टेस्ट के ताज का छोटा सरताज
शुरुआती दौर में बावूमा की खूबियों का किसी को पूरा अंदाज़ा नहीं था। उन्होंने तानों और उपहासों की लंबी श्रृंखला झेली। लेकिन इसके बावजूद उन्होंने कभी धैर्य नहीं खोया। खेल पर नियंत्रण बनाए रखते हुए...

लघु कद, विराट नेतृत्व: तेंबा बावूमा की ऐतिहासिक टेस्ट विजय
अजय अस्थाना,
वरिष्ठ पत्रकार
वास्तविकता में किसी भी सफल व्यक्ति से अधिक प्रशंसा उस शख्स की होनी चाहिए, जिसने सही समय पर सही व्यक्ति को किसी महत्वपूर्ण लक्ष्य के लिए चुना। दक्षिण अफ्रीका की टेस्ट टीम के कप्तान तेंबा बावूमा की कहानी कुछ ऐसी ही है। इस बात का सम्मान भी होना चाहिए कि किसी ने उनकी शारीरिक बनावट को दरकिनार करते हुए उन्हें राष्ट्रीय टीम की कमान सौंपने लायक समझा।
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राजस्थान टुडे, जुलाई 2025
शुरुआती दौर में बावूमा की खूबियों का किसी को पूरा अंदाज़ा नहीं था। उन्होंने तानों और उपहासों की लंबी शृंखला झेली है। इसके बावजूद उन्होंने कभी धैर्य नहीं खोया। खेल पर नियंत्रण बनाए रखते हुए उन्होंने न सिर्फ अपने देश के क्रिकेट प्रेमियों के 27 वर्षों के इंतज़ार को खत्म किया, बल्कि ‘चोकर’ (अंतिम क्षणों में हारने वाले) की पहचान को मिटाकर दक्षिण अफ्रीका को आईसीसी ट्रॉफी दिलाई। टेस्ट क्रिकेट की विश्व चैम्पियन बनने की इस गौरवशाली उपलब्धि ने सम्पूर्ण दक्षिण अफ्रीका को हर्षोल्लास में डुबो दिया। बावूमा अब तक सौ प्रतिशत टेस्ट जीतने वाले ऐसे कप्तान हैं, जिन्होंने एक भी मैच नहीं गंवाया। उनकी कप्तानी में दक्षिण अफ्रीका ने 10 टेस्ट में से 9 मैच जीते और एक ड्रॉ रहा।
डब्ल्यूटीसी फाइनल: शिखर संघर्ष की गवाही
2025 की विश्व टेस्ट चैम्पियनशिप का फाइनल दक्षिण अफ्रीका और पूर्व चैम्पियन ऑस्ट्रेलिया के बीच आरंभ से अंत तक एक रोमांचक संघर्ष बना रहा। चौथे दिन तक भी यह तय कर पाना कठिन था कि ट्रॉफी किसके नाम होगी। यहां एक बार फिर तेंबा बावूमा के धैर्य और नेतृत्व की सराहना करनी होगी, जिन्होंने टॉस से लेकर बल्लेबाजी तक एक पल को भी अपने आत्मबल में कमी नहीं आने दी। विपक्षी कप्तान की लंबी कद-काठी हो या तेज गेंदबाजों की सिर के पास से गुजरती बाउंसर, बावूमा कहीं नहीं डगमगाए। आज के युवाओं को उनसे यह सीख लेनी चाहिए कि जंग कद-काठी या रंग से नहीं, आत्मविश्वास और कौशल से जीती जाती है।
इतने छोटे कद-काठी वाले बल्लेबाज द्वारा आईसीसी फाइनल में ऑस्ट्रेलिया जैसी टीम के खिलाफ ऐसा प्रदर्शन शायद ही क्रिकेट इतिहास में पहले देखा गया हो। अब दुनिया भर के क्रिकेट प्रेमी बावूमा के प्रशंसक बन चुके हैं।
ट्रोलिंग के बीच नेतृत्व का उदय
शुरुआती दिनों में बावूमा को उनके कद, चेहरे और तकनीक को लेकर सोशल मीडिया पर लगातार ट्रोल किया गया। उन्हें ‘कोटा प्लेयर’ कहकर भी उपहासित किया गया, जिससे उनके चयन और स्थायित्व पर सवाल उठाए गए। लेकिन बावूमा कहां हारने वाले थे, उन्होंने इन चुनौतियों का सामना आत्मविश्वास और संयम के साथ किया। डब्ल्यूटीसी फाइनल के तीसरे दिन चोटिल हैमस्ट्रिंग के बावजूद खेली गई उनकी 65 रनों की साहसी पारी ने टीम को आत्मबल से भर दिया। इस पारी ने यह साबित कर दिया कि ट्रोलिंग उनकी कमजोरी नहीं, ताकत बन चुकी है।
27 वर्षों का सूखा खत्म
फाइनल मुकाबले में बावूमा के साथ एडन मार्करम ने 143 रनों की संघर्षपूर्ण साझेदारी की, जिसने टीम को जीत के करीब पहुंचाया। हालांकि अंतिम क्षणों में मार्करम एक खराब शॉट खेलकर आउट हो गए। दक्षिण अफ्रीका की यह जीत केवल एक ट्रॉफी नहीं, बल्कि एक मनोवैज्ञानिक विजय भी थी, जब टीम ने लॉर्ड्स जैसे प्रतिष्ठित मैदान पर ऑस्ट्रेलिया को हराया।
फाइनल की दूसरी पारी में जब टीम को 282 रनों का लक्ष्य मिला और पहला विकेट महज़ 9 रन पर गिर गया, तो मैदान पर मौजूद दक्षिणी अफ्रीकी क्रिकेट प्रेमी दर्शकों में सन्नाटा पसर गया। इसके बाद क्रीज पर आए बावूमा ने संभल कर खेलना शुरू किया और अपने पहले रन के लिए उन्होंने 30 गेंदें खेली।
आलोचकों ने कहा कि आज बावूमा ‘फ्यूज’ हो जाएंगे, लेकिन वे नहीं जानते थे कि यह खिलाड़ी बड़े इरादे के साथ मैदान में उतरा है। तीसरे दिन वे लंगड़ाते हुए बल्लेबाजी कर रहे थे, और चौथे दिन दर्द के कारण ज्यादा देर तक टिक नहीं सके, लेकिन तब तक वे टीम को जीत के दरवाज़े तक पहुंचा चुके थे। रबाडा की नौ विकेटों की घातक गेंदबाजी ने ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजी की कमर तोड़ी। वहीं बल्लेबाजों ने कमिंग्स, स्टार्क और हेज़लवुड जैसे खतरनाक गेंदबाजों की प्रतिष्ठा को ध्वस्त कर दिया।
प्रेरक नेतृत्व और युगांतकारी छवि
इस ऐतिहासिक जीत के बाद क्रिकेट दिग्गज एबी डिविलियर्स और ग्रीम स्मिथ ने बावूमा की संतुलित और प्रेरक कप्तानी की मुक्तकंठ से प्रशंसा की। एबी डिविलियर्स ने खड़े होकर ताली बजाकर उन्हें सम्मान दिया। यह सम्मान केवल एक खिलाड़ी के लिए नहीं, बल्कि एक नए युग के नेता के लिए था। चेहरे, कद-काठी और आलोचनाओं की आंधियों के बावजूद बावूमा की कप्तानी की परिपक्वता, निर्णय की सटीकता और नेतृत्व की चमक उनके हर फैसले में झलकी।
हिंदी कमेंट्री कर रहे पूर्व क्रिकेटर आकाश चोपड़ा ने भी उनकी कप्तानी को ऐतिहासिक करार देते हुए कहा—
“यह असाधारण नहीं था, महान भी नहीं था, पर जब टेस्ट क्रिकेट और अफ्रीकी क्रिकेट का इतिहास लिखा जाएगा, तब एडन मार्करम की इनिंग और बावूमा की कप्तानी को महानतम में गिना जाएगा।”
वर्नोन फिलेंडर ने बावूमा को “शानदार लीडर” बताया और कहा कि उन्होंने पिछले 24 महीनों में पूरी टीम का विश्वास जीता है। फिलेंडर ने उल्लेख किया कि टेस्ट एवं वन-डे दोनों प्रारूपों में बावूमा ने निरंतर अच्छा प्रदर्शन किया है और बदलाव का मार्ग प्रशस्त किया है।
महान क्षेत्ररक्षक रहे जान्टी रोड्स ने बावूमा के नेतृत्व की प्रशंसा करते हुए कहा कि दक्षिण अफ्रीका की ये जीत एकजुट टीम प्रदर्शन व एक अद्भुत नेतृत्व का परिणाम है।






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