कुर्सी बचाओ, कृपा बरसाओ!
दीपावली पर मां लक्ष्मी के दरबार में बड़े-बड़े नेताओं की लंबी कतार

बोल हरि बोल
हरीश मलिक,
वरिष्ठ लेखक और व्यंग्यकार
जब आप इस व्यंग्य को पढ़ रहे होंगे, तब चहुँओर दिवाली की रौनक बिखरी होगी। प्रभु श्रीराम के साथ मां लक्ष्मी के स्वागत की तैयारियां चरम पर होंगी। हम आमजन महालक्ष्मी का स्वागत सामर्थ्यानुसार अपनी झोली फैलाकर करेंगे। ऐसे में एक सवाल सहज ही ज़ेहन में आता है कि इस पावन अवसर पर बड़े-बड़े नेता मां लक्ष्मी से क्या और कैसे मांगते होंगे?
आइए, आपको सीधे मां लक्ष्मी के दरबार में ले चलते हैं। यहां भक्तों की लंबी कतार लगी है। किसी को धन की चाह, किसी को सुख-समृद्धि की तो कोई परिवार की खुशहाली के लिए नतमस्तक। लेकिन एक अलग वीआईपी कतार भी है, जिसमें नेता सबसे ज्यादा हैं। सबके चेहरे पर विनम्रता का लेप और मन में इच्छाओं का पूरा घोषणा-पत्र। किसी को सत्ता चाहिए। किसी को सत्ता बचानी है। मां लक्ष्मी शांत भाव से विराजमान हैं। उनके वाहन उल्लू ने नेताओं की कतार देखी तो अपनी गोल-गोल आंखें और फैला लीं। दरअसल, वह सदियों से इनकी चालाकियां देखता आया है, लेकिन राजनीति के इस रंगमंच पर उसे हर बार कुछ नया देखने को मिल जाता है।
पता नहीं उल्लू की नजर सबसे पहले राहुल गांधी पर ही क्यों पड़ी! उनके चेहरे पर ऐसी गंभीरता विराजमान, मानो देश की सारी समस्याएं उनके पास शिकायत लेकर आई हों और वे अभी उनकी यात्रा निकालने वाले हों। इसके साथ ही सत्ता में वापसी की प्रबल आकांक्षा भी साफ झलकी। उल्लू ने मन ही मन सोचा- इनकी इच्छा बड़ी नेक है। हर चुनाव के बाद फिर से नई शुरुआत के लिए मजबूत हौसला चाहिए। इसी बीच राहुल ने कहा- माता, हमें जनता का प्यार मिले, संगठन मजबूत हो और हमारे भाषणों के बाद लोग यह न पूछें कि अगला कदम क्या है! मां ने पूछा- वत्स, जनता तुम्हें समझे, इससे पहले तुम जनता को समझने का प्रयास करो। यहां साथ खड़ी प्रियंका चहक उठीं- मां, हम तो देश ही नहीं विदेश की जनता के बीच भी जाते हैं। मां बोलीं- जनता के बीच जाना और जनता के मन तक पहुंचना दो अलग-अलग यात्राएं हैं। इसलिए अगले चुनाव से पहले जन-मन तक जाने की यात्रा जरूरी है।
अगली बारी अमित शाह की आई। उनके हाथ में चुनावी नक्शे और मन में रणनीतियों का पूरा संसार नजर आया। उल्लू बुदबुदाया- इनको वरदान भी शायद सीटों के हिसाब से चाहिए। जहां बहुमत कम हो, वहां थोड़ा अतिरिक्त आशीर्वाद और जहां मुकाबला कड़ा हो, वहां विशेष कृपा! राजनीति में इनकी गणना इतनी तेज है कि मेरी रात की दृष्टि भी इनके सामने धुंधली पड़ जाती है। शाह हाथ जोड़कर बोले- हे मां, देश में समृद्धि बनी रहे, उद्योग बढ़ें और जिस राज्य में हमारी सरकार नहीं है, वहां भी बन जाए। मां कुछ कहतीं इसे पहले ही योगी जी बोले- मां, मेरी विनती बस चार शब्द की है। इसे पूरा कर दीजिए-योगी सरकार, तीसरी बार!
अरविंद केजरीवाल की बारी आई तो उल्लू को शिक्षा, स्वास्थ्य और मुफ्त सुविधाओं की बहस याद आ गई। उसने सोचा कि जनता को राहत मिले, इससे अच्छी बात और क्या होगी! मगर राहत की घोषणा और उसका हिसाब, दोनों साथ चलें तो खजाने को भी चैन मिले। इस बीच केजरीवाल बोले- माता, ऐसी कृपा करो कि हमारे हर सवाल का जवाब भी मिले और उस जवाब पर फिर से सवाल उठाने के लिए हमें एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का समय मिल जाए! फिर भगवंत मान की ओर इशारा कर कहा, अभी तो बस इन्हें विजयी भव का आशीर्वाद दे दीजिए। उल्लू ने सोचा, ये मां के दरबार में दीप जलाने आए हैं या अपनी-अपनी राजनीतिक दुकान की बत्ती ठीक कराने?
ममता बनर्जी के सामने उल्लू ने अपनी गर्दन कुछ तिरछी की। बंगाल की राजनीति में जोश और टकराव की चर्चा उसे खूब सुनाई दी थी। ममता बोलीं- हे मां, मुझे इतना साहस दो कि हर चुनौती का सामना कर सकूं। उल्लू धीरे से बुदबुदाया- साहस तो तुम्हारे पास है। पर कभी-कभी सामने वाले की बात सुनने का धैर्य भी रख लिया करो। उल्लू की बात ममता के तेज कानों में जा पहुंची और इसे विपक्ष की साजिश बोलकर और आगे बढ़ गईं। पीछे खड़े अखिलेश यादव ने तुरंत कहा- मां, गठबंधन में प्रेम बना रहे, सीटों का बंटवारा सहज हो और चुनाव आते-आते कोई पुराना मित्र नया रास्ता न पकड़ ले। उल्लू से रहा नहीं गया और बोल दिया- गठबंधन में एकता का वरदान मांगने से पहले अपनी ही पार्टी के दबंगों के मतभेदों को शांत कराओ। तभी सियासत की विरासत में मिली साइकिल चल पाएगी, वरना पैडल भी खुद मारने पड़ेंगे।
मां लक्ष्मी और उनके वाहन ने सबकी ओर मुस्कुराकर देखा, मानो कह रहे हों कि धन मांगना आसान है, जनविश्वास कमाना कठिन। दीप जलाने से पहले अपने कर्मों का अंधेरा भी देखना चाहिए। तुम कृपा मांगते हो, लेकिन जनता के विश्वास का हिसाब कौन देगा? दीपावली पर दीया जलाना आसान है, अपने कामकाज में पारदर्शिता का दीया पहले जलाना होगा। नेताओं ने दूरदृष्टि से इसे सुना तो सबके चेहरों पर अलग-अलग भाव उभरे। किसी को संदेश में दर्शन दिखा। किसी को पक्ष-विपक्ष तंज लगा। अंत में एक नेता ने धीरे से पूछा- मां, अगले चुनाव में क्या होगा? मां लक्ष्मी ने अपना कमल उठाया और कहा- यह मुझसे मत पूछो। जनता के दरबार में जाओ। वहां न आरती से और न भाषण से काम चलेगा। वहां अपने कार्यों का हिसाब देना होगा। यह सुनते ही दरबार खाली हो गया।






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