विदेशी दृष्टि में सहेजा राजस्थान का सांस्कृतिक दस्तावेज
डा. मुदिता पोपली,
पत्रकार एवं लेखिका
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बीकानेर में मलंग फोक फाउंडेशन द्वारा ‘सेंटर फॉर लाइफ’ में हाल ही में आयोजित ‘मैपिंग कल्चर्स’ प्रदर्शनी कला प्रेमियों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र रही। यह प्रदर्शनी प्रख्यात ब्रिटिश फोटोग्राफर एलिजाबेथ सिम्सन (1931–2025) के दुर्लभ और ऐतिहासिक फोटोग्राफ पर आधारित रही, जिन्होंने राजस्थान के लोकजीवन की गहराई और रंगों को अत्यंत जीवंत रूप में सहेजा।
प्रदर्शनी में प्रस्तुत तस्वीरें केवल दृश्य नहीं, बल्कि राजस्थान की सांस्कृतिक आत्मा का दस्तावेज हैं। इनमें ग्रामीण जीवन, पारंपरिक पहनावा, रंग-बिरंगी पगड़ियां, ओढ़नियां, हस्तशिल्प, सामाजिक संरचना और दैनिक जीवन की सुक्ष्म झलकियां अत्यंत संवेदनशीलता के साथ उभरकर सामने आती हैं। एलिजाबेथ सिम्सन ने 1960 और 1970 के दशक से राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय तक यहां रहकर जीवन को निकट से समझा। उन्होंने केवल तस्वीरें नहीं लीं, बल्कि लोगों के जीवन, उनकी परंपराओं और सामाजिक ताने-बाने को आत्मसात किया।
शोध, संवेदना और समर्पण
एलिजाबेथ सिम्सन का जन्म 7 अप्रैल 1931 को हुआ। उन्होंने इंग्लैंड के बाथ एकेडमी ऑफ आर्ट में अध्ययन किया और वहीं अध्यापन भी किया। भारत के प्रति उनका आकर्षण उन्हें 1963 में पहली बार यहां लेकर आया। इसके बाद उन्होंने बार-बार भारत, विशेषकर राजस्थान की यात्राएं कीं। बोरुंदा में रूपायन संस्थान से जुड़कर उन्होंने स्थानीय जीवन को गहराई से समझा और वर्षों तक यहां के लोगों के बीच रहकर काम किया। उन्होंने राजस्थान के पशुपालकों, किसानों, कारीगरों, रंगरेजों, व्यापारियों और खानाबदोश समुदायों के जीवन को एक सांस्कृतिक अभिलेख के रूप में सहेजा। उनकी तस्वीरों में केवल विषय नहीं, बल्कि भावनाएं और मानवीय जुड़ाव स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं।
हजारों तस्वीरों का सांस्कृतिक अभिलेख
सिम्सन के कार्यों का दायरा अत्यंत व्यापक रहा। उन्होंने हजारों नेगेटिव और ट्रांसपेरेंसी के माध्यम से राजस्थान के ग्रामीण जीवन को सहेजा। बाद के वर्षों में इन तस्वीरों को डिजिटल रूप में संरक्षित किया गया। उनकी तस्वीरों की प्रदर्शनियां देश के अहमदाबाद, दिल्ली, बोरुंदा, कोटा और जयपुर जैसे बड़े शहरों में आयोजित हो चुकी हैं। वर्ष 2026 में भी उनके कार्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के प्रयास जारी हैं।
नई पीढ़ी के लिए जीवंत इतिहास
इस प्रदर्शनी का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह रहा कि बड़ी संख्या में स्कूली बच्चों ने इसे देखा और समझा। उनके लिए यह अनुभव किसी जीवंत इतिहास कक्षा से कम नहीं रहा, जहां तस्वीरों के माध्यम से उन्होंने बीते समय की जीवनशैली, परंपराएं और सांस्कृतिक विविधता को करीब से जाना। प्रदर्शनी का अवलोकन करने वाले कलाकारों और शोधार्थियों का मानना है कि एक विदेशी कलाकार द्वारा किसी क्षेत्र की संस्कृति को इतनी गहराई से समझना और उसे सहेजना अपने आप में एक महत्वपूर्ण उदाहरण है।
यह प्रदर्शनी केवल एक आयोजन भर नहीं रही, बल्कि एक सांस्कृतिक दस्तावेज के रूप में उभरकर सामने आई है। एलिजाबेथ सिम्सन का कार्य यह दर्शाता है कि संस्कृति सीमाओं में बंधी नहीं होती। एक विदेशी कलाकार द्वारा राजस्थान की जीवनधारा को इतनी आत्मीयता से सहेजना हमें अपनी ही विरासत को नए नजरिए से देखने के लिए प्रेरित करता है। ऐसे प्रयास आने वाली पीढ़ियों के लिए अमूल्य धरोहर बनकर रहेंगे।







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