एक तिहाई आबादी पर ‘रईसी तोंद’ का संकट
फास्ट फूड या गलत खानपान की वजह से हार्ट, डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल ही नहीं, बल्कि मोटापे की समस्या भी तेजी से बढ़ रही...

अव्यवस्थित लाइफ स्टाइल व अस्वास्थ्य पूर्ण खान- पान के चलते सम्पूर्ण मानव जगत पर मोटापे का बड़ा खतरा मंडराने लगा है। ये समस्या केवल भारत की ही नहीं, बल्कि अमेरिका, चीन समेत कई विकसित व विकासशील देशों की है। फास्ट फूड या गलत खानपान की वजह से हार्ट, डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल ही नहीं, बल्कि मोटापे की समस्या भी तेजी से बढ़ रही है।
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‘द लैंसेट’ की एक नई रिपोर्ट ने चिंताजनक तस्वीर पेश की है। भारत में वर्ष 2021 तक करीब 18 करोड़ लोग मोटापे की समस्या से परेशान थे। नए रिसर्च की मानें तो आगामी 25 साल में ये संख्या 45 करोड़ तक पहुंचने की आशंका जताई जा रही है।
कई बीमारियों का संकेत है तोंद
अब तक इंसान के लटके हुए पेट या बढ़ी हुई तोंद को उसकी रईसी मान लिया जाता था। लेकिन अब ऐसा नहीं है। कई अनुसंधानों में चिकित्सा विज्ञानियों ने इसे भविष्य के लिए बड़ा खतरा बताया है। यदि सरल भाषा में कहें तो हमारे देश की एक- तिहाई से अधिक आबादी के सामने तोंद बड़ी समस्या बनने वाली हैं। ये सही है कि हमारे देश में कटोरेनुमा तोंद को लेकर लोग ज्यादा चिंतित नहीं रहते। उन्हें खाते-पीते घर का होने की निशानी मान लिया जाता है। लेकिन आज महानगरों में रह रहे परिवारों के सामने तोंद एक बड़ी समस्या बन चुका है। अब ये तोंद इंसान को न केवल बेडोल बनाती है, बल्कि उसके शरीर में डायबिटीज, हार्ट डिज़ीज और कई गंभीर बीमारियों की आगमन के संकेत है।
हर दस में तीन लोग ‘तोंदियल’
इस ताजे अनुसंधान के अनुसार भारत में हर दस में से तीन लोग इस बीमारी से ग्रस्त हैं या होने वाले हैं। शरीर बेडोल होने से इंसान में रूमेटिक मस्कुलोस्केलेटल डिसऑर्डर भी तेजी से बढ़ रहा है। ये इम्यून सिस्टम की गड़बड़ी से जुड़ी गंभीर व कुछ तो लाइलाज बीमारियां होती हैं, जो महिलाओं को ज्यादा प्रभावित करती हैं। इन्हें इलाज के जरिए पूरी तरह ठीक नहीं किया जा सकता है। चिकित्सकों के अनुसार भारत में करीब 25 फीसदी आबादी इन बीमारियों से जूझ रही है। इससे शरीर में सूजन, लगातार दर्द और कई अंगों को लम्बी अवधि में ज्यादा नुकसान हो सकता है। इन बीमारियों का पता लगाने में न केवल मुश्किल होती है, बल्कि इसका उपचार भी कठिन होता है। अगर सही समय पर इलाज न मिले तो विकलांगता या कुछ मामलों में जानलेवा स्थिति भी बन सकती है।
महिलाएं ज्यादा प्रभावित
एक बड़े चिकित्सक ने बताया कि रूमेटॉयड आर्थराइटिस, ल्यूपस और सोरियाटिक आर्थराइटिस जैसी बीमारियां रिप्रोडक्टिव उम्र वाली महिलाओं को ज्यादा प्रभावित कर रही हैं। ऑटोइम्यून बीमारियां लगातार बुखार, अनियंत्रित वजन घटने और जोड़ों में दर्द के रूप में नजर आती हैं। हालांकि कई बार इन समस्याओं को नजरअंदाज कर दिया जाता है। चिकित्सक ने ऑटोइम्यून बीमारियों की जल्द पहचान पर जोर देते हुए कहा कि रूमेटिक बीमारियों का कोई स्थाई इलाज नहीं है, लेकिन सही ट्रीटमेंट से इन्हें मैनेज किया जा सकता है। महानगरों व अन्य शहरों में बढ़ते प्रदूषण और आनुवंशिक कारकों को भी रूमेटिक बीमारियों के प्रमुख कारणों में शामिल किया जाता है।
अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड व ड्रिंक्स ज्यादा खतरनाक
मोटापे या तोंदियल शरीर का कारण अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड और ड्रिंक्स को सबसे ज्यादा माना जा रहा है। पिछले दो दशकों में इन पदार्थों की बिक्री में सबसे ज्यादा वृद्धि हुई है। यदि समय रहते इस ओर ध्यान नहीं दिया गया तो एक बड़ी आबादी गंभीर बीमारियों की गिरफ्त में होगी। इसके अलावा दिनभर बैठकर काम करना, नींद की कमी व तनाव तथा फिजिकल एक्टिविटी में कमी भी इसके प्रमुख कारण हैं। चिकित्सक कहते हैं हमें भोजन संबंधी आदतें सुधारनी होगी। तला-भुना, चीनी, मैदा कम करने के साथ ही फाइबर, फल और सब्ज़ी ज़्यादा लेनी चाहिए। इसके अलावा प्रतिदिन आधा से पौन घंटा शारीरिक व्यायाम जरूरी है, ताकि शरीर में रोग प्रतिरोधात्मक शक्ति बढ़ सके और शरीर में हर वक्त ताजगी व सक्रियता बनी रह सके।
मेटाबाॅलिक डिजीज का पहला लक्षण
अतः हमें ये मान लेना होगा कि तोंद सिर्फ एक फैट डिपॉजिट नहीं है, बल्कि ये मेटाबॉलिक डिजीज का पहला लक्षण है। कई लोग नॉर्मल वज़न के बावजूद हल्की तोंद के कारण भी बीमार हो जाते हैं। ऐसे में बचपन से ही बच्चों को सही खानपान की शिक्षा देने के साथ ही हल्का व्यायाम उनकी आदत में डालना चाहिए। हकीकत में यदि अभी से हम इस ओर ध्यान नहीं देंगे तो आने वाले समय में तोंद की समस्या नासूर बन जाएगी। इसी कारण डायबिटीज और हार्ट डिजीज जैसी बीमारियों पर काबू पाना मुश्किल होगा।






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