कोटा में पढ़ाई करने का लेवल सबसे अलग
अरविंद गुप्ता,
पत्रकार, लेखक
Table Of Content
- कोटा में पढ़ाई करने का लेवल सबसे अलग
- चारों ओर नये सत्र की रौनक
- जहां जाओ, बच्चे पढ़ते हुए मिलते हैं…
- नीट के लिए यहां नेशनल कॉम्पिटीशन
- ईको सिस्टम- कोटा, कोचिंग, केयरिंग
- स्टूडेंट इमोशनल वेलबिंग सेंटर
- कोचिंग विद्यार्थियों के साथ बच्चों जैसा अपनत्व
- निर्धारित गाइडलाइन की अनुपालना
- शहरवासी करते हैं एडवांस लेवल केयरिंग
- कोचिंग विद्यार्थियों को परिवार जैसा स्नेह
- नया सत्र- नया विश्वास
- कोटा के रिजल्ट ने सबका विश्वास जीता है
- साइंस की खुशबू देता है कोटा
चंबल नदी किनारे बसा एक शहर कोटा। लगभग 15 लाख की आबादी। प्रतिवर्ष डेढ़ से दो लाख से अधिक विद्यार्थियों की हलचल इसकी पहचान है। क्लासरूम कोचिंग का सबसे प्रभावी इको सिस्टम है यहां। एक ही छत के नीचे नेशनल कॉम्पिटीशन मिल जाने से बच्चों की परफॉर्मेंस में निरंतर सुधार। यही वजह है कि राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षाओं के रिजल्ट में प्रतिवर्ष कोटा कोचिंग से सफलता का स्वर्णिम अध्याय जुड़ रहा है। जेईई-मेन, एडवांस्ड और नीट-यूजी के लिए दो से तीन साल कोटा में रहकर अपने लक्ष्य के लिए निरंतर पढ़ाई करने वाले कोचिंग विद्यार्थी यहां नेशनल कॉम्पिटिशन जैसा स्वस्थ शैक्षणिक वातावरण महसूस करते हैं।
इस वर्ष 10वीं एवं 12वी बोर्ड परीक्षाओं के रिजल्ट के बाद अप्रैल माह में विभिन्न राज्यों से कोटा आने वाले विद्यार्थियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। 20 अप्रैल को जेईई-मेन के शानदार रिजल्ट ने कोटा कोचिंग को फिर से नई उंचाइयां दी है। अगले दो माह में जेईई-एडवांस्ड एवं नीट-यूजी प्रवेश परीक्षाएं होंगी। इसके रिजल्ट एवं काउंसलिंग के बाद हजारों विद्यार्थी पसंद की ब्रांच या इंस्टीट्यूट नहीं मिलने पर अपनी रैंक इम्प्रूव करने के लिए एक साल और कोटा में रहकर मेहनत करते हैं। इसे देखते हुए अगस्त-सितंबर तक रिपीटर्स की संख्या भी पहले से अधिक होगी। इस शहर ने विगत 4 दशकों में 30 लाख से अधिक छात्रों और अभिभावकों का विश्वास जीता है। अब तक 10 लाख से डॉक्टर, आईआईटीयन व इंजीनियर कोटा कोचिंग ने दिए हैं।
चारों ओर नये सत्र की रौनक
इस वर्ष नये शैक्षणिक सत्र का आगाज उत्साहजनक है। देश के सभी प्रमुख कोचिंग संस्थानों के मुख्यालय कोटा में हैं। यहां नये विद्यार्थियों के लिए ओरिएंटेशन सत्र आयोजित किए जा रहे हैं, जिसमें उनको कोटा के कोचिंग सिस्टम की जानकारी, गाइडेंस एवं प्रवेश परीक्षाओं की प्रतिस्पर्धा में सफल होने की रणनीति एवं सक्सेस मंत्र बताए जा रहे हैं। यहां किशोर उम्र के बच्चे निरंतर मेहनत करते हुए लड़ना और जीतना सीख रहे हैं।
नये शहर में कोचिंग क्षेत्र की सड़कों पर नये विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों की भीड़ दिखने लगी है। कोचिंग संस्थानों में विद्यार्थियों की चहल-पहल बढ़ने से गर्ल्स व ब्वायज हॉस्टल, पीजी, मैस, स्टेशनरी, मोबाइल, साइकिल, ऑटोरिक्शा, रेस्तरां, होटल, फल, जूस, चाट आदि स्थानों पर भी रौनक लौट आई है। पहले चरण में कक्षा-10वीं एवं 11वीं के बाद सैकड़ों विद्यार्थियों व अभिभावकों का बस, ट्रेन व टेक्सियों से यहां आने का सिलसिला जारी है। नये सत्र के लिए चारों दिशाओं में 4 हजार हॉस्टल एवं 20 हजार पीजी कमरों को पूरी तरह तैयार किया गया है। एक अनुमान के अनुसार, ढाई लाख से अधिक कोचिंग विद्यार्थियों के लिए हॉस्टल व पीजी रूम सुविधा उपलब्ध होने से अब विद्यार्थियों को कम किराये पर अच्छे हॉस्टल व रूम उपलब्ध हो सकेंगे।
जहां जाओ, बच्चे पढ़ते हुए मिलते हैं…
पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद से अपनी बेटी दीपा दास को जेईई की तैयारी के लिए कोटा छोड़ने आए सरकारी स्कूल के शिक्षक पोलास दास ने कहा कि कोलकाता के स्कूली बच्चों में शिक्षा के साथ मनोरंजन के साधन ज्यादा है। जबकि यहां सबको पढ़ते हुए देख बच्चे मेहनत से आगे निकल रहे हैं। प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी के लिए क्लासरूम कोचिंग सशक्त माध्यम है, जिसमें बच्चे क्लास में ही डाउट दूर कर लेते हैं।
दादर नागर हवेली के सिलवासा से छात्रा शौर्य रत्नावत जेईई की तैयारी कर रही है। पिता टेक्सटाइल उद्योग में एजीएम विनोद रत्नावत ने कहा कि यहां बच्चों को स्कॉलरशिप के साथ क्वालिटी एजुकेशन मिल रही है। मेरे मित्र का बेटा यहां से आईआईटी में पहुंचा है। उत्तरप्रदेश के बरेली जिले के भौरा टांडा गांव से साफिया आफरिन ने जेईई कोचिंग के लिए प्रवेश लिया। भाई मो.फहाद भी जेईई की पढ़ाई कर रहा है। बिहार के गया जिले के अंगरा गांव से तरवेज अंजुम जेईई-मेन की तैयार करने पहुंचे। पिता सफियन अहमद कहते हैं, इस शहर में जहां जाओ, बच्चे पढ़ते हुए मिलते हैं। उत्तर प्रदेश के मेनपुरी से श्लोक रतन 12वीं पास करके अब जेईई की तैयारी करेगा। बहिन कामिनी ने बताया कि यहां अनुशासन, टीचर्स सपोर्ट और पढ़ाई का माहौल सबसे अच्छा लगा। कुल मिलाकर, सभी विद्यार्थियों की भाषा, रहन-सहन, खानपान सब अलग होते हुए भी वे एक ही लक्ष्य के लिए मिलकर रहना और पढ़ाई करना पसंद करते हैं।
नीट के लिए यहां नेशनल कॉम्पिटीशन
मध्यप्रदेश के सिंगरौली जिले के सरई गांव से सुमित जायसवाल 12वीं के बाद अब नीट-यूजी की तैयारी करेंगे। उसके बड़े भाई हेमंत कोटा से कोचिंग लेकर उप्र के मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस कर रहे हैं। रूचि जायसवाल भी नीट की तैयारी करने कोटा पहुंची। इसी गांव के प्रियांश गुप्ता भी डॉक्टर बनना चाहते हैं। उसके भाई डॉ.प्रदीप गुप्ता ने कोटा कोचिंग से नीट में चयनित होकर एमबीबीएस किया है। जहाजपुर से अनन्या अपनी मां के साथ कोटा में नीट की तैयारी करने पहुंची। श्रीमहावीरजी से 11वीं के छात्र प्रणव शर्मा ने नीट में अच्छी फैकल्टी होने से कोटा को चुना। उसके भाई ने भी यहां एलन से कोचिंग लेकर गत वर्ष एमबीबीएस किया। मप्र के मंदसौर से आकांक्षा और ईशिका दोनों 12वीं के बाद अब कोटा से नीट की कोचिंग लेगी। उन्होंने कहा, हमारे गांव से बहुत बच्चे यहां पढ़ रहे हैं। यहां पढ़ाई का हैल्दी कॉम्पिटीशन है।
ईको सिस्टम- कोटा, कोचिंग, केयरिंग
कोटा शहर अब जाग उठा है, यहां का हर वर्ग नई उड़ान भरने के लिए तैयार है। कोटा स्टूडेंट वेलफेयर सोसायटी ने जिला प्रशासन के साथ मिलकर शिक्षा नगरी कोटा को ‘कोचिंग का मॉडल’ बनाने के लिए ‘कोटा केयर्स’ जैसा अनूठा अभियान प्रारंभ किया। हॉस्टल एसोसिएशन ने इस वर्ष कोचिंग स्टूडेंट्स से हॉस्टल में सिक्यूरिटी राशि व एडवांस राशि नहीं लेने की घोषणा की। ऑटोचालक एसोसिएशन ने कोचिंग स्टूडेंट्स से शहर में 1 किमी की दूरी पर 20 रुपए किराया लेने का निर्णय किया है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने इनडोर व आउटडोर सेवाशुल्क में कोचिंग विद्यार्थियों को 20 प्रतिशत छूट देने की घोषणा की है। पुलिस प्रशासन ने एसओएस एप सुविधा लागू की है, जिसमें पैनिक बटन दबाते ही पुलिस आपकी मदद के लिए पहुंचती है।
स्टूडेंट इमोशनल वेलबिंग सेंटर
एलन कॅरिअर इंस्टीट्यूट के मीडिया प्रभारी नीतेश शर्मा ने बताया कि प्रमुख कोचिंग संस्थान ‘स्टूडेंट इमोशनल वेलबिंग सेंटर’ द्वारा विद्यार्थियों को प्रभावी काउंसलिंग सुविधा उपलब्ध करवा रहे हैं। संस्थानों में योगा शिविर, मोटिवेशनल सत्र, लाइफस्किल सेशन आदि से विद्यार्थी यहां रहते हुए बेहतर महसूस कर रहे हैं। वे एक-दूसरे के साथ नॉलेज शेयरिंग करते हैं। अन्य शहरों की तुलना में कॉस्ट ऑफ लिविंग कोटा में बहुत संतुलित हैं। कोविड महामारी के बाद कोटा में इंफ्रास्ट्रक्चर तेजी से बढ़ा है, इससे शहर के चारों ओर कोचिंग संस्थानों के आसपास ढाई लाख विद्यार्थियों के लिए सुविधायुक्त हॉस्टल्स बनकर तैयार है। कोटा के सभी हॉस्टल, पीजी संचालकों ने कोचिंग विद्यार्थियों के लिए किराये की दरें घटा दी हैं।
इनका कहना है –
कोचिंग विद्यार्थियों के साथ बच्चों जैसा अपनत्व
मेरे संसदीय क्षेत्र कोटा में प्रवेश परीक्षाओं की सर्वश्रेष्ठ कोचिंग लेने के लिए सभी राज्यों से विद्यार्थी और उनके अभिभावक एक विश्वास के साथ आ रहे हैं। शिक्षा नगरी में अनुशासन और शांत शैक्षणिक वातावरण मिलने से छात्राओं को भी पूरी सुरक्षा मिल रही है। शहरवासी कोचिंग विद्यार्थियों के साथ अपने बच्चों जैसा अपनत्व रखते हैं। कोटा में सभी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हैं। सड़क मार्ग व रेल मार्ग से कोटा सभी राज्यों से जुड़ा हुआ है। इसी वर्ष यहां नये ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट की निर्माण कार्य प्रारंभ होने जा रहा है। त्रिपल आईटी, चार यूनिवर्सिटी, मेडिकल कॉलेज एवं इंजीनियरिंग कॉलेज होने से यहां चारों ओर पढ़ाई का वातावरण दिखाई देता है। हम यहां आने वाले सभी विद्यार्थियों के उज्जवल भविष्य की कामना करते हैं।
– ओम बिरला, लोकसभा अध्यक्ष एवं कोटा-बूंदी सांसद।
निर्धारित गाइडलाइन की अनुपालना
कोटा शहर की आबोहवा में सिर्फ पढ़ाई का माहौल है। बाहर से आने वाले कोचिंग विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई, मनपंसद भोजन और ठहरने के लिए सर्वश्रेष्ठ सुविधाएं मिलने से अभिभावक संतुष्ट होकर लौटते हैं। विद्यार्थी प्रवेश परीक्षाओं की प्रतिस्पर्धा में सफल होने के लिए यहां दिन-रात मेहनत करते हैं। राज्य सरकार एवं जिला प्रशासन विद्यार्थियों के हित में कोचिंग संस्थानों एव हॉस्टल संचालकों से निर्धारित गाइडलाइन की अनुपालना कर रहे हैं। शहर का हर वर्ग विद्यार्थियों के प्रति समर्पित है।
– हीरालाल नागर, उर्जा राज्य मंत्री, राजस्थान सरकार।
शहरवासी करते हैं एडवांस लेवल केयरिंग
देश में कोटा इकलौता ऐसा शहर है जहां के नागरिक प्रतिवर्ष डेढ़ लाख से अधिक विद्यार्थियों की मेजबानी करते है, वर्षपर्यंत उनकी परिवार जैसी विशेष केयरिंग करते हैं। किशोर उम्र के बच्चों के लिए मेंटल हैल्थ पर खास ध्यान दिया जा रहा है। कोचिंग फैकल्टी मेंटर के रूप में विद्यार्थियों की संस्थान के बाहर की समस्याओं का भी समाधान कर रहे हैं। शिक्षा नगरी को राज्य सरकार का पूरा सहयोग मिल रहा है। कोटा कोचिंग पर विश्वास कायम करवाने में शिक्षकों को कई वर्ष लगे हैं।
– संदीप शर्मा, विधायक, कोटा दक्षिण
कोचिंग विद्यार्थियों को परिवार जैसा स्नेह
इस वर्ष सभी राज्यों से बड़ी संख्या में विद्यार्थी अपने उज्जवल भविष्य निर्माण के लिए कोटा शहर का चयन कर रहे हैं। उनका कोटा आगमन यहां की उत्कृष्ट शिक्षा प्रणाली की गुणवत्ता और उनके अटूट विश्वास को दर्शाता है। डॉक्टर एवं इंजीनियर बनने का सपना साकार करने के लिए यहां के कोचिंग संस्थान व नागरिक प्रत्येक विद्यार्थी को परिवार के सदस्य जैसा स्नेह देते हैं। मैं स्वयं विभिन्न गतिविधियों कभी डिनर टेबल पर, तो कभी कॉफी टेबल पर कोचिंग विद्यार्थियों से निरन्तर संवाद बनाए रखता हूं। विद्यार्थियों के विचारों को सुनने, समझने और उनकी समस्याओं के समाधान ढूंढने से सुखद अनुभूति होती है।
– पीयूष समारिया, जिला कलक्टर, कोटा
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नया सत्र- नया विश्वास:
– वर्ष 2026-27 में जेईई व नीट की तैयारी के लिए उंची उड़ान
– चार दशकों में 30 लाख से अधिक बच्चों व अभिभावकों ने कोटा कोचिंग पर जताया विश्वास
– क्लासरूम कोचिंग के साथ पर्सनल केयरिंग जैसा इको सिस्टम
– जेईई मेन, एडवांस्ड और नीट- यूजी प्रवेश परीक्षाओं में सर्वश्रेष्ठ रिजल्ट देने में कोटा सबसे आगे
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कोटा के रिजल्ट ने सबका विश्वास जीता है
देश के ब्रांड कोचिंग संस्थान एलन कॅरिअर इस्ंटीट्यूट प्रा.लि. के निदेशक नवीन माहेश्वरी से राजस्थान टूडे के विशेष प्रतिनिधि ने नये शैक्षणिक सत्र पर खास बातचीत की-
सवाल- विद्यार्थी एवं अभिभावकों का कोटा कोचिंग पर इतना विश्वास कैसे?
जवाब- देश में कई बड़े शहर उद्योग, तीर्थस्थल, हैरिटेज, टूरिज्म, प्रकृति, एडवेंचर आदि से अपनी अलग पहचान रखते हैं। लेकिन कोटा इकलौता ऐसा छोटा शहर है जो प्रमुख प्रवेश परीक्षाओं में प्रतिवर्ष सर्वश्रेष्ठ रिजल्ट देकर सबके विश्वास और आस्था का केंद्र बना है। आज सभी प्रवेश परीक्षाओं में कड़ी प्रतिस्पर्धा है। इनके रिजल्ट पर सबकी नजरें टिकी होती है। कोटा कोचिंग का रिजल्ट सबसे आगे दिखाई देता है, क्योंकि यहां के फैकल्टी अच्छा रिजल्ट देने के लिए प्रतिबद्ध होते हैं। बच्चों के बढ़ते विश्वास का यही आधार है।
सवाल- कोटा कोचिंग के इको सिस्टम को नंबर-वन क्यों माना जाता है?
जवाब- यह सच है। कोटा कोचिंग अब एक इको सिस्टम बन चुका है। यहां बातें कम, काम ज्यादा होता है। कोचिंग के 6 घंटे के बाद शेष 18 घंटे में शहर का हर नागरिक कोचिंग विद्यार्थियों के प्रति समर्पित है। राज्य सरकार, जिला प्रशासन, पुलिस सहित हर वर्ग का सहयोग सुरक्षित इको सिस्टम तैयार कर रहा है। अच्छी कोचिंग के लिए सिर्फ कोटा में अनुकूल माहौल है।
सवाल- कोचिंग पढ़ाई के साथ और क्या स्किल दे रहा है?
जवाब- मेहनत करके आगे बढ़ने का स्किल। सबको दिन रात पढ़ाई करते देख बच्चों में और पढ़ाई करने की भूख जागृत हो जाती है, जिससे उनमें आत्मविश्वास आ जाता है। एआई टूल की मदद से वे मोबाइल का सदुपयोग कर रहे हैं। विद्यार्थी कोचिंग में टेस्ट देकर अपनी कमियों का माइक्रो लेवल तक एनालिसिस करते हैं। उनको माई मिस्टेक लिखकर आगे सुधार करना सिखाते हैं। कोटा कोचिंग ने प्रवेश परीक्षाओं में कॉम्पिटीशन का डर दूर कर दिया है। पहले हर गांव से सैनिक निकलते थे, आज हर छोटे गांव से डॉक्टर-इंजीनियर भी निकल रहे हैं।
सवाल- कोचिंग विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए क्या प्रयास हैं?
जवाब- कोटा इकलौता ऐसा शहर है जहां 2006 से पुलिस प्रशासन के साथ मिलकर कम्यूनिटी पुलिस ऑफिसर (सीपीओ) सिस्टम लागू है। इसमें 200 से अधिक जवान 24 घंटे कोचिंग छात्र-छात्राओं की सुरक्षा पर नजर रखते हैं। उनकी मौजूदगी से रोज सुबह 5 से 6 बजे छात्राओं को कोचिंग संस्थान तक पहुंचने के लिए सुरक्षित वातावरण मिल रहा है। संस्थानों में छात्राओं की आत्मरक्षा व आत्मबल बढ़ाने के लिए सेल्फ डिफेंस सत्र भी होते हैं। हॉस्टल्स के लिए गेट कीपर ट्रेनिंग दी जाती है। इसीलिए कोटा शांत व सुरक्षित शहर माना जाता है।
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साइंस की खुशबू देता है कोटा
मोशन एजुकेशन के संस्थापक निदेशक नितिन विजय से राजस्थान टूडे की खास बातचीत-
सवाल- क्लासरूम कोचिंग के लिए कोटा सबसे अलग कैसे है?
जवाब- कोटा की आबोहवा में सिर्फ साइंस की खूशबू है। जैसे गोवा की पहचान टूरिज्म से है वैसे ही कोटा की पहचान सिर्फ अच्छी पढ़ाई से है। देश में कोई भी विद्यार्थी यदि सांइस में कुछ करने का सपना देखता है तो उसके लिए कोटा नंबर वन है। यहां साइंस बेस्ड कॉम्पिटिशन के लिए स्पेशलाइजेशन है।
सवाल- स्कूली पढ़ाई और कोचिंग में बुनियादी फर्क क्या है?
जवाब- हम स्कूली शिक्षा से प्रतिस्पर्धा नहीं कर रहे हैं। कोटा कोचिंग साइंस पर आधारित प्रवेश परीक्षाओं पर फोकस है। प्रवेश परीक्षाओं में रटकर उत्तर नहीं लिखना है, हर सवाल पर सोचकर एक सही विकल्प को चुनना होता है। टॉपिक के कंसेप्ट को समझने के लिए विद्यार्थियों के साथ कोचिंग शिक्षक भी उतनी ही मेहनत कर रहे हैं।
सवाल- हिंदी माध्यम और सरकारी स्कूलों के बच्चों को कोचिंग से लाभ?
जवाब- कोटा कोचिंग ‘बच्चों में मैं क्या कर सकता हूं?’ यह काबिलियत विकसित कर देती है। विद्यार्थी हिंदी मीडियम से हो या गांव के सरकारी स्कूल से, उसे प्रवेश परीक्षाओं के माध्यम से डॉक्टर, आईआईटीयन या इंजीनियर बनने का सपना कोटा कोचिंग ने सच कर दिखाया है। हम मेधावी बच्चों के साथ एवरेज बच्चों के सलेक्शन पर भी उतना ही ध्यान दे रहे हैं।
सवाल- कोचिंग संस्थानों के स्टडी सेंटर कई शहरों में खुले हैं, लेकिन कोटा ही बेस्ट क्यों?
जवाब- देखिये, इस धरती पर क्लासरूम कोचिंग सिस्टम से कई अनुभवी शिक्षाविद जुड़े हैं। परीक्षा पैटर्न चाहे जो हो, कोटा में बच्चों को जो अनुभवी फैकल्टी, स्टडी मैटेरियल, ऑल इंडिया लेवल पर टेस्ट प्रैक्टिस के अवसर मिल रहे हैं, उससे उनको नेशनल कॉम्पिटीशन का माहौल मिलता है। हर स्टडी सेंटर पर सभी राज्यों के विद्यार्थी नहीं हो सकते हैं। इसलिए कोटा का रिजल्ट हर वर्ष अतुलनीय रहता है।







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