झुर्रियां अनुभव तो मुस्कान सबसे बड़ा ब्यूटी ट्रीटमेंट
बाहरी देखादेखी में अगर आप भी सौंदर्य प्रक्रिया करवा रहे हैं, तो यह आपकी चॉइस है। लेकिन यह चॉइस सोच-समझकर, पूरी जानकारी के साथ और डॉक्टर की निगरानी में होगी तो ही ठीक...

झुर्रियों का डर, इंजेक्शन का जादू
मधुलिका सिंह,
वरिष्ठ पत्रकार
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एक समय था जब चेहरे की झुर्रियां अनुभव का प्रतीक मानी जाती थीं। लेकिन अब, सोशल मीडिया की दुनिया में हर कोई ‘युवा’ दिखने की चाह में दौड़ा चला जा रहा है। इंस्टाग्राम फिल्टर्स की चमक और ‘फ्लॉलेस स्किन’ के दबाव ने एक नई इंडस्ट्री को जन्म दिया है— एंटी-एजिंग और कॉस्मेटिक सर्जरी की इंडस्ट्री। भारत ही नहीं, पूरी दुनिया में लोग अब अपने चेहरे और शरीर को ‘फिक्स’ करने के लिए लाखों रुपए खर्च कर रहे हैं।
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ऐसे शुरू हुआ ट्रेंड
एंटी-एजिंग की शुरुआत कोई नई नहीं है। मिस्र की रानी क्लियोपेट्रा गधे के दूध से स्नान करती थीं, ताकि त्वचा को जवां बनाए रखा जा सके। लेकिन मॉडर्न एरा में इस ट्रेंड को असली पंख 1990 के दशक में तब मिले, जब हॉलीवुड और बॉलीवुड सेलेब्रिटीज ने कैमरे के सामने ‘परफेक्ट लुक’ के लिए बोटॉक्स और फेसलिफ्ट्स को अपनाया। भारत में यह ट्रेंड 2000 के बाद तेजी से बढ़ा, और 2015 के बाद इंस्टाग्राम और सेल्फी कल्चर के साथ तो ये एक बिजनेस इंडस्ट्री बन गया। आज भारत एशिया के टॉप 5 कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट बाजार में से एक है।
कोरियन ब्यूटी ट्रेंड्स की चमक और भारतीय दीवानगी
हाल के वर्षों में कोरियन ब्यूटी यानी ‘के ब्यूटी’ ट्रेंड्स ने भारतीय युवाओं पर गहरा प्रभाव डाला है। ग्लास स्किन, डबल क्लेंज़िंग, मल्टी-स्टेप स्किनकेयर रूटीन और बीबी/सीसी क्रीम जैसे ट्रेंड्स अब भारतीय मार्केट में आम हो चुके हैं। ‘के ड्रामा’ और ‘के पॉप सितारों’ की बेदाग और चमकती त्वचा को देखकर भारतीय युवा उसी ‘परफेक्ट’ लुक की चाह में महंगे स्किन केयर प्रोडक्ट्स, ट्रीटमेंट्स और सर्जरी तक का सहारा लेने लगे हैं। ऑनलाइन ब्यूटी रिटेलर्स के अनुसार, ‘के-ब्यूटी’ से प्रेरित प्रोडक्ट्स की बिक्री भारत में हर साल 30 फीसदी से अधिक की दर से बढ़ रही है।
इस इंडस्ट्री का साइज और खर्च
वैश्विक ब्यूटी इंडस्ट्री 2024 में 56.98 बिलियन (लगभग 4.7 लाख करोड़ रु) का आंकड़ा पार कर चुकी है। 2034 तक ये 83.34 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है।
भारत की एंटी-एजिंग इंडस्ट्री 2024 में 2.5 बिलियन (21,000 करोड़ रु.) थी, जो 2033 तक 4 बिलियन (34,000 करोड़ रु.) तक पहुंच सकती है।
भारत में साल 2023-24 में 1.29 मिलियन से अधिक कॉस्मेटिक प्रोसीजर हुए— यानी हर माह एक लाख से ज्यादा लोग अपने लुक को बदलवा रहे हैं।
कौन-कौन सी प्रक्रियाएं हैं सबसे ज्यादा पॉपुलर?
प्रक्रिया लागत (भारत) प्रभाव की अवधि जोखिम
बोटॉक्स इंजेक्शन ₹15,000–30,000 5–6 महीने सूजन, मांसपेशियों में अकड़न
फिलर इंजेक्शन ₹18,000–45,000 6–18 महीने गांठ
फेसलिफ्ट ₹1 लाख–3 लाख 5–10 साल स्कार, सुन्न त्वचा
लेज़र हेयर रिमूवल ₹20,000–50,000 (6 सत्रों के लिए) स्थायी जलन, रंग में अंतर
स्किन टाइटनिंग ₹25,000–60,000 1–2 साल त्वचा में झनझनाहट
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क्यों ले रहे हैं लोग इतने जोखिम?
कई हॉलीवुड, बॉलीवुड सितारे और कई अन्य सेलिब्रिटी ऐसे ट्रीटमेंट कराते रहते हैं। इनसे प्रेरित होकर आम लोग भी अब यह सोचते हैं कि अगर सेलेब्रिटी ऐसा कर सकते हैं तो हम क्यों नहीं? लेकिन इस ‘युवा दिखने की होड़’ में कई लोग जान तक गंवा रहे हैं। शेफाली जरीवाला की हालिया असामयिक मौत के पीछे ग्लूटाथियोन इंजेक्शन जैसे अनप्रूव्ड एंटी-एजिंग इंजेक्शन को लेकर सवाल उठे हैं। ऐसे इंजेक्शन्स पर भारत में पूरी तरह से रोक नहीं है, और कई सैलून में बिना डॉक्टरी निगरानी के ये दवाइयां दी जा रही हैं।
इंस्टाग्राम फेस (चिकनी त्वचा, मोटे होंठ, बिल्लीनुमा आंखें) अब एक आदर्श बन गया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे इंस्टाग्राम, स्नैपचैट और टिकटॉक पर ‘फिल्टर-संस्कृति’ ने लोगों को असलियत से दूर कर दिया है। अब हर कोई आकर्षक दिखने की इस डिजिटल दौड़ में शामिल होना चाहता है। 95 प्रतिशत से ज़्यादा लोकप्रिय इंस्टाग्राम प्रोफाइल्स फेसट्यून या बोटॉक्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। जब 17 साल का कोई लड़का या लड़की इन्हीं चेहरों को देखता है, तो उसे अपनी स्किन ‘नॉर्मल’ नहीं लगती।
मनोवैज्ञानिक प्रभाव
बाहर से खूबसूरत दिखने की चाह भीतर की बेचैनी को छुपा नहीं सकती। कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट के बाद कुछ लोगों को आत्मविश्वास में बढ़ोतरी जरूर होती है, लेकिन कई बार यह खुशी अस्थायी साबित होती है। जो लोग पहले से ही अपने शरीर या चेहरे को लेकर असंतुष्ट होते हैं, उनके लिए यह प्रक्रियाएं कभी-कभी ‘संतोष का झांसा’ बन जाती हैं। उनमें असमर्थता की भावना और गहराई से बैठ जाती है।
बॉडी डिस्मॉर्फिक डिसऑर्डर (बीडीडी) जैसी मानसिक स्थितियों में व्यक्ति को अपने रूप में बार-बार खामी नजर आती है, चाहे वह दुनिया की नजर में सुंदर ही क्यों न हो। ऐसे लोग बार-बार सर्जरी कराते हैं, लेकिन फिर भी आत्मसंतुष्ट नहीं हो पाते।
मनोवैज्ञानिक बताते हैं कि जब व्यक्ति का आत्म-मूल्य केवल लुक्स पर आधारित हो जाता है, तो उसके असफल होने की आशंका बढ़ जाती है। यह लगातार तुलना, असंतोष और आत्म-अस्वीकार जैसी मानसिक चुनौतियों को जन्म देता है, जिससे डिप्रेशन और एंग्जायटी भी हो सकती है।
चेहरा आपका, चॉइस भी आपकी
अगर आप सौंदर्य प्रक्रिया करवा रहे हैं, तो यह आपकी चॉइस है। लेकिन यह चॉइस सोच-समझकर, जानकारी के साथ और डॉक्टर की निगरानी में होनी चाहिए। वरना यह ‘सुंदरता’ आपको स्वास्थ्य और मानसिक शांति दोनों से दूर कर सकती है। झुर्रियां अगर अनुभव की लकीरें हैं, तो मुस्कान सबसे बड़ा ब्यूटी ट्रीटमेंट।






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