धरती के नीचे छिपी रासायनिक दुनिया का खुलासा, IIT जोधपुर की अहम भागीदारी
भूजल और रसायनों के रहस्यों को समझेगा नया शोध, IIT जोधपुर ने बढ़ाया विज्ञान का दायरा, पर्यावरण और ऊर्जा क्षेत्र को मिलेगा लाभ, वैज्ञानिकों ने खोजे भूमिगत रासायनिक प्रतिक्रियाओं के नए सूत्र...

भूजल और रसायनों के रहस्यों को समझेगा नया शोध, IIT जोधपुर ने बढ़ाया विज्ञान का दायरा, पर्यावरण और ऊर्जा क्षेत्र को मिलेगा लाभ, वैज्ञानिकों ने खोजे भूमिगत रासायनिक प्रतिक्रियाओं के नए सूत्र
जोधपुर। धरती की सतह के नीचे बहने वाले भूजल में होने वाली रासायनिक प्रतिक्रियाओं को समझने की दिशा में भारतीय वैज्ञानिकों ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। Indian Institute of Technology Jodhpur, Indian Institute of Technology Gandhinagar और University of Rennes के शोधकर्ताओं की संयुक्त टीम ने यह पता लगाया है कि भूमिगत चट्टानों और मिट्टी के भीतर बहने वाला जल रासायनिक प्रतिक्रियाओं को किस प्रकार प्रभावित करता है। यह शोध पर्यावरण संरक्षण, भूजल प्रदूषण नियंत्रण, कार्बन डाइऑक्साइड भंडारण और भूमिगत हाइड्रोजन स्टोरेज जैसी भविष्य की तकनीकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
शोध पत्र “Reactive Fronts Dynamics under Joint Shear Deformation and Hydrodynamic Dispersion” प्रतिष्ठित जर्नल Advances in Water Resources में प्रकाशित हुआ है। अध्ययन में IIT जोधपुर के शोधकर्ता प्रत्याक्ष करण ने प्रमुख भूमिका निभाई। टीम में IIT गांधीनगर के गौरव चक्रवर्ती और उद्दीप्त घोष, जबकि फ्रांस के यूनिवर्सिटी ऑफ रेनेस से टैंगी ले बोर्न और यव्स मेह्यूस्ट शामिल रहे।

शोधकर्ताओं ने कंप्यूटर सिमुलेशन और गणितीय मॉडलिंग की सहायता से यह समझने का प्रयास किया कि जब भूजल मिट्टी और चट्टानों के सूक्ष्म छिद्रों तथा दरारों से होकर गुजरता है, तब रसायनों का मिश्रण और उनकी प्रतिक्रियाएं कैसे बदलती हैं। अध्ययन में पाया गया कि भूमिगत माध्यमों में केवल आणविक प्रसार (Diffusion) ही नहीं, बल्कि जल प्रवाह से उत्पन्न हाइड्रोडायनामिक डिस्पर्शन भी रासायनिक प्रतिक्रियाओं को नियंत्रित करता है। कई स्थानों पर प्रसार-प्रधान और डिस्पर्शन-प्रधान क्षेत्र एक साथ मौजूद रहते हैं तथा समय के साथ प्रतिक्रिया की प्रकृति बदलती रहती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह समझना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि धरती के भीतर होने वाली यही प्रक्रियाएं प्रदूषकों के फैलाव, भूजल की गुणवत्ता, मिट्टी की सफाई (Soil Remediation), कार्बन कैप्चर एवं स्टोरेज और भविष्य की हाइड्रोजन ऊर्जा परियोजनाओं की सफलता को प्रभावित करती हैं। शोध से प्राप्त नए मॉडल इन प्रक्रियाओं का अधिक सटीक अनुमान लगाने में मदद करेंगे।
जोधपुर के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में भूजल संसाधनों का वैज्ञानिक प्रबंधन अत्यंत आवश्यक है। IIT जोधपुर की भागीदारी से विकसित यह शोध भविष्य में राजस्थान जैसे जल-संकटग्रस्त क्षेत्रों में भूजल प्रदूषण नियंत्रण और जल संसाधन प्रबंधन की रणनीतियों को अधिक प्रभावी बनाने में योगदान दे सकता है।
वैज्ञानिकों का मानना है कि भूमिगत रासायनिक प्रक्रियाओं की बेहतर समझ न केवल पर्यावरणीय चुनौतियों के समाधान में सहायक होगी, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा भंडारण और जल सुरक्षा से जुड़े वैश्विक प्रयासों को भी नई दिशा देगी।





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