ना उम्मीद नजर आती, ना इंतजार छोड़ा जाता
वर्ष 2001 में जालोर-फालना रेल लाइन सर्वे के तहत कानीवाड़ा, भैंसवाड़ा, आहोर, गंगावा, उम्मेदपुर, बेदाना, तखतगढ़, धुलेना और सांडेराव स्टेशन बनने थे। इस सर्वे पर करीब 17 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके...

कब पूरा होगा जालोर-फालना रेल लाइन का सपना
जालोर। ‘तेरी आने की क्या उमीद मगर कैसे कह दूं कि इंतिजार नहीं’, शायर फिराक गोरखपुरी का यह शेर जालोर से फालना रेलवे ट्रैक पर इतना सटीक बैठ रहा है कि ना तो कोई उम्मीद नजर आ रही है और ना ही इंतजार छोड़ा जा रहा है। सबसे बड़ी बात यह है कि इंतजार करते-करते 25 वर्ष बीत चुके हैं। वर्ष 2001 में जालोर फालना रेल लाइन सर्वे के तहत 9 स्टेशन बनने थे, लेकिन 25 वर्ष बाद भी जालोर से फालना तक रहने वाले लाखों लोगों की उम्मीदों को अभी तक पंख नहीं लगे हैं। सर्वे के नाम पर करोड़ों रुपए खर्च किए जा चुके हैं। धरातल पर अभी तक एक पत्थर भी नहीं रखा गया। चौंकाने वाली बात यह है कि अगर समय रहते यह सिंगल रेल पटरी का प्रोजेक्ट पूरा हो जाता तो आज यह लाइन विद्युतीकृत होकर जालोर के ग्रेनाइट उद्योग को दिशा देने में एक नया इतिहास लिखती।
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अगर इतिहास के पन्नों को पलटने और टटोलने की कोशिश करें तो सिर्फ एक बात याद आती है कि तीन-तीन सर्वे करने और एक राशि आंकने के बावजूद अभी तक लोगों के हाथ निराशा ही लगी है। इसे चाहे जालोर से फालना के अब तक रहे सांसद-विधायकों और अन्य प्रभावशाली रहे राजनेताओं की कमी माने या एक जन आंदोलन का अभाव। रेलवे कंस्ट्रक्शन डिपार्टमेंट ने एक बार तो जालोर-फालना रेल लाइन के लिए 459.26 करोड़ रुपए आंका था। बाद में फरवरी 2014 में रेलवे की इंजीनियरिंग टीम ने इस प्रोजेक्ट का रिवाइज सर्वे किया, जिसमें लैंड कोस्ट में अंतर आने से यह प्रोजेक्ट 459 करोड़ से कटकर 390 करोड़ रुपए आंका गया। रिवाइज प्रोजेक्ट भी रेलवे हेडक्वार्टर को भेजा गया जो आज तक वित्तीय स्वीकृति के लिए इंतजार में है।
नौ स्टेशनों का किया था सर्वे
वर्ष 2001 में जालोर-फालना रेल लाइन सर्वे के तहत कानीवाड़ा, भैंसवाड़ा, आहोर, गंगावा, उम्मेदपुर, बेदाना, तखतगढ़, धुलेना और सांडेराव स्टेशन बनने थे। इस सर्वे पर करीब 17 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं। तत्कालीन रेल मंत्री ममता बनर्जी के विजन के तहत इस रेल लाइन के लिए सर्वे हुआ था और रेलवे कंस्ट्रक्शन डिपार्टमेंट ने इस रेल लाइन के लिए प्रोजेक्ट तैयार कर हेड क्वार्टर भिजवाया था। इस 72 किलोमीटर रेल खंड के बीच कई ओवरब्रिज और रेलवे अंडर ब्रिज भी प्रस्तावित थे।
रेट ऑफ़ रिटर्न आया था नेगेटिव
सर्वे रिपोर्ट के बाद रेलवे की ट्रैफिक ऑफिसर सेल (सीटीओ) टीम ने इस रूट का निरीक्षण कर रेट ऑफ रिटर्न भी निकाला था, जो नेगेटिव आया था। यह टीम ट्रैक की भौगोलिक स्थिति और अंर्निग सोर्स का आकलन करती है। इस क्षेत्र के लिए क्वारी का कार्य भी पूरा हो चुका था, लेकिन न जाने कहां कमी रही जो 25 वर्ष बीतने के बावजूद भी जालोर फालना रेल लाइन का यहां के लोगों को इंतजार है।
इनके कंधों पर उम्मीदों का भार
जालोर विधायक और राजस्थान विधानसभा के मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग और आहोर विधायक छगनसिंह राजपुरोहित के कंधों पर लोगों की उम्मीदों का भार है। गर्ग तो पिछले काफी समय से जालोर-फालना रेल लाइन के लिए पैरवी करने वाले मुख्य लोगों में से एक है। समय-समय पर उन्होंने इस रेल लाइन से होने वाले फायदों को उजागर किया है। वही इस रेल लाइन से जालोर जिले की पूरी आहोर विधानसभा जुड़ी हुई है। आहोर के लगभग सभी गावों को इस रेल लाइन से बहुत अधिक फायदा है। ऐसे में आहोर विधायक राजपुरोहित पर भी इस रेल लाइन की पैरवी करने की बहुत बड़ी जिम्मेदारी बनती है।
फालना से जुड़ने के बाद मिल सकेंगी अधिक यात्री गाड़ियां
फालना से जुड़ाव होने के बाद अधिक यात्री गाड़ियां मिलने की संभावना है। साथ ही जालोर समेत आसपास का पूरा क्षेत्र उत्तर भारत से जुड़ सकेगा। यह ट्रैक दिसावर में काम करने वाले लाखों लोगों के लिए भी काफी महत्वपूर्ण है। राजस्थान की राजधानी जयपुर और भारत की राजधानी दिल्ली के साथ-साथ पूरे उत्तरप्रदेश, बिहार, उत्तरांचल, उत्तराखंड, हरियाणा, मध्यप्रदेश से कनेक्टिविटी भी जुड़ सकती है।






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