उद्घाटन से पहले आगजनी ने उठाए सुरक्षा और तैयारियों पर गंभीर सवाल
एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी लिमिटेड पचपदरा देश को समर्पित होने से महज बीस घंटे पहले आग की लपटों के साथ सवालों से घिर गई। रिफाइनरी की राह अग्निपथनुमा होने के कारण न केवल देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को 21 अप्रैल को प्रस्तावित अपना पचपदरा दौरा स्थगित करना पड़ा, बल्कि रिफाइनरी निर्माण का जिम्मा संभाल रही एचपीसीएल को अपना मुंह खोलने में छह दिन का समय लग गया। 20 अप्रैल को हुई आगजनी की घटना के ठीक छठे दिन एचपीसीएल ने एक बयान जारी कर बताया कि प्रेसर गेज प्वाइंट में रिसाव के चलते क्रूड डिस्टीलेशन यूनिट में आग लग गई। एचपीसीएल के इस आधिकारिक बयान के बाद अटकलों पर विराम लगा। अब उम्मीद की जा रही है कि जून के पहले पखवाड़े में प्रधानमंत्री के आगमन का कार्यक्रम बनेगा और एशिया की सबसे बड़ी रिफाइनरी राष्ट को समर्पित कर दी जाएगी।
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बाड़मेर में क्रूड ऑयल की खोज के करीब एक दशक बाद वर्ष 2010 के आस-पास बाड़मेर जिले में रिफाइनरी को लेकर हलचल शुरू हुई। रिफाइनरी के लिए जमीन चिन्हित करने में करीब तीन वर्ष का समय लग गया। वर्ष 2013 में तत्कालीन यूपीए सरकार की अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी ने पचपदरा में रिफाइनरी की नींव का पत्थर रखा, लेकिन धरातल पर कामकाज शुरू होने से पहले ही केन्द्र में यूपीए सरकार व राज्य में कांग्रेसनीत सरकार की विदाई हो गई। केन्द्र में एनडीए सरकार व राज्य में भाजपानीत सरकार आने के बाद एक बार फिर से रिफाइनरी का शिलान्यास देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हाथों हुआ। 4500 एकड़ में फैली रिफाइनरी की आरंभिक लागत करीब 40 हजार करोड़ रुपए आंकी गई, लेकिन समय पर काम शुरू नहीं होने व काम शुरू होने के बाद कार्य की गति धीमी होने के कारण कार्यपूर्णता तक रिफाइनरी की लागत ठीक दुगुनी 80 हजार करोड़ रूपए हो गई है। रिफाइनरी में राजस्थान सरकार की भागीदारी 26 प्रतिशत है। रिफाइनरी में तेलशोधन आरंभ होने के बाद राज्य को प्रतिवर्ष करीब पांच हजार करोड़ रूपए की आय होगी।
आग की लपटों के साथ उठे सवाल
अप्रैल माह के आरंभ में रिफाइनरी के उदघाटन की तैयारियां शुरू हो गई। उद्घाटन की तिथि 21 अप्रैल से ठीक पहले 20 अप्रैल तक लगभग सभी प्रकार की तैयारियां पूर्ण कर ली गई। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, राज्य के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास व एचपीसीएल के उच्चाधिकारियों सहित सभी स्तर के सक्षम अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों ने रिफाइनरी का जायजा लिया। उद्घाटन अवसर पर करीब दो लाख लोगों के बैठने की व्यवस्था की गई। कार्यक्रम को भव्य बनाने के लिए करोड़ों रुपए खर्च किए गए, लेकिन 20 अप्रैल को दोपहर में रिफाइनरी की एक यूनिट से काले धुंए के गुबार व आग की लपटें उठती हुई दिखाई दी। क्रूड डिस्टीलेशन यूनिट में लगी इस आग को बुझाने के लिए करीब दो घंटे का समय लगा। तीन हजार करोड़ रुपए की लागत से बनी इसी यूनिट का प्रधानमंत्री को उद्घाटन करना था। इस यूनिट पर पिछले कई महीनों से करीब दो हजार अधिकारी कर्मचारी व श्रमिक काम कर रहे थे। गनीमत यह रही कि हादसा लंच के समय और उदघाटन अवधि से पहले हुआ, जिससे कोई जनहानि नहीं हुई। फिर भी आग की इन लपटों ने कई सवालों को जन्म दिया। सबसे अहम सवाल यह कि क्या उद्घाटन की तिथि जल्दबाजी में तय की गई, जिसके चलते कार्य तेज गति से करने का दवाब बन गया, परिणामस्वरूप हादसा हो गया। रिफाइनरी नवीनतम व उच्च तकनीकयुक्त होने के बावजूद हादसा कैसे हो गया। बताया जा रहा है कि हादसे से पहले अलार्म सिस्टम ने अपना काम नहीं किया, जिसके चलते प्रेशर गेज प्वांइट पर हाइडोकार्बन का रिसाव हुआ और हादसा हो गया। इसके अलावा अटकलबाजियां यहां तक हुई कि साइबर अटैक हो गया, प्रधानमंत्री सुरक्षा के नजरिए से भी कई सवाल खड़े हुए। लिहाजा एनआईए को जांच के लिए आना पड़ा।
9 मिलियन मीटिक टन तेलशोधन
पचपदरा रिफाइनरी की तेलशोधन क्षमता सालाना करीब नौ मिलियन मीटिक टन की है। इसमें से डेढ़ मिलियन मीटिक टन क्रूड बाड़मेर के ही मंगला ऑयल फील्ड से यहां पहुंचेगा। पचपदरा व मंगला ऑयल फील्ड नागाणा के बीच 47 किलोमीटर लम्बी पाइपलाइन बिछाई गई है, इसी से क्रूड यहां पहुंचेगा। वहीं साढ़े सात मिलियन मीटिक टन क्रूड रूस व खाड़ी देशों से आयात होकर मुंद्रा पोर्ट से पाइपलाइन से पचपदरा आएगा। पचपदरा से मुंद्रा के बीच में 487 किलोमीटर लम्बी पाइपलाइन बिछी हुई है। पचपदरा रिफाइनरी से तेलशोधन के बाद पाइपलाइन से ही इसे गुजरात के पालनपुर टर्मिनल तक पहुंचाया जाएगा, जिसे यहां से यूरोप सहित दुनिया भर के 106 देशों को निर्यात किया जाएगा।
बीती ताहि बिसार दे, आगे की सुध लेय
रिफाइनरी में आग की घटना से निश्चित रूप से सबक लिया गया है। विभिन्न एजेन्सियों की जांच के बाद जो रिपोर्ट आएगी, उसके बाद जिम्मेवारों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी, लेकिन इससे पहले ही आगजनी से क्षतिग्रस्त हुई यूनिट का काम पुनः शुरू कर दिया गया है। एचपीसीएल का कहना है कि मई महीने के दूसरे पखवाड़े में मुख्य उत्पादों का परीक्षणात्मक उत्पादन शुरू कर दिया जाएगा। इस कार्य में टाटा सहित विश्वभर की आधा दर्जन से अधिक कम्पनियां अपने-अपने काम लग गई है। रिफाइनरी की अन्य इकाइयां की कमीशनिंग उन्नत चरण में है। ऐसे में संभावना है कि जून महीने के प्रथम पखवाड़े में रिफाइनरी देश को समर्पित की जाएगी और एक जुलाई से यह रिफाइनरी युद्ध स्तर पर पूर्ण क्षमता के साथ तेलशोधन शुरू कर देगी।







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