भारत नौवीं बार एशिया का बादशाह
दुबई का दंगल भारत के नाम। यह सिर्फ एक खिताब नहीं, बल्कि चिर-प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान पर लगातार तीसरी फतह थी। जहां कुलदीप यादव की फिरकी ने पाक बल्लेबाजों को घुटने टेकने पर मजबूर किया, वहीं युवा तिलक...

पाकिस्तान पर लगातार तीसरी फतह
अजय अस्थाना,
वरिष्ठ पत्रकार
Table Of Content
दुबई इंटरनेशनल स्टेडियम में जैसे ही रिंकू सिंह के बल्ले से विनिंग चौका निकला, पूरे भारत में जश्न का सैलाब उमड़ पड़ा। यह सिर्फ एक जीत नहीं थी, यह एशिया कप 2025 के फाइनल में चिर-प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान पर लगातार तीसरी फतह थी, जिसने यह साबित कर दिया कि क्रिकेट की इस सबसे बड़ी जंग में भारतीय टीम का दबदबा अटूट है। यह मुकाबला सिर्फ क्रिकेट का नहीं, बल्कि भावनाओं का एक ऐसा तूफ़ान था, जिसमें हर भारतीय दिल की धड़कन तेज़ थी। दबाव का शिखर, सामने पाकिस्तान, और दांव पर एशिया का ताज। इस रोमांचक मुकाबले को किसी भी खेल पत्रकार के लिए शब्दों में बयां करना एक चुनौती है।
अक्टूबर माह का पूरा अंक देखें..
https://heyzine.com/flip-book/09dd11dd07.html
जब कुलदीप की फिरकी ने नचाया
टॉस जीतकर कप्तान सूर्यकुमार यादव ने पहले गेंदबाजी का फैसला लिया। पाकिस्तान ने एक मजबूत शुरुआत की। सलामी बल्लेबाजों साहिबजादा फरहान (57 रन) और फखर ज़मान (46 रन), ने 84 रनों की ठोस साझेदारी कर भारत के माथे पर एकबारगी चिंता की लकीरें खींच दी थीं। ऐसा लग रहा था कि पाकिस्तान आसानी से 180-190 का स्कोर पार कर लेगा। लेकिन फिर शुरू हुआ भारतीय स्पिन के जादूगर, कुलदीप यादव का ‘ऑपरेशन क्लीनअप’। जिस तरह एक-एक करके कुलदीप ने पाकिस्तान के मध्यक्रम को अपनी फिरकी में फंसाया, वह देखने लायक था। उन्होंने सैम अयूब, सलमान अली आगा, शाहीन शाह अफरीदी और फहीम अशरफ जैसे बड़े शिकार किए। एक समय 114 रन पर 2 विकेट गंवाने वाली पाकिस्तान की टीम, कुलदीप (4/30) और तेज गेंदबाजों जसप्रीत बुमराह, वरुण चक्रवर्ती, और अक्षर पटेल (सभी 2-2 विकेट) के सामूहिक प्रहार के सामने 19.1 ओवर में सिर्फ 146 रन पर ढेर हो गई। आखिरी 8 विकेट सिर्फ 35 रन पर गिरना, यह बताता है कि भारतीय गेंदबाजी आक्रमण किस कदर घातक रहा।
‘तिलक’ और ‘दुबे’ ने लिखी जीत की स्क्रिप्ट
147 रनों का लक्ष्य टी-20 फाइनल में बड़ा नहीं था, लेकिन भारत की शुरुआत लड़खड़ा गई। पावरप्ले में ही भारत ने अपने 3 विकेट (अभिषेक, सूर्यकुमार और श्रेयस अय्यर) 36 रनों पर गंवा दिए। यहीं से शुरू हुई दो युवा योद्धाओं तिलक वर्मा और शिवम दुबे की कहानी। पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करने वाले तिलक वर्मा ने एक छोर संभाला और दबाव को पूरी तरह खुद पर हावी नहीं होने दिया। उन्होंने पहले संजू सैमसन (24 रन) के साथ 57 रनों की अहम साझेदारी की, और फिर शिवम दुबे (33 रन) के साथ मिलकर 60 रनों की मैच जिताऊ साझेदारी की। तिलक ने 53 गेंदों पर नाबाद 69 रन की हीरोइक पारी खेली। उनकी यह पारी उस संयम और साहस का प्रमाण थी जो एक बड़े खिलाड़ी में होना चाहिए। तिलक के छक्के और फिर, महज एक गेंद खेलकर टूर्नामेंट का अंतिम हीरो बने रिंकू सिंह का विनिंग चौका भारत को 5 विकेट से यह ऐतिहासिक जीत दिला गया।
कप्तान की खामोशी और युवा कंधों का बोझ
यह जीत बेशक ऐतिहासिक है, लेकिन एक सच्चा खेल पत्रकार केवल जश्न नहीं मनाता, बल्कि बारीक विश्लेषण भी करता है। इस टूर्नामेंट में भारतीय बल्लेबाजी की सबसे बड़ी चिंता कप्तान सूर्यकुमार यादव का अपेक्षा के अनुरूप प्रदर्शन न करना रही। ‘स्काई’ को उनकी काबिलियत के आधार पर ही चुना गया था, लेकिन फाइनल में 36 रन पर 3 विकेट गिरने के दौरान उनका जल्दी आउट होना (शून्य पर) और पूरे टूर्नामेंट में उनका बल्ले से खामोश रहना गहरी चिंता का विषय है।
कप्तान का बल्ला जब शांत होता है, तो पूरी टीम पर दबाव कई गुना बढ़ जाता है। यह तो युवा सितारों, खासकर अभिषेक शर्मा की तेज शुरुआत, और फाइनल में पेवेलियन में मैदान को एकटक निहारते कोच गौतम गंभीर की अपलक आंखों की आगोश में रहते हुए तिलक वर्मा तथा शिवम दुबे के संयम और पराक्रम का कमाल रहा कि टीम इंडिया इस दबाव से बाहर निकल सकी। यदि इन युवा खिलाड़ियों ने इस तरह खुद को साबित न किया होता, तो पाकिस्तान के खिलाफ खिताबी मुकाबले में टीम इंडिया की स्थिति बहुत नाजुक हो सकती थी। यह जीत युवा खिलाड़ियों के दम पर मिली है, न कि अकेले कप्तान के भरोसे। टीम मैनेजमेंट को विश्व कप से पहले इस पहलू पर गंभीरता से विचार करना होगा।
व्यक्तिगत अवॉर्ड्स: जब युवा सितारों को मिला ‘तिलक’
इस ऐतिहासिक जीत के बाद, व्यक्तिगत पुरस्कारों पर भी युवा प्रतिभाओं का ही दबदबा रहा, जिसने भारतीय क्रिकेट के नए युग की शुरुआत का संकेत दिय
– फाइनल में अपनी जुझारू नाबाद पारी और दबाव को झेलने की क्षमता के लिए तिलक वर्मा को ‘प्लेयर ऑफ द फाइनल’ चुना गया। उन्हें टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा छक्के लगाने का अवॉर्ड भी मिला।
– सिर्फ 21 गेंदों में 33 रनों की तूफानी पारी खेलकर मैच का रुख मोड़ने वाले शिवम दुबे को ‘गेम चेंजर’ का पुरस्कार मिला।
– अपनी शानदार और निर्णायक गेंदबाजी से पाकिस्तान के मध्यक्रम को ध्वस्त करने वाले कुलदीप यादव को ‘मोस्ट वैल्यूएबल प्लेयर’ का खिताब मिला।
– लेकिन टूर्नामेंट का सबसे बड़ा सम्मान, ‘प्लेयर ऑफ द सीरीज’, विस्फोटक सलामी बल्लेबाज अभिषेक शर्मा को दिया गया, जिन्होंने 314 रन बनाकर पूरे एशिया कप में टीम को मजबूत शुरुआत दी और अपनी काबिलियत साबित की।
ट्रॉफी को लेकर ‘हाई-वोल्टेज ड्रामा’
यह मुकाबला केवल दुबई के मैदान तक ही सीमित नहीं रहा। जीत के बाद पुरस्कार वितरण समारोह में एक अप्रत्याशित हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला। भारतीय टीम ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया कि वे पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) के अध्यक्ष मोहसिन नकवी के हाथों से ट्रॉफी स्वीकार नहीं करेंगे, क्योंकि नकवी पीसीबी अध्यक्ष होने के साथ-साथ पाकिस्तान के आंतरिक मामलों के मंत्री भी थे। भारतीय टीम की मांग थी कि ट्रॉफी अमीरात क्रिकेट बोर्ड के अधिकारियों द्वारा दी जाए। हालांकि, नकवी के अड़े रहने के कारण, एसीसी और पीसीबी अधिकारियों के बीच लगभग एक घंटे तक गतिरोध बना रहा। अंततः, जब गतिरोध नहीं टूटा, तो विजेता की ट्रॉफी को ही मंच से हटा लिया गया। भारतीय टीम ने विरोध स्वरूप बिना ट्रॉफी के ही मंच पर खड़े होकर एशिया कप चैम्पियनशिप का जश्न मनाया।
देश ने मनाया जश्न, पीएम मोदी ने दी शाबाशी
भारत की इस ऐतिहासिक जीत के बाद, सिर्फ क्रिकेट प्रेमी ही नहीं, बल्कि पूरा देश जश्न में डूब गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी भारतीय टीम को तुरंत बधाई दी। उन्होंने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में टीम के प्रदर्शन को “अविश्वसनीय” बताते हुए युवा खिलाड़ियों की जमकर तारीफ की। पीएम मोदी ने लिखा, “एशिया कप जीतने पर टीम इंडिया को बधाई! यह जीत असाधारण है। युवा खिलाड़ियों ने दबाव में असाधारण प्रदर्शन किया है। यह टीम इंडिया के सुनहरे भविष्य की झलक है। उनके जुझारूपन और प्रतिभा ने पूरे देश को गौरवान्वित किया है।” प्रधानमंत्री की यह प्रतिक्रिया दिखाती है कि यह जीत सिर्फ एक खेल का मुकाबला नहीं थी, बल्कि राष्ट्रीय गौरव से जुड़ी एक बड़ी उपलब्धि थी, जिसकी गूंज देश की सर्वोच्च राजनीतिक गलियारों तक भी पहुंची।






No Comment! Be the first one.