राजघराने ‘आम’ तो आम लोग ‘राजसी’
हाल ही उदयपुर में हुई रॉयल डेस्टिनेशन वेडिंग की चर्चा दुनिया भर में छायी रही। इसे इस साल की सबसे बड़ी शादी करार दिया गया है। इसमें अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बेटे जूनियर ट्रंप अपनी...

प्रिंस चार्ल्स–डायना की वेडिंग ऑफ़ द सेंचुरी भी पड़ी फीकी
मधुलिका सिंह,
वरिष्ठ पत्रकार
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आज जब शादियों की बात होती है तो हर परिवार की चाहत डेस्टिनेशन वेडिंग की चमक, रॉयल वेडिंग की आभा और बिग फैट इंडियन वेडिंग के शाही ठाठ के आसपास घूमती है। पिछले एक दशक में विवाह सिर्फ एक पारिवारिक अनुष्ठान नहीं रहा, अब यह अरबों रुपए की उभरती हुई इंडस्ट्री में बदल चुका है जहां हर रस्म एक अनुभव है और हर पल एक यादगार फ्रेम। लेकिन शादी की इस विलासिता का बीज आज नहीं पड़ा। राजस्थान की धरती इस वैभव की असली जननी है जहां सदियों पहले राजा-महाराणाओं की शादियां विलासिता का पर्याय हुआ करती थीं। अब राजशाही भले ही इतिहास के पन्नों में सिमट गई हो पर उस वैभव की चमक आज भी फीकी नहीं पड़ी। अब फर्क सिर्फ इतना है कि पहले राजघराने आम को चकित करते थे और आज आम लोग खुद को शाही महसूस करने की चाहत में असाधारण अनुभव गढ़ रहे हैं। महल अब होटल बन चुके हैं, बारातें फ्लाइटों में उड़कर आती हैं और शादियां हैशटैग्स में अमर हो रही हैं। आम शादियों से डेस्टिनेशन, रॉयल और बिग फैट वेडिंग में तब्दील होती इन्हीं शादियों के इतिहास और इनके भविष्य पर एक विशेष रिपोर्ट..
कभी केवल राजा—महाराणा करते थे शाही शादियां
राजस्थान के इतिहास में राजा-महाराणाओं की शादियां भव्य उत्सव हुआ करती थी जो केवल कुछ दिनों का नहीं बल्कि महीने भर का आयोजन होता था। उंचे—उंचे किलों में रोशनी की जगमगाहट आसपास के कई गांवों को जगमगा देती थी, नगाड़ों का शोर शुभ विवाह की बात बयां कर देता था, आतिशबाजी भी एक अलग चमक बिखेरती थी तो दूल्हे का हाथी पर आगमन, शाही बारात में ऊंट, घोड़े, सैनिक और शाही भोज में लज़ीज खाने जैसे तमाम आकर्षण इसे और भव्य रूप देते थे। इन सबका संगम एक ऐसा दृश्य रच देता था जिसे देखकर लगता था मानो पूरा राज्य कोई उत्सव मना रहा हो। इतिहासकार डॉ श्रीकृष्ण जुगनू के अनुसार, भारतीय परंपरा में विवाह को एक संस्कार माना गया है। यह संस्कार और जिम्मेदारी हर व्यक्ति अपनी—अपनी आर्थिक व सामाजिक क्षमता के अनुसार पूरा किया करता था। आम घरों में भी विवाह 10 से 11 दिनों के लग्न हुआ करते थे जिसकी शुरुआत खंडन—मंडन, दाल दलने, विवाह गीतों आदि से हुआ करती थी। वहीं, राजघरानों में विवाह केवल दो व्यक्तियों का बंधन नहीं था, बल्कि वे सत्ता, सामर्थ्य और संस्कृति के प्रदर्शन का सबसे बड़ा मंच थीं। महाराणाओं के काल में मेवाड़ के महाराणा भीम सिंह और जय सिंह के शादियों के आयोजन भव्यता से परिपूर्ण थे। महाराणा जयसिंह की शादी में आतिशी बगीचे बनाए गए थे। केवल मेवाड़ ही नहीं बल्कि समस्त राजपूताने के राजघरानों जैसे जयपुर, जोधपुर, बूंदी, कोटा, बीकानेर, जैसलमेर आदि में विवाह के भव्य आयोजन ही हुआ करते थे जिसकी चर्चा इतिहास का हिस्सा रही हैं। इन्हीं रस्मों ने “रॉयल वेडिंग” की उस भारतीय अवधारणा को जन्म दिया जो आज ग्लोबल वेडिंग इंडस्ट्री का बेंचमार्क बन गई है।
महल–हवेलियों के होटलों में तब्दील होने के बाद पर्यटन का उछाल
1990 के बाद राजस्थान की अर्थव्यवस्था में एक बड़ा मोड़ आया— हवेलियों और महलों का हेरिटेज होटल में रूपांतरण। राजसमंद के देवगढ़ महल से लेकर उदयपुर की लेक पैलेस, जोधपुर का उम्मेद भवन और जयपुर का सिटी पैलेस, इन सबने एक नए “वेडिंग टूरिज्म” इकोसिस्टम को जन्म दिया। पर्यटन विभाग की रिपोटर्स बताती हैं कि 2000 के बाद राजस्थान में डेस्टिनेशन वेडिंग से होने वाली आय लगातार दोगुनी से ज्यादा गति से बढ़ी है। इनमें सबसे बड़ी भूमिका निभाने वाले शहरों में उदयपुर “सिटी ऑफ लेक्स” के रोमांटिक ब्रांड के कारण, जयपुर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट और महल आधारित वेन्यू, जोधपुर व जैसलमेर राजसी भव्यता, मरुस्थलीय सौंदर्य और विदेशी आकर्षण के ब्रांड रहे हैं। हेरिटेज होटल चेन को ताज, ओबेरॉय, लीला जैसे ग्रुप्स ने इन इमारतों को न केवल संरक्षित किया, बल्कि उन्हें करोड़ों के विवाह उद्योग में परिवर्तित कर दिया।
हजारों परिवारों की आय का स्रोत
डेस्टिनेशन वेडिंग का असली प्रभाव जमीनी स्तर पर नजर आता है। रिसॉर्ट और होटल बुकिंग के साथ-साथ कैटरिंग, फूल, ऑर्गेनाइज़ेशन, डेकोर, मेहंदी, पारंपरिक कलाकार—सबको रोजगार मिलता है। एक मध्यम आकार की डेस्टिनेशन वेडिंग से 2-3 हज़ार लोगों को सीधा व अप्रत्यक्ष रोजगार मिलता है।
उदयपुर, जयपुर और जोधपुर जैसे शहरों में यह उद्योग हजारों परिवारों की आय का मुख्य स्रोत बन चुका है। होटल व्यवसायी राजेश अग्रवाल के मुताबिक डेस्टिनेशन वेडिंग ने पूरे राजस्थान को ही सबसे हॉट डेस्टिनेशन बना दिया है। एनआरआई, बिजनेसमैन, सेलिब्रिटीज, हाई क्लास, अपर मिडिल क्लास के अलावा अब सोशल मीडिया इंफलूएंसर्स भी डेस्टिनेशन वेडिंग करना पसंद कर रहे हैं। इससे राजस्थान में जिस जगह वो वेडिंग हो रही है, वह जगह और होटल अपने आप ही लाइमलाइट में आ जाता है। जैसे कैटरीना कैफ—विक्की कौशल की शादी सवाई माधोपुर के पास, कियारा आडवाणी और सिदधार्थ मल्होत्रा की शादी जैसलमेर और ईशा अंबानी से लेकर परिणीति चोपड़ा, आमिर खान की बेटी इरा खान आदि कई हस्तियों की शादियां उदयपुर में हो चुकी हैं। इन शादियों से ना केवल होटल इंडस्ट्री, बल्कि इससे जुड़े कई छोटे—बड़े व्यवसायियों को रोजगार मिलता है।
इनको मिलता है काम-
लोक कलाकार
घूमर और कालबेलिया नृतक
मांगणियार और लंगा गायक
कच्छी घोड़ी और पपेट कलाकार
फड़ चित्रकार और बंजारों के संगीत समूह
मेहंदी कलाकार
छोटे व्यवसायी —
फूलवाले, टेंट हाउस
हलवाई और कैटरिंग
फोटोग्राफर, वीडियोग्राफर
स्थानीय टैक्सी व ड्राइवर
दर्जी, सजावट कर्मीइनको मिलता है काम-
जब दुनिया ने देखी वेडिंग ऑफ़ द सेंचुरी
इतिहास सिर्फ भारत का नहीं, दुनिया का भी गवाह है। ब्रिटेन के राजघराने के प्रिंस चार्ल्स और प्रिंसेस डायना की शादी वर्ष 1981 में हुई। इस दुनिया को वेडिंग ऑफ़ द सेंचुरी कहा गया। शादी का लाइव टेलीकास्ट 40 देशों में किया गया था। 75 करोड़ लोगों ने इस शादी को टीवी पर देखा। यह शादी सिर्फ समारोह नहीं थी, बल्कि यह ब्रिटिश क्राउन का ग्लोबल ब्रांड कैंपेन थी।
इसके बाद 2011 में प्रिंस विलियम और कैट मिडलटन की शादी ने भी काफी सुर्खियों में रही। शादी को मॉर्डन मोनार्कीज पीआर मास्टर स्ट्रोक कहा गया। वहीं, सेलिब्रिटीज में जब से रवीना टंडन ने उदयपुर में शाही शादी की थी, तब से ये माना सकता है कि राजस्थान में डेस्टिनेशन वेडिंग की परम्परा सी बन गई है। जब जोधपुर में 2018 में प्रियंका चोपड़ा और निक जोनस की शादी हुई। इसके बाद डेस्टिनेशन वेडिंग का ट्रेंड ही शुरू हो गया। इसी तरह 2018 में ही अंबानी परिवार की बेटी ईशा अंबानी की शादी भारत के कॉर्पोरेट जगत का सबसे पावरफुल इवेंट मानी गई। उदयपुर में करीब 3 दिन का प्री वेडिंग सेरेमनीज की गई। इसमें अरबों का खर्च, हॉलीवुड—बॉलीवुड, बिजनेस, पॉलिटिक्स, स्पोटर्स सेलिब्रिटीज का लाइनअप और अंतरराष्ट्रीय मीडिया की नजरों ने इसे और खास बना दिया। ये इवेंट एक शादी कम और इंटरनेशनल वेडिंग इवेंट अधिक बन गई जिसकी चर्चा आज तक की जाती है।
इन शादियों के ट्रेंड के पीछे ये हैं कारण
लीगेसी बिल्डिंग : जीवन के इस सबसे खास अवसर को लोग महज शादी नहीं बल्कि अपनी विरासत, अपनी पहचान और सामाजिक प्रतिष्ठा के रूप में संजोना चाहते हैं। लोग अपनी शादी के माध्यम से अपनी विरासत गढ़ना चाहते हैं। इसे एक ऐसी “परी कथा” बनाना चाहते हैं, जिसे पीढ़ियां याद रखें।
डिजिटल सोशलकेस कल्चर : आज सोशल मीडिया के इस दौर में लोग अपनी स्टारी इमेज बनाना चाहते हैं, सेलिब्रिटी सिंड्रोम सभी पर हावी हो चुका है। ऐसे में सभी खुद को हीरो—हीरोइन की तरह पेश करने में पीछे नहीं रहना चाहते हैं।
राजस्थानी परंपरा की महिमा:
हर किसी को एक दिन के लिए “राजसी” महसूस करने की गहरी मनोवैज्ञानिक इच्छा है। लोग यहां के हैरिटेज होटलों, महलों व किलों में शादियां कर के खुद को वो अनुभव देते हैं जो जीवन भर यादगार रहता है। ऐसे में अब साफ दिख रहा है कि राजस्थान की शादियां अब सिर्फ समारोह नहीं रहेंगी, बल्कि ऐसा अनुभव बनेंगी जिसकी चमक आने वाला नया दौर देखेगा।






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