एफसीआरए बिल अब जेपीसी के हवाले
विपक्ष के तीखे विरोध के बीच केंद्र सरकार ने एफसीआरए संशोधन विधेयक 2026 को संयुक्त संसदीय समिति के पास भेज दिया है। विदेशी फंड से बनी संपत्तियों पर सरकारी नियंत्रण के प्रस्ताव को लेकर विवाद गहराया हुआ...

विदेशी फंडिंग पर सियासी घमासान
नई दिल्ली। विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को लेकर संसद में जारी गतिरोध के बीच केंद्र सरकार ने बुधवार को इसे संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के पास भेजने का निर्णय लिया। लोकसभा ने केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव को ध्वनिमत से मंजूरी दे दी। समिति में लोकसभा के 21 और राज्यसभा के 10 सदस्य शामिल होंगे, जो विधेयक के विभिन्न प्रावधानों की विस्तार से समीक्षा करेंगे। जेपीसी को इस विधेयक पर अपनी जांच रिपोर्ट शीतकालीन सत्र 2026 के पहले सप्ताह के अंतिम दिन तक संसद को सौंपनी है।
एफसीआरए विधेयक 25 मार्च 2026 को लोकसभा में पेश किया गया था। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य विदेशी धन के उपयोग में पारदर्शिता बढ़ाना और राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना है। दूसरी ओर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके सहित कई विपक्षी दलों ने इसे अल्पसंख्यक और सामाजिक संस्थाओं के खिलाफ बताते हुए वापस लेने की मांग की है।
विधेयक का सबसे विवादास्पद प्रावधान विदेशी अंशदान से निर्मित संपत्तियों से जुड़ा है। प्रस्तावित संशोधन के अनुसार यदि किसी संस्था का एफसीआरए पंजीकरण रद्द हो जाता है, वह स्वयं उसे समर्पित कर देती है अथवा उसका नवीनीकरण नहीं होता, तो उसकी विदेशी धन से निर्मित संपत्तियां केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त “नामित प्राधिकरण” के अधीन आ सकती हैं। यह प्राधिकरण ऐसी संपत्तियों के प्रबंधन, हस्तांतरण अथवा निस्तारण का अधिकार रखेगा।
सरकार का तर्क
सरकार का तर्क है कि यह व्यवस्था विदेशी धन के दुरुपयोग को रोकने के लिए आवश्यक है, जबकि विरोधी दल और अनेक सामाजिक संगठन इसे नागरिक समाज और गैर सरकारी संस्थाओं पर नियंत्रण बढ़ाने का प्रयास बता रहे हैं।
अब जेपीसी विभिन्न पक्षों, विशेषज्ञों और संबंधित संगठनों से राय लेकर अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी। इसके बाद ही विधेयक के अंतिम स्वरूप और संसद में इसके भविष्य की दिशा तय होगी। फिलहाल यह स्पष्ट है कि विदेशी फंडिंग और उससे जुड़ी संपत्तियों पर नियंत्रण का मुद्दा आने वाले समय में राष्ट्रीय राजनीति का प्रमुख विषय बना रहेगा।





No Comment! Be the first one.