मध्य पूर्व के तनाव का सीधा असर आम घर की रसोई पर
डॉ. मधु बैनर्जी,
पत्रकार व लेखिका
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दुनिया के किसी भी कोने में होने वाला संघर्ष सीमाओं तक सीमित नहीं रहता। वैश्विक अर्थव्यवस्था के जरिए उसका असर आम आदमी के घर-आंगन तक पहुंचता है। मध्य-पूर्व में ईरान से जुड़े बढ़ते तनाव का असर अब भारतीय परिवारों, खासकर गृहणियों की दिनचर्या और घरेलू बजट पर साफ दिखाई देने लगा है। रसोई का खर्च, ईंधन की कीमतें और घर की आर्थिक योजना, इन सब पर इसका असर साफ दिख रहा है।
गृहणियां हमेशा से परिवार की आर्थिक व्यवस्था की धुरी रही हैं। सीमित संसाधनों में घर चलाना और संतुलन बनाए रखना उनकी विशेषता है। लेकिन जैसे ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, भारत जैसे आयात-निर्भर देश पर इसका सीधा असर पड़ता है। ईरान क्षेत्र में तनाव के कारण तेल आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है। इसका प्रभाव केवल वाहन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि परिवहन महंगा होने से सब्जियां, दालें और अन्य आवश्यक वस्तुएं भी महंगी हो जाती हैं। जोधपुर की एक गृहिणी सीमा शर्मा कहती हैं कि पहले जहां 3000 रुपए में महीने भर का सब्जी-भाजी का खर्च चल जाता था, वहीं अब 4000 रुपए भी कम पड़ रहे हैं।
गैस सिलेंडर का बढ़ता बोझ
रसोई गैस यानी एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी भी गृहणियों के लिए बड़ी चिंता का कारण बन रही है। युद्ध या अंतरराष्ट्रीय तनाव के दौरान ऊर्जा की कीमतों में तेजी से वृद्धि होती है, जिसका सीधा असर घरेलू गैस पर पड़ता है। ऐसी स्थिति में गृहणियां गैस के उपयोग को लेकर अधिक सतर्क हो गई हैं। कम आंच पर खाना बनाना, एक बार में अधिक भोजन तैयार करना और बचत के नए तरीके अपनाना उनकी दिनचर्या बन गया है।
बचत पर संकट
गृहणियां अक्सर छोटी-छोटी बचत के माध्यम से परिवार के भविष्य को सुरक्षित रखने का प्रयास करती हैं। लेकिन जब रोजमर्रा के खर्च बढ़ते हैं, तो सबसे पहले बचत प्रभावित होती है। एक समय था जब महिलाएं हर महीने कुछ न कुछ बचा लेती थीं, लेकिन बढ़ती महंगाई ने इस आदत को कमजोर कर दिया है। अब अधिकांश आय घरेलू खर्चों में ही खत्म हो जाती है, जिससे भविष्य की योजनाएं प्रभावित हो रही हैं।
महंगाई केवल आर्थिक दबाव ही नहीं लाती, बल्कि मानसिक तनाव भी बढ़ाती है। घर का बजट संतुलित करना, बच्चों की जरूरतें पूरी करना और भविष्य की चिंता ये सभी बातें गृहणियों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आर्थिक अस्थिरता का सबसे अधिक असर उन महिलाओं पर पड़ता है जो सीधे आय अर्जन से जुड़ी नहीं होतीं, लेकिन घर के खर्च का पूरा प्रबंधन करती हैं।
पोषण पर असर
जब बजट सीमित हो जाता है, तो सबसे पहले असर खान-पान की गुणवत्ता पर पड़ता है। महंगी सब्जियां, फल और दालें धीरे-धीरे थाली से कम होने लगती हैं। गृहणियां सस्ते विकल्प तलाशने को मजबूर होती हैं। इसका असर परिवार के पोषण स्तर पर पड़ता है। इन परिस्थितियों के बावजूद गृहणियां हार नहीं मान रही हैं। वे खर्च कम करने और आय बढ़ाने के लिए थोक में सामान खरीदने, स्थानीय और मौसमी सब्जियों का उपयोग, घर पर ही खाद्य सामग्री तैयार करने, बिजली और पानी की बचत जैसे उपाय कर रही हैं। इसके साथ ही कई महिलाएं घर से टिफिन सर्विस, सिलाई या ऑनलाइन कार्य जैसे छोटे व्यवसाय शुरू कर रही हैं, जिससे अतिरिक्त आय अर्जित की जा सके।
सामाजिक बदलाव की झलक
ईरान से जुड़े अंतरराष्ट्रीय तनाव का प्रभाव अब सामाजिक बदलाव के रूप में भी दिखाई दे रहा है। महिलाएं आर्थिक मामलों में अधिक जागरूक हो रही हैं और बाजार के उतार-चढ़ाव को समझने लगी हैं। यह बदलाव सकारात्मक है, क्योंकि इससे महिलाओं की आर्थिक भागीदारी और निर्णय लेने की क्षमता मजबूत हो रही है। वैश्विक तनाव का प्रभाव अब अंतरराष्ट्रीय राजनीति से आगे बढ़कर हर घर की रसोई तक पहुंच चुका है। गृहणियां इस बदलाव को सबसे पहले और सबसे गहराई से महसूस कर रही हैं। उनकी जिम्मेदारियां बढ़ गई हैं और चुनौतियां कठिन हो गई हैं, लेकिन इसके बावजूद वे अपने परिवार को संभालने का काम पूरी मजबूती से कर रही हैं। दरअसल, रसोई में सिमटती यह चुनौती आज की वैश्विक राजनीति की सबसे सटीक और संवेदनशील तस्वीर बन चुकी है।
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खास बातें
– ईरान से जुड़े तनाव के बाद कच्चे तेल की कीमतों में 10 से 30 प्रतिशत तक उछाल देखा गया
– दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत तेल सप्लाई होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरता है
– भारत जैसे देशों में डीजल और पेट्रोल कीमतों पर दबाव लगातार बढ़ रहा है
– ट्रांसपोर्ट महंगा होने से सब्जी, राशन और दूध के दाम बढ़े
– भारत में महंगाई दर मार्च 2026 में 3.21 प्रतिशत से बढ़कर 3.40 प्रतिशत हो गई
– विशेषज्ञों के अनुसार अगर तेल की कीमतें 10 से 20 प्रतिशत बढ़ती हैं तो महंगाई 0.25 से 0.50 प्रतिशत तक और बढ़ सकती है







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