एक गलत क्लिक पड़ सकता है भारी
दीपावली की खुशियों के बीच फर्जी गिफ्ट, क्यूआर कोड और एआई संदेशों से साइबर ठग सक्रिय हैं। राजस्थान में साढ़े तीन साल में 2307 करोड़ रुपए की ठगी के आंकड़े डिजिटल सतर्कता की जरूरत बताते...

डिजिटल अलर्ट
धर्मेन्द्र प्रजापति,
वरिष्ठ पत्रकार
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दीपावली पर बाजार सज रहे हैं। घरों में खरीदारी की तैयारियां हैं। मोबाइल पर आकर्षक ऑफर, गिफ्ट और कैशबैक के संदेश आने लगे हैं। लेकिन सावधान करने वाली खबर यह है कि त्योहार की इन खुशियों के बीच एक ऐसा खतरा भी है, जो बिना घर में घुसे आपकी जीवनभर की कमाई साफ कर सकता है। राजस्थान में साइबर ठग वर्ष 2023 से 12 सितंबर 2026 तक करीब 2307 करोड़ रुपए की चपत लगा चुके हैं। इस अवधि में प्रदेश में चार लाख से अधिक साइबर शिकायतें दर्ज हुई हैं। अकेले वर्ष 2025 में करीब 768 करोड़ रुपए की ठगी हुई। वर्ष 2026 के शुरुआती साढ़े छह महीनों में ही 387 करोड़ रुपए की ठगी दर्ज हो चुकी थी। ये आंकड़े चेतावनी हैं कि डिजिटल दुनिया में एक गलत क्लिक कितना महंगा पड़ सकता है।
अब साइबर अपराधी केवल ओटीपी मांगकर ठगी नहीं करते। वे त्योहार की शुभकामनाओं, आकर्षक उपहारों, नकली वेबसाइट, क्यूआर कोड और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए लोगों का विश्वास जीतकर उन्हें निशाना बनाते हैं। सवाल है कि दीपावली पर जब डिजिटल खरीदारी और भुगतान बढ़ेंगे, तब आपकी मेहनत की कमाई कितनी सुरक्षित रहेगी?
राजस्थान में बढ़ता साइबर ठगी का जाल
प्रदेश में साइबर अपराध के आंकड़े चिंताजनक तस्वीर पेश करते हैं। वर्ष 2023 में करीब 354 करोड़ रुपए की ठगी दर्ज हुई। अगले वर्ष यह रकम बढ़कर लगभग 795 करोड़ रुपए पहुंच गई। वर्ष 2025 में करीब 768 करोड़ रुपए की ठगी हुई। वर्ष 2023 में लगभग 78 हजार शिकायतें दर्ज हुई थीं, जबकि वर्ष 2025 में इनकी संख्या बढ़कर 1.27 लाख से अधिक हो गई। वर्ष 2026 में अक्टूबर तक करीब 90 हजार लोग साइबर क्राइम का शिकार हो चुके हैं।
पुलिस की रिपोर्ट के अनुसार, निवेश के नाम पर धोखाधड़ी साइबर अपराध के बड़े तरीकों में शामिल है। अधिक मुनाफे का लालच देकर लोगों को फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म और निवेश योजनाओं में फंसाया जाता है। जयपुर, अलवर, भरतपुर, दौसा और जोधपुर से जुड़े क्षेत्र साइबर अपराध के प्रमुख हॉटस्पॉट के रूप में सामने आए हैं। हालांकि साइबर ठगी का खतरा किसी एक शहर या वर्ग तक सीमित नहीं है। बुजुर्ग, महिलाएं, नौकरीपेशा लोग, कारोबारी और तकनीक से परिचित युवा भी इसके शिकार हो रहे हैं।
अजमेर की दो वारदातें, जो सबक हैं
80 लाख की ठगी : डिजिटल अरेस्ट के नाम पर शिक्षिका को डराया
अजमेर की एक सेवानिवृत्त शिक्षिका से डिजिटल अरेस्ट के नाम पर करीब 80 लाख रुपए ठगने का मामला साइबर अपराधियों के खतरनाक तरीकों को उजागर करता है। अपराधियों ने महिला को बताया कि उनके पहचान दस्तावेजों का इस्तेमाल संदिग्ध बैंक खातों में हुआ है। धनशोधन के मामले में गिरफ्तारी का डर दिखाकर वीडियो कॉल के जरिए उन पर दबाव बनाया गया। महिला से अलग-अलग खातों में रकम ट्रांसफर करवाई गई।
नवंबर 2024 में दर्ज शिकायत की जांच के दौरान अक्टूबर 2026 में एक और आरोपी गिरफ्तार हुआ। पुलिस के अनुसार, मामले में अब तक 29 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। यह घटना बताती है कि साइबर ठग केवल तकनीक नहीं, बल्कि व्यक्ति के डर और विश्वास का भी इस्तेमाल करते हैं।
6.74 लाख की ठगी: बैंक खातों के जरिए अपराध का नेटवर्क
सितंबर 2026 में अजमेर पुलिस ने ‘ऑपरेशन म्यूल हंटर’ के तहत साइबर ठगी से जुड़े बैंक खातों की जांच में कार्रवाई की। पुलिस के अनुसार, अजमेर के एक बैंक खाते से जुड़ी चार साइबर शिकायतों में कुल 6.74 लाख रुपए की धोखाधड़ी सामने आई। जांच के दौरान जोधपुर से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
ऐसे खातों को ‘म्यूल अकाउंट’ कहा जाता है, जिनका इस्तेमाल ठगी की रकम प्राप्त करने और आगे भेजने के लिए किया जाता है। कमीशन के लालच में किसी दूसरे व्यक्ति को अपना बैंक खाता उपलब्ध कराना भी गंभीर कानूनी परेशानी पैदा कर सकता है।
दीपावली पर ठगी के पांच बड़े खतरे
1. फर्जी गिफ्ट और कैशबैक
‘बधाई हो! आपने दीपावली पर 25 हजार रुपए का उपहार जीता है।’
ऐसे संदेशों में लिंक खोलकर व्यक्तिगत जानकारी भरने या मामूली शुल्क जमा करने को कहा जाता है। जिस प्रतियोगिता में आपने भाग नहीं लिया, उसमें पुरस्कार मिलने का दावा संदेह पैदा करता है। अनजान लिंक पर क्लिक करने या अपनी बैंकिंग जानकारी देने से बचें।
2. नकली ऑनलाइन सेल
दीपावली पर 80 से 90 प्रतिशत छूट के विज्ञापन आकर्षित करते हैं। ठग प्रसिद्ध कंपनियों से मिलती-जुलती वेबसाइट बनाकर भुगतान करवा सकते हैं। वेबसाइट का पता, कंपनी की विश्वसनीयता और भुगतान का तरीका जांचना जरूरी है। केवल वेबसाइट पर ताले का निशान होना उसकी प्रामाणिकता की गारंटी नहीं है।
3. क्यूआर कोड से ठगी
कैशबैक या रिफंड भेजने के नाम पर क्यूआर कोड स्कैन कराकर यूपीआई पिन डालने को कहा जा सकता है। याद रखें, पैसा प्राप्त करने के लिए यूपीआई पिन डालने की आवश्यकता नहीं होती। पिन दर्ज करने का अर्थ आमतौर पर भुगतान को अधिकृत करना है। भुगतान करने से पहले स्क्रीन पर प्राप्तकर्ता और रकम अवश्य जांचें।
4. नकली ग्राहक सेवा
ऑनलाइन ऑर्डर, रिफंड और डिलीवरी की शिकायतों का फायदा उठाकर अपराधी फर्जी ग्राहक सेवा अधिकारी बनते हैं। वे ओटीपी, बैंक विवरण या मोबाइल की स्क्रीन साझा करने को कह सकते हैं। ग्राहक सेवा के लिए हमेशा संबंधित कंपनी के आधिकारिक ऐप या वेबसाइट का उपयोग करें।
5. एआई से आवाज और वीडियो की नकल
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने धोखाधड़ी के नए रास्ते खोल दिए हैं। परिचित व्यक्ति जैसी आवाज या चेहरा दिखाकर आपातकाल के नाम पर पैसे मांगे जा सकते हैं। ऐसी कॉल आने पर घबराएं नहीं। संबंधित व्यक्ति को उसके पहले से सुरक्षित नंबर पर फोन करके पुष्टि करें।
राजस्थान सरकार की नई चेतावनी
राजस्थान सरकार के सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग ने सितंबर 2026 में साइबर सुरक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी कीं। 18 सितंबर को क्यूआर कोड के जरिए फिशिंग यानी ‘क्विशिंग’ से सावधान रहने और 24 सितंबर को बैंक खाते किराए पर देने से संबंधित धोखाधड़ी के बारे में चेतावनी जारी की गई। इससे स्पष्ट है कि साइबर अपराध के नए तरीकों को लेकर सतर्कता जरूरी है। अनजान लिंक, संदिग्ध क्यूआर कोड और दूसरों को बैंक खाता उपलब्ध कराने जैसे जोखिमों से बचना चाहिए।
ठगी का सबसे बड़ा हथियार है जल्दबाजी
साइबर अपराधियों की रणनीति में एक बात अक्सर समान होती है कि वे पीड़ित को सोचने का समय नहीं देते। ‘दस मिनट में ऑफर खत्म हो जाएगा।’ ‘तुरंत भुगतान नहीं किया तो बैंक खाता बंद हो जाएगा।’ ‘किसी को बताया तो गिरफ्तार कर लिया जाएगा।’ ऐसी धमकियां व्यक्ति को मानसिक दबाव में लाती हैं।
ध्यान रखें, भारत में डिजिटल अरेस्ट नाम की कोई वैध गिरफ्तारी प्रक्रिया नहीं है। कोई वास्तविक जांच एजेंसी वीडियो कॉल पर व्यक्ति को बंधक बनाकर पैसे जमा करने का आदेश नहीं देती। किसी भी संदिग्ध कॉल पर भुगतान करने के बजाय संबंधित संस्था से स्वतंत्र रूप से पुष्टि करें।
ठगी हो जाए तो चुप न रहें
साइबर ठगी का शिकार होने पर शर्म या बदनामी के डर से चुप रहना नुकसान बढ़ा सकता है। तत्काल अपने बैंक को सूचना दें। संबंधित कार्ड या भुगतान सुविधा को सुरक्षित करवाएं। इसके बाद राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें। भारत सरकार के राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल cybercrime.gov.in पर भी शिकायत दर्ज की जा सकती है।
शिकायत के लिए लेन-देन की तारीख, समय, रकम, ट्रांजेक्शन आईडी, संदिग्ध मोबाइल नंबर और स्क्रीनशॉट सुरक्षित रखें। जितनी जल्दी सूचना दी जाएगी, संदिग्ध रकम को रोकने की संभावना उतनी बेहतर हो सकती है। हालांकि शिकायत करने से पूरी रकम वापस मिलने की गारंटी नहीं होती, लेकिन समय पर सूचना मिलने से पुलिस को रकम बचाने में मदद मिल सकती है।
पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में पीड़ितों को 10 करोड़ रुपए से अधिक की राशि वापस दिलाई गई। यह वर्ष 2023 के मुकाबले लगभग दस गुना है। वर्ष 2024 की तुलना में 2025 में ठगी की फ्रीज कराई गई रकम में 65.54 करोड़ रुपए की वृद्धि हुई। वर्ष 2023 के मुकाबले रकम होल्ड कराने में 339 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। वर्ष 2026 में जुलाई तक विशेष अभियानों के तहत 9,744 फर्जी बैंक खाते, वेबसाइट और ऐप बंद या निष्क्रिय कराए गए। प्रदेश में 43 साइबर पुलिस थाने और 1930 हेल्पलाइन की 53 लाइनें संचालित हैं।
एक दीपक डिजिटल जागरूकता का भी जलाएं
दीपावली अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ने का पर्व है। आज डिजिटल दुनिया में भी जागरूकता का ऐसा ही दीपक जलाने की आवश्यकता है। त्योहार पर केवल घरों और दुकानों की सुरक्षा पर्याप्त नहीं है। डिजिटल लेन-देन की सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है।
बुजुर्गों को डिजिटल अरेस्ट जैसी फर्जी धमकियों के बारे में बताएं। बच्चों को अनजान गेमिंग और गिफ्ट लिंक से सावधान करें। दुकानदार भुगतान मिलने की पुष्टि अपने बैंक या यूपीआई ऐप में करें। ग्राहक के दिखाए स्क्रीनशॉट मात्र पर भरोसा न करें। मोबाइल और बैंकिंग ऐप अपडेट रखें। मजबूत पासवर्ड अपनाएं। ओटीपी और यूपीआई पिन किसी से साझा न करें।
तकनीक से दूर भागना समाधान नहीं है। उसका सुरक्षित इस्तेमाल करना सीखना जरूरी है। हम घर की सुरक्षा के लिए मजबूत ताले लगाते हैं, लेकिन मोबाइल में मौजूद बैंक खाते और निजी जानकारी की सुरक्षा में अक्सर लापरवाही कर बैठते हैं। इस दीपावली खरीदारी जरूर कीजिए, उपहार भी बांटिए, लेकिन किसी अनजान लिंक या संदेश को अपनी मेहनत की कमाई तक पहुंचने का रास्ता मत दीजिए। डिजिटल साक्षरता केवल ऐप चलाना नहीं, धोखे को पहचानना भी है। सुरक्षित डिजिटल दीपावली ही खुशहाल दीपावली है।
एक्सपर्ट की राय
शमशेर खान, आरपीएस, अजमेर साइबर क्राइम सेल प्रभारी
सरकारी ई-मेल आईडी को खतरा, पुलिस की एडवाइजरी
अजमेर साइबर क्राइम सेल के उपाधीक्षक शमशेर खान का कहना है कि सावधानी से ही साइबर ठगी से बचाव हो सकता है। उन्होंने बताया कि अपराधियों के निशाने पर सरकारी ई-मेल और आईडी भी हैं। इसके लिए राजस्थान पुलिस ने सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए एडवाइजरी जारी की है।
निर्देश दिए गए हैं कि शॉपिंग और सोशल मीडिया ऐप पर सरकारी ई-मेल का इस्तेमाल न करें। एक ही पासवर्ड रखने से सरकारी सिस्टम में सेंध का खतरा बढ़ जाता है। कई बार कर्मचारी सरकारी ई-मेल आईडी का इस्तेमाल अमेजन, फ्लिपकार्ट, जोमैटो, फेसबुक, कैब बुकिंग और गेमिंग ऐप जैसी निजी सेवाओं पर खाते बनाने के लिए करते हैं। यदि इन प्लेटफॉर्म पर सरकारी ई-मेल के समान पासवर्ड भी रखा जाता है, तो संबंधित प्लेटफॉर्म का डेटा लीक होने की स्थिति में सरकारी खाते की सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती है।
साइबर घटना होने पर कहां करें शिकायत
यदि सरकारी ई-मेल खाते के दुरुपयोग या साइबर धोखाधड़ी की आशंका हो, तो तत्काल संबंधित आईटी हेल्पडेस्क या सुरक्षा संचालन केंद्र (एसओसी) को सूचित करें। साइबर सुरक्षा में चूक या ठगी की घटना होने पर निकटतम पुलिस थाने, साइबर पुलिस स्टेशन या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल cybercrime.gov.in पर शिकायत करें। इसके अलावा त्वरित सहायता के लिए साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 अथवा साइबर हेल्पडेस्क नंबर 9256001930 / 9257510100 पर संपर्क करें।
राजस्थान : साइबर ठगी की रकम
| वर्ष | साइबर ठगी की रकम |
| 2023 | ₹354 करोड़ |
| 2024 | ₹795 करोड़ |
| 2025 | ₹768 करोड़ |
| 2026 (12 सितंबर तक) | ₹390 करोड़ |
| कुल | ₹2,307 करोड़ |






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