विज्ञापन में ‘जल संकट खत्म’, हकीकत में ‘पानी-पानी’ जनता: मंत्री के क्षेत्र के 150 गांवों के लोग कलेक्ट्रेट घेरने पहुंचे
एक ही दिन में दो तस्वीरें: अखबार में धन्यवाद का विज्ञापन, सड़कों पर पानी के लिए आंदोलन जोधपुर। लूणी विधानसभा क्षेत्र में पेयजल संकट को लेकर गुरुवार को एक ऐसा विरोधाभास सामने आया जिसने सरकार और...

एक ही दिन में दो तस्वीरें: अखबार में धन्यवाद का विज्ञापन, सड़कों पर पानी के लिए आंदोलन
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जोधपुर। लूणी विधानसभा क्षेत्र में पेयजल संकट को लेकर गुरुवार को एक ऐसा विरोधाभास सामने आया जिसने सरकार और प्रशासन के दावों पर सवाल खड़े कर दिए। एक ओर अखबारों में प्रकाशित पूरे पेज के विज्ञापन में लूणी क्षेत्र में जल प्रबंधन को उत्कृष्ट बताते हुए राज्य सरकार, जलदाय विभाग और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों का आभार जताया गया, वहीं दूसरी ओर उसी क्षेत्र के 150 गांवों के हजारों ग्रामीण पानी की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट पहुंच गए और जोरदार प्रदर्शन किया।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि भीषण गर्मी के बीच क्षेत्र के अनेक गांवों और ढाणियों में पेयजल संकट गहरा गया है। कई स्थानों पर नियमित जलापूर्ति नहीं हो रही, जबकि टैंकरों की व्यवस्था भी पर्याप्त नहीं है। पिछले कई दिनों से ग्रामीण लगातार विरोध-प्रदर्शन, ज्ञापन और सड़क जाम जैसे कार्यक्रम कर रहे थे। आंदोलनकारियों ने 25 मई को प्रशासन को 15 दिन का अल्टीमेटम दिया था और चेतावनी दी थी कि मांगें नहीं मानी गईं तो 11 जून को कलेक्ट्रेट का घेराव किया जाएगा।
विज्ञापन में दावा: जल संकट का प्रभावी समाधान
अखबार में प्रकाशित विज्ञापन में दावा किया गया कि वर्ष 2019-20 की तुलना में लूणी क्षेत्र में प्रतिदिन लाखों लीटर अधिक पानी की आपूर्ति की जा रही है। साथ ही यह भी कहा गया कि गर्मी और नहरबंदी जैसी परिस्थितियों के बावजूद हजारों टैंकरों के जरिए पानी पहुंचाया गया और क्षेत्र में आवश्यकता अनुसार पेयजल वितरण सुनिश्चित किया जा रहा है।
विज्ञापन में राज्य सरकार, जलदाय मंत्री, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री और स्थानीय विधायक के प्रयासों की सराहना करते हुए जनता की ओर से आभार व्यक्त किया गया।
लेकिन धरातल पर अलग कहानी
दूसरी तरफ, लूणी क्षेत्र से लगातार ऐसे वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट सामने आ रहे हैं जिनमें ग्रामीण पानी के लिए प्रदर्शन करते दिखाई दे रहे हैं। धुंधाड़ा, रोहिचा कला, बोरानाडा समेत कई इलाकों में ग्रामीणों ने सड़क जाम किए, मटकियां फोड़ीं और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। कई जगहों पर लोगों ने आरोप लगाया कि कई दिनों तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंच रहा है और टैंकरों के इंतजार में लोगों को घंटों खड़ा रहना पड़ता है।
सोशल मीडिया पर चल रहे अभियान में दावा किया गया कि लूणी क्षेत्र के करीब 150 गांव जल संकट से प्रभावित हैं और हजारों ग्रामीण आंदोलन में शामिल हुए। कई संगठनों ने प्रशासन को चेतावनी दी थी कि यदि पानी की समस्या का समाधान नहीं हुआ तो बड़ा जनआंदोलन होगा।
कलेक्ट्रेट के बाहर जनसैलाब
गुरुवार को कलेक्ट्रेट पहुंचे ग्रामीणों ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा और बैरिकेडिंग लगानी पड़ी। आंदोलनकारियों का कहना है कि पानी जैसी मूलभूत आवश्यकता को लेकर उन्हें बार-बार आंदोलन करने पर मजबूर होना पड़ रहा है।
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे लोगों का दावा है कि 150 गांवों से 8 से 10 हजार लोगों का समर्थन उन्हें प्राप्त है और यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है।
सबसे बड़ा सवाल
लूणी क्षेत्र के ग्रामीण अब एक ही सवाल पूछ रहे हैं, यदि जल संकट का प्रभावी समाधान हो चुका है और व्यवस्था इतनी बेहतर है कि उसके लिए पूरे पेज का धन्यवाद विज्ञापन प्रकाशित करना पड़ रहा है, तो फिर उसी क्षेत्र के हजारों लोग पानी की मांग को लेकर सड़कों पर क्यों हैं?
विज्ञापन और आंदोलन की तस्वीरें एक साथ सामने आने के बाद यह मुद्दा अब सिर्फ पेयजल संकट तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच के अंतर पर भी बहस छेड़ रहा है।






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