रंगों का वैश्विक स्पर्श
होली का उत्सव केवल रंगों का खेल नहीं है। यह विविध संस्कृतियों को जोड़ने वाला मानवीय सेतु है। जहां रंग सीमाएं मिटाते हैं और हृदयों में अपनत्व तथा वैश्विक आत्मीयता का भाव जगाते...

जहां रंग सीमाएं पिघलाते हैं और दिलों को जोड़ते हैं
हरीश मलिक,
लेखक और स्तंभकार
Table Of Content
- जहां रंग सीमाएं पिघलाते हैं और दिलों को जोड़ते हैं
- अमेरिका: न्यूयॉर्क से कैलिफोर्निया तक ‘फेस्टिवल ऑफ कलर्स’
- नेपाल: रंगों में घुलता भारतीय अध्यात्म
- ब्रिटेन: लंदन और लीसेस्टर में गुलाल की गूंज
- ऑस्ट्रेलिया: समुद्र तटों पर होली की उमंग
- कनाडा: बहुसांस्कृतिक समाज में भारतीय रंग
- मॉरीशस: जहां होली है राष्ट्रीय उत्सव
- फिजी और सूरीनाम: विरासत की जीवंत स्मृति
- जर्मनी और फ्रांस: यूरोप में रंगों का कार्निवल
- दक्षिण अफ्रीका: विविधता और समरसता का पर्व
- इन देशों में भी खूब होती है रंगारंग होली की धूम
- इन देशों में होली जैसा त्योहार मनाने की भी परंपरा
- कंबोडिया: चोल च्नाम थ्मे
- फिलीपींस: मास्कारा फेस्टिवल
- इटली: द ऑरेंज बैटल
- थाईलैंड: सोंगक्रान
- जापान: हनामी
- स्पेन: ला टोमाटीना
- भारत की होली और वैश्विक रंगोत्सव
ब्रज की गलियों में जन्मी होली आज केवल भारत की सांस्कृतिक पहचान नहीं रही, बल्कि यह एक वैश्विक उत्सव बन चुकी है। प्रेम, समरसता और रंगों का यह पर्व अब महाद्वीपों की सीमाएं पार कर अमेरिका की सड़कों, यूरोप के चौकों, ऑस्ट्रेलिया के समुद्र तटों और अफ्रीका की बस्तियों तक अपनी रंगारंग खुशबू बिखेर रहा है। जहां कभी होली केवल भारतवासियों का पर्व माना जाता था, आज वही दुनिया के अनेक देशों में स्थानीय संस्कृति से घुल-मिलकर नए रंगों में खिल रही है। इन देशों ने होली को अपने अंदाज में अपनाया है। कहीं यह आध्यात्मिक उत्सव है, तो कहीं म्यूजिक कार्निवल और कहीं प्रवासी स्मृतियों का खुशनुमा पुनर्मिलन भी है। रंगों की यह वैश्विक यात्रा बताती है कि भारत केवल भाव-भूमि की धरती नहीं, बल्कि भावनाओं का विस्तार भी है। और होली उस विस्तार की सबसे रंगीन और खुशनुमा अभिव्यक्ति है।
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भारत की होली केवल एक पर्व नहीं, भावनाओं का विस्फोट है। प्रेम का आलिंगन, वैर का विसर्जन और जीवन के रंगों का उत्सव। लेकिन यह जानकर आश्चर्य होता है कि दुनिया के कई देशों में भी होली जैसी परंपराएं हैं, जहां लोग रंग, पानी, फूल, फल या मुस्कान के जरिए जीवन के इस रंगायन का स्वागत करते हैं। हर सभ्यता ने अपने ढंग से बसंत का अभिनंदन किया है। कहीं पानी से, कहीं फूलों से, कहीं टमाटरों से तो कहीं संतरे बरसाकर। विदेशों में होली केवल रंगों का खेल नहीं, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक सॉफ्ट पावर का जीवंत उदाहरण भी है। इसमें अब केवल भारतीय ही नहीं, बल्कि हर रंग, हर नस्ल और हर धर्म के लोग शामिल हो रहे हैं। बसंत के इर्द-गिर्द आने वाला मिलन का यह पर्व बता रहा है कि उत्सव की भाषा सार्वभौमिक होती है।
आज ब्रज की होली दुनिया को यह सिखा रही है कि जीवन रंगों से ही सुंदर है। जब गुलाल उड़ता है, तो सीमाएं धुंधली पड़ जाती हैं। जब ढोलक पर थाप बजती है, तो दिलों की दूरियां मिटने लगती हैं। शायद यही होली का सबसे बड़ा संदेश है- हम सब एक हैं। यह पर्व अब महासागरों को पार कर दुनिया के कई कोनों में प्रेम, सौहार्द और सांस्कृतिक संवाद का माध्यम बन चुका है। आइए, जानते हैं कि ब्रज के ये रंग विदेशों की किन फिजाओं में घुल-मिल रहे हैं…
अमेरिका: न्यूयॉर्क से कैलिफोर्निया तक ‘फेस्टिवल ऑफ कलर्स’
अमेरिका में होली खासतौर पर न्यूयॉर्क, सैन फ्रांसिस्को, लॉस एंजेलिस, मैनहट्टन, टेक्सास के ऑस्टिन और न्यू जर्सी में बड़े स्तर पर खेली जाती है। प्रोवो(यूटा) में आयोजित ‘फेस्टिवल ऑफ कलर्स’ सबसे प्रसिद्ध है, जहां हजारों लोग सफेद कपड़ों में रंग उड़ाते हैं। भारतीय प्रवासी समुदाय के साथ-साथ अमेरिकी भी टाइम्स स्क्वायर की होली में शामिल होते हैं। मंदिर परिसरों, विश्वविद्यालयों और खुले पार्कों में ‘फेस्टिवल ऑफ कलर्स’ के नाम से आयोजित होली कार्यक्रमों में योग, भजन, भारतीय भोजन और रंगों की बारिश इसे मल्टीकल्चरल कार्निवल बनाती है।
नेपाल: रंगों में घुलता भारतीय अध्यात्म
नेपाल में विशेष रूप से काठमांडू घाटी, भक्तपुर और पोखरा में भव्य रूप से रंगों की बौछार होती है। बसंतपुर दरबार स्क्वायर रंगों से भर जाता है। यहां होली केवल हिंदू पर्व नहीं, बल्कि सामाजिक मेल-जोल का उत्सव बन चुकी है। नेपाल में होली पर युवा वाटर गन और गुलाल लेकर सड़कों पर निकलते हैं और फागुन की मस्ती में सराबोर होते हैं। होली सिर्फ हिंदुओं तक सीमित नहीं, बल्कि अब बौद्ध और ईसाई समुदाय भी इसमें शामिल हैं।
ब्रिटेन: लंदन और लीसेस्टर में गुलाल की गूंज
लंदन, लीसेस्टर और बर्मिंघम में होली भारतीय संस्कृति का जीवंत प्रतीक बन चुकी है। यहां के प्रसिद्ध ट्राफलगर स्क्वायर और पार्कों में हजारों लोग रंगों के साथ झूमते नजर आते हैं। यहां भारतीय, पाकिस्तानी, नेपाली और ब्रिटिश नागरिक मिलकर रंग खेलते हैं। ‘लंदन होली फेस्टिवल’ में डीजे म्यूजिक, कथकली प्रस्तुति और देसी खाने के स्टॉल लगते हैं। यह पर्व ब्रिटेन में भारत की पहचान का खास उत्सव बन चुका है।
ऑस्ट्रेलिया: समुद्र तटों पर होली की उमंग
सिडनी और मेलबर्न में होली अब बीच फेस्टिवल का रूप ले चुकी है। सिडनी के पररामट्टा पार्क और मेलबर्न के फेडरेशन स्क्वायर में होली समुद्र तटीय उत्सव बन गई है। यहां रंगों के साथ लाइव कॉन्सर्ट और डांस पार्टियां आयोजित होती हैं। ऑस्ट्रेलियाई युवा इसे “इंडियन कलर पार्टी” कहते हैं, जिसमें बॉलीवुड बीट्स पर हजारों लोग झूमते हैं।
कनाडा: बहुसांस्कृतिक समाज में भारतीय रंग
टोरंटो के जेरार्ड स्ट्रीट और वैंकूवर के सरी इलाके और अन्य शहरों में होली प्रवासी भारतीयों के साथ अन्य समुदायों को भी जोड़ रही है। संगीत, बॉलीवुड नृत्य, भंगड़ा और रंगों के साथ यहां होली सामूहिक सौहार्द का संदेश देती है। यहां पंजाब मूल के लोग होली-दीवाली को अद्भुत अंदाज में मनाते हैं। बच्चों के लिए अलग रंग जोन, बुजुर्गों के लिए भजन मंडली और युवाओं के लिए डांस फ्लोर, यहां हर वर्ग होली पर्व को उल्लासित मन से मनाता है।
मॉरीशस: जहां होली है राष्ट्रीय उत्सव
मॉरीशस में होली राष्ट्रीय त्योहार जैसा मनाया जाता है। मॉरीशस में होली पोर्ट लुई, फ्लैक और त्रियोलेट में पारंपरिक पूजा के साथ मनाई जाती है। यहां सड़कों पर रंगों की बहार दिखाई देती है। भोजपुरी गीतों और पारंपरिक नृत्य के साथ होली आत्मीयता का प्रतीक बन चुकी है। कई स्कूलों में छुट्टी रहती है, लोग एक-दूसरे के घर जाकर मिठाइयां बांटते हैं और भोजपुरी फाग गाए जाते हैं।
फिजी और सूरीनाम: विरासत की जीवंत स्मृति
फिजी और सूरीनाम में बसे भारतीय मूल के लोग होली को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़कर रखते हैं। यहां होली पारंपरिक पूजा, भजन और सामूहिक भोज के साथ खेली जाती है। यहां पर यह पर्व प्रवासी इतिहास की भावनात्मक याद और जीवंत स्मृति है। भारतीय मूल के लोग पारंपरिक ढोलक और चौताल के साथ होली मनाते हैं। यहां होली प्रवासी इतिहास की जीवंत स्मृति है।
जर्मनी और फ्रांस: यूरोप में रंगों का कार्निवल
बर्लिन, हैम्बर्ग और फ्रैंकफर्ट में होली डीजे फेस्टिवल का रूप ले चुकी है। ‘Holi Open Air’ जैसे आयोजनों ने यूरोप को भारतीय रंगों से परिचित कराया है। हजारों युवा डीजे म्यूजिक के साथ गुलाल उड़ाते हैं। यहां होली आधुनिक संगीत और भारतीय परंपरा का अनोखा संगम बन गई है। पेरिस के Parc de Sceaux सार्वजनिक पार्क में होली भारतीय दूतावास और सांस्कृतिक संगठनों द्वारा आयोजित होती है।
दक्षिण अफ्रीका: विविधता और समरसता का पर्व
डरबन और जोहान्सबर्ग में होली भारतीय समुदाय के साथ अफ्रीकी नागरिकों को भी जोड़ती है। यहां यह पर्व नस्लीय भेदभाव से ऊपर उठकर समानता का संदेश भी देता है। यहां होली नस्लीय सीमाओं को मिटाती है। यहां भारतीय और अफ्रीकी समुदाय मिलकर धूम मचाते हैं।
इन देशों में भी खूब होती है रंगारंग होली की धूम
ब्राजील के रियो डी जेनेरो का कार्निवल नृत्य, रंग और संगीत का महासागर है। यहां शरीर नहीं, आत्मा नाचती है। मलेशियाई हिंदू अपने देश में इसे पारंपरिक रूप से मनाते हैं। सिंगापुर में हिंदू धर्म के अनुयायी होली के रंग खेलते हैं। पाकिस्तान के कुछ हिस्सों में जैसे सिंध और बलूचिस्तान में हिंदू समुदाय द्वारा होली को पारंपरिक रूप से मनाया जाता है। इंडोनेशिया में बड़ी मुस्लिम आबादी है, लेकिन यहां बाली जैसे हिंदू बहुल इलाकों में होली का उत्सव धूम-धाम से मनाया जाता है। यूएई और सउदी अरब में विविधता का सम्मान किया जाता है और यहां भारतीय हिंदू समुदाय के लोग होली खेलते हैं।
इन देशों में होली जैसा त्योहार मनाने की भी परंपरा
होली सिखाती है कि नफरत पर प्रेम, दूरी पर अपनापन और विभाजन पर उत्सव भारी है। शायद इसी वजह से, जब दुनिया थक जाती है संघर्षों से, तब भारत के रंग उसे फिर मुस्कराना सिखा देते हैं। यही होली की असली जीत है। यही भारत के सांस्कृतिक पर्व की शक्ति। कई देशों में होली जैसा त्योहार मनाने की भी परंपरा है। यहां विविध रूपों में अलग-अलग तरीकों से उत्सव मनाते हैं। इन देशों में होली जैसा त्योहार मनाने की परंपरा है।
कंबोडिया: चोल च्नाम थ्मे
कंबोडिया में होली जैसा त्योहार चोल च्नाम थ्मे (Chol Chnam Thmey) मनाया जाता है। इस मौके पर लोग पारंपरिक पोशाक पहनकर एक-दूसरे पर पानी डालते हैं, मंदिरों में प्रार्थना करते हैं और लोकनृत्य करते हैं। यह पर्व पुराने दुखों को धोकर नई शुरुआत का प्रतीक है। ठीक वैसे ही जैसे होली दिलों की सफाई करती है। यहां यह अप्रैल के मध्य में मनाया जाता है।
फिलीपींस: मास्कारा फेस्टिवल
मास्कारा (Masskara) त्योहार फिलीपींस के बैकोलोड शहर में हर साल अक्टूबर में होता है। इस त्योहार को “मुस्कान का त्योहार” भी कहा जाता है। यहां रंग चेहरे पर नहीं, बल्कि मुखौटों और पोशाकों में खिलते हैं। यह फिलीपींस के बड़े त्योहारों में से एक है। इसमें लोग रंगीन मुखौटे पहनकर सड़कों पर उतरते हैं और नृत्य, परेड और पार्टियां आदि करते हैं।
इटली: द ऑरेंज बैटल
इटली में भी भारत जैसा होली पर्व होता है, जिसे ऑरेंज बैटल (Battle of Oranges) कहा जाता है। फरवरी-मार्च के महीने में मनाए जाने वाले इस त्योहार में लोग आपस में रंग ही नहीं लगाते, बल्कि एक-दूसरे पर संतरे भी फेंकते हैं। यह होली की तरह सामूहिक उल्लास का प्रतीक है। कार्निवल ऑफ वेनिस भी वेनिस में आयोजित होने वाला एक अनोखा वार्षिक उत्सव है, जो अपनी रंग-बिरंगी वेशभूषा, राजसी परिधानों और मुखौटों के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है। फरवरी-मार्च में आयोजित यह उत्सव कल्पना और रंगों की दुनिया रच देता है।
थाईलैंड: सोंगक्रान
अप्रैल में मनाया जाने वाला सोंगक्रान नववर्ष का प्रतीक है। लोग सड़कों पर पानी फेंकते हैं। यह आत्मशुद्धि और सौभाग्य का संकेत माना जाता है।
जापान: हनामी
टोक्यो में होली सीमित लेकिन बेहद सुसंस्कृत ढंग से मनाई जाती है। बसंत ऋतु में जापान सुंदर गुलाबी रंग के चेरी ब्लॉसम फूलों से ढक जाता है। इन दिनों प्राकृतिक खूबसूरती का जश्न मनाने के लिए ही यह त्योहार है। इसे चेरी ब्लॉसम फेस्टिवल भी कहा जाता है। जापानी में हनामी का मतलब होता है- फूल देखना। योग और ध्यान के साथ होली यहां आध्यात्मिक अनुभव बन जाती है।
स्पेन: ला टोमाटीना
टमाटरों की प्रसिद्ध होली (ला टोमाटीना) मुख्य रूप से स्पेन के वेलेंशियाई शहर बुनोल में मनाई जाती है, जो अगस्त माह में होती है। स्पेन में यह त्योहार 1945 से मनाया जा रहा है, जहां लोग एक-दूसरे पर टमाटर फेंकते हैं। टमाटर को फेंकने से पहले मसलना जरूरी होता है, ताकि किसी को चोट न लगे। यह एक अंतरराष्ट्रीय त्योहार है। कोलंबिया के सुतामारचन में भी यह उत्सव मनाया जाता है। इसके अलावा, भारत में राजस्थान के डूंगरपुर के सागवाड़ा और डेंडोरवाड़ा में 100 साल से अधिक पुरानी टमाटर होली की परंपरा है। टमाटर की इस तरह की होली खेली जाती है, जिसे वहां ‘टमाटर राड़’ कहते हैं।
भारत की होली और वैश्विक रंगोत्सव
हर सभ्यता ने अपने ढंग से बसंत का अभिनंदन किया है, कहीं पानी से, कहीं फूलों से, कहीं टमाटरों से तो कहीं संतरे बरसाकर। दुनिया के किसी भी कोने में जब लोग हंसते हुए रंग उछालते हैं, तब सीमाएं मिट जाती हैं। तब केवल मनुष्य बचता है। उल्लास से भरा हुआ, प्रेम से पगा हुआ। शायद यही कारण है कि ब्रज की होली आज वैश्विक उत्सव बन चुकी है। यह सिखाती है कि रंग अलग हो सकते हैं, पर खुशियां एक जैसी होती हैं। यही होली की शक्ति है और यही भारत की सांस्कृतिक सौगात।






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