना और चौथा है फिजिकल एआइ, जो वास्तविक दुनिया में मौजूद भौतिक परिस्थितियों को समझकर कार्य कर सके। उनका तर्क है कि इस नई लहर में इंसानों को ऐसी मशीनें विकसित करनी होंगी जो जड़त्व, घर्षण, कारण–परिणाम और वास्तविक दुनिया के अन्य नियमों को समझें। ऐसे में मैथ्स और फिजिक्स की गहरी समझ अनिवार्य है।
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कोडिंग का बदलता स्वरूप
एआइ का सबसे बड़ा प्रभाव कोडिंग पर पड़ा है। आज जनरेटिव एआइ टूल्स, प्राकृतिक भाषा को प्रोग्रामिंग इंटरफ़ेस के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। एनवीडिया प्रमुख ने कहा कि अब “प्रॉम्प्ट” ही नई प्रोग्रामिंग भाषा है। इसका अर्थ यह है कि एक साधारण व्यक्ति भी एआइ से कह सकता है कि उसे क्या करना है, ठीक वैसे जैसे हम गुगल से कुछ सर्च करने को कहते हैं।
यानी कल तक जहां कोड लिखना विशेषज्ञता की मांग करता था, आज एआइ की मदद से बिना कोड लिखे ही जटिल काम हो सकते हैं। यही कारण है कि हुआंग का कहना है, “अब बच्चों को कोडिंग सिखाना जरूरी नहीं है, बल्कि उन्हें समस्या की गहरी समझ और सही दिशा में सोचने की क्षमता देनी चाहिए।”
एलोन मस्क और अन्य विशेषज्ञों का समर्थन
हुआंग की राय अकेली नहीं है। टेस्ला और स्पेसएक्स के सीईओ एलोन मस्क भी लम्बे समय से कहते रहे हैं कि छात्रों को “फर्स्ट प्रिंसिपल थिंकिंग” यानी मौलिक सिद्धांतों से समस्या हल करना सीखना चाहिए। मस्क ने हाल ही में पावेल डुरोव (टेलीग्राम के संस्थापक) के इस सुझाव का समर्थन किया कि छात्रों को मैथेमेटिक्स और फिजिक्स में महारत हासिल करनी चाहिए, क्योंकि यही वैज्ञानिक सोच की नींव है।
मस्क का यह तर्क है कि तकनीकी चुनौतियों को हल करने के लिए सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि प्राकृतिक नियम क्या कहते हैं, न कि यह कि “अभी तक क्या किया जाता रहा है।” यह सोच कोडिंग के रटे-रटाए तरीकों से आगे जाकर नए आविष्कारों की राह खोलती है।
यह परिवर्तन क्यों महत्वपूर्ण है?
• अब एआइ सिर्फ डेटा प्रोसेसिंग या कंटेंट जनरेट करने तक सीमित नहीं है। यह रोबोटिक्स, स्वायत्त वाहनों, स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग और मेडिकल डायग्नोसिस जैसे क्षेत्रों में सक्रिय है। इन सब क्षेत्रों में मशीन को वास्तविक दुनिया के नियमों के अनुसार काम करना होता है।
• एआइ अब इंसानी भाषा को समझता है और उसके अनुसार कार्य कर सकता है। इसलिए तकनीकी भाषाओं का महत्व कुछ हद तक कम होता जा रहा है।
• जटिल समस्याओं का समाधान केवल कोडिंग से नहीं हो सकता। इसके लिए गणितीय मॉडलिंग, तार्किक सोच और भौतिक नियमों की समझ जरूरी है।
क्या कोडिंग अप्रासंगिक हो जाएगी?
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि कोडिंग का महत्व पूरी तरह समाप्त नहीं होगा। मशीनों को कैसे चलना है, इसका ढांचा तैयार करने के लिए प्रोग्रामिंग भाषाओं की भूमिका हमेशा रहेगी। लेकिन यह भूमिका “बैकएंड” में चली जाएगी। उपयोगकर्ता और तकनीकी विशेषज्ञों के लिए मुख्य चुनौती यह होगी कि वे समस्या को स्पष्ट रूप से परिभाषित कर सकें, सही एल्गोरिदम चुन सकें और एआइ को सही दिशा में प्रशिक्षित कर सकें।
इसलिए भविष्य में केवल कोड लिखना जानना पर्याप्त नहीं होगा। बल्कि यह समझना जरूरी होगा कि किसी समस्या को किस तरह डिजाइन और मॉडल किया जाए। यही कौशल मैथ्स और फिजिक्स की गहरी समझ से आता है।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता के मौजूदा दौर ने तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास के मानदंड बदल दिए हैं। अब यह जरूरी है कि हम बच्चों को केवल कोडिंग सिखाने के बजाय उन्हें सोचना सिखाएं, समस्या को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखने की आदत डालें। जेनसन हुआंग और एलोन मस्क जैसे नेताओं के ये संदेश हमें भविष्य के लिए चेतावनी देते हैं कि अगर हम आज भी पुराने ढर्रे पर अटके रहे तो कल की तकनीक में पिछड़ जाएंगे। भौतिकी, गणित और वैज्ञानिक तर्कशक्ति ही वह आधार हैं जो हमें एआइ की अगली पीढ़ी में नेतृत्व दिला सकते हैं।






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