अमेरिका का रास्ता और कठिन करने की तैयारी
ऐसा लग रहा है कि अमेरिकी प्रशासन एच 1बी वीजा, ग्रीन कार्ड, छात्र वीजा और एच 4 वर्क परमिट से जुड़े नियमों को और सख्त बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा...

आव्रजन नियमों में सख्ती से भारतीय छात्रों और पेशेवरों पर पड़ सकता है असर
अमेरिका लंबे समय से उच्च शिक्षा, अनुसंधान और रोजगार के लिए दुनिया का सबसे बड़ा आकर्षण रहा है। हर वर्ष हजारों भारतीय छात्र, आईटी पेशेवर, चिकित्सक और शोधकर्ता बेहतर अवसरों की उम्मीद में वहां पहुंचते हैं। लेकिन अब ट्रंप प्रशासन के नए आव्रजन प्रस्ताव इस राह को पहले की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण बना सकते हैं।
अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग, श्रम विभाग और विदेश विभाग द्वारा जारी एकीकृत नियामक एजेंडा में कई ऐसे प्रस्ताव शामिल किए गए हैं, जिनका उद्देश्य आव्रजन व्यवस्था को अधिक नियंत्रित, पारदर्शी और कठोर बनाना है। यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि इनमें से अधिकांश बदलाव अभी केवल प्रस्तावित हैं। इन्हें लागू होने से पहले सार्वजनिक परामर्श, नियामकीय समीक्षा और अंतिम अधिसूचना की प्रक्रिया से गुजरना होगा।
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सबसे अधिक चर्चा एच 1बी वीजा को लेकर है, जो विदेशी विशेषज्ञों, विशेषकर भारतीय आईटी पेशेवरों के लिए अमेरिका में रोजगार का प्रमुख माध्यम है। प्रस्तावों के अनुसार विश्वविद्यालयों और कुछ शोध संस्थानों को मिलने वाली एच 1बी की वार्षिक सीमा से छूट की समीक्षा की जा सकती है। साथ ही उन कंपनियों पर अधिक निगरानी रखी जाएगी जो अपने कर्मचारियों को बाहरी ग्राहक संस्थानों में काम के लिए भेजती हैं। ऐसी कंपनियों को यह साबित करना होगा कि कर्मचारी वास्तव में विशेष योग्यता वाले कार्य पर नियुक्त है और उसका अपने नियोक्ता से सीधा संबंध बना हुआ है। इसके अलावा एच 1बी वीजा के विस्तार पर अतिरिक्त शुल्क लगाने तथा पहले नियमों का उल्लंघन कर चुकी कंपनियों के नए आवेदनों की अधिक गहन जांच का भी प्रस्ताव है। यदि ये बदलाव लागू होते हैं तो भारतीय आईटी कंपनियों और उनके कर्मचारियों पर सीधा प्रभाव पड़ सकता है।
विदेशी कर्मचारियों की नियुक्ति होगी और कठिन
ग्रीन कार्ड प्रक्रिया में भी महत्वपूर्ण परिवर्तन प्रस्तावित हैं। अमेरिकी श्रम विभाग विदेशी कर्मचारियों के लिए निर्धारित न्यूनतम वेतन मानकों में वृद्धि पर विचार कर रहा है। प्रवेश स्तर के वेतन मानकों को बढ़ाने का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना बताया गया है कि विदेशी कर्मचारियों की नियुक्ति केवल वहीं हो, जहां वास्तव में उनकी आवश्यकता हो और अमेरिकी नागरिकों के रोजगार के अवसर प्रभावित न हों। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो कंपनियों के लिए विदेशी पेशेवरों की नियुक्ति पहले की तुलना में अधिक महंगी हो सकती है।
ग्रीन कार्ड की पहली सीढ़ी मानी जाने वाली परम लेबर सर्टिफिकेशन व्यवस्था में भी बदलाव प्रस्तावित हैं। भर्ती प्रक्रिया, अमेरिकी कर्मचारियों के हितों की सुरक्षा तथा भेदभाव विरोधी प्रावधानों को और मजबूत करने की तैयारी है।
विदेशी छात्रों के लिए नई नीति
अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए भी नई नीति महत्वपूर्ण बदलाव ला सकती है। वर्तमान में अधिकांश विदेशी छात्र अपनी पढ़ाई पूरी होने तक अमेरिका में रह सकते हैं। प्रस्ताव है कि इसकी जगह निश्चित अवधि की व्यवस्था लागू की जाए। ऐसी स्थिति में निर्धारित समय पूरा होने पर पढ़ाई जारी रखने के लिए अवधि बढ़ाने का आवेदन करना पड़ सकता है। इसके साथ ही पढ़ाई पूरी होने के बाद मिलने वाले प्रशिक्षण आधारित कार्य अनुमति कार्यक्रमों की भी समीक्षा की जाएगी।
एक अन्य महत्वपूर्ण प्रस्ताव एच 4 वीजा धारकों से जुड़ा है। वर्तमान में अनेक एच 1बी पेशेवरों के जीवनसाथी रोजगार प्राधिकरण के आधार पर अमेरिका में काम करते हैं। प्रस्तावित बदलावों के अनुसार कार्य अनुमति के स्वतः विस्तार की व्यवस्था समाप्त की जा सकती है। यदि ऐसा होता है तो नवीनीकरण में देरी होने की स्थिति में हजारों लोगों को अस्थायी रूप से नौकरी छोड़नी पड़ सकती है।
एच 1बी के लिए भारतीयों की हिस्सेदारी अधिक
इन सभी प्रस्तावों का सबसे अधिक प्रभाव भारत पर पड़ने की संभावना है। अमेरिका में एच 1बी वीजा प्राप्त करने वालों में भारतीयों की हिस्सेदारी सबसे अधिक है। बड़ी संख्या में भारतीय छात्र अमेरिकी विश्वविद्यालयों में अध्ययन कर रहे हैं और लाखों भारतीय ग्रीन कार्ड की प्रतीक्षा सूची में हैं। ऐसे में किसी भी नीतिगत बदलाव का असर सबसे पहले भारतीयों पर दिखाई देना स्वाभाविक है।
हालांकि यह समझना भी जरूरी है कि फिलहाल इन प्रस्तावों को अंतिम नियम नहीं माना जा सकता। नियामकीय एजेंडा किसी सरकार की नीति की दिशा अवश्य बताता है, लेकिन प्रत्येक प्रस्ताव को लागू होने से पहले विस्तृत कानूनी प्रक्रिया और सार्वजनिक परामर्श से गुजरना होता है। इसलिए भारतीय छात्रों, पेशेवरों और उनके परिवारों को किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय आधिकारिक घोषणाओं और अंतिम नियमों का इंतजार करना चाहिए।
कुल मिलाकर इन प्रस्तावों से संकेत मिलता है कि ट्रंप प्रशासन अमेरिका की प्रस्तावित आव्रजन व्यवस्था में संख्या के बजाय उच्च कौशल, राष्ट्रीय सुरक्षा और अमेरिकी नागरिकों के रोजगार को अधिक प्राथमिकता देना चाहता है। यदि ये प्रस्ताव वर्तमान स्वरूप में अंतिम रूप लेते हैं तो आने वाले समय में अमेरिका में पढ़ाई, रोजगार और स्थायी निवास का रास्ता पहले की तुलना में अधिक प्रतिस्पर्धी और चुनौतीपूर्ण हो सकता है।





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