प्रभु के सेवानुष्ठान की सामग्री है अन्नकूट
यह विशाल सामग्री यज्ञ का भाग कैसे है, इसे याज्ञवल्क्य और राजा जनक के संवाद द्वारा शुक्ल यजुर्वेद में समझाया गया...

धर्म-कर्म
डा. राकेश तैलंग,
शिक्षाविद् एवं पूर्व शिक्षा अधिकारी
अन्नकूट उत्सव के आयोजन से आनन्दित हुए भक्तों के अभिज्ञान के लिए यह जानकारी प्रस्तुत करते हुए हमें गौरव है, क्योंकि जिसे हम प्राय: अल्प ज्ञान के कारण मात्र स्वादेन्द्रिय को तृप्त करने वाला भोजन मानकर उपेक्षित कर देते हैं, वह भोग सखड़ी, अनसखड़ी, दूधघर और शाकघर के वर्गीकरण के साथ प्रभु सेवा यज्ञ की हवन सामग्री है और इस प्रसंग में कितना पवित्र है, इसे समझ लेने के बाद वह हमारे लिए यज्ञ या अनुष्ठान का ही भाग बन जाता है। तब उसके प्रति कदाचित् अन्य भाव ला ही नहीं सकते।
यह विशाल सामग्री यज्ञ का भाग कैसे है, इसे याज्ञवल्क्य और राजा जनक के संवाद द्वारा शुक्ल यजुर्वेद में समझाया गया है।
तदनुसार कच्ची रसोई या सखड़ी उपयोग लाए जाने वाली समस्त प्रकार की यज्ञ सामग्री है। जैसे पांच प्रकार की समिधाएं यज्ञ का महत्वपूर्ण भाग होती हैं, वैसे ही पक्की रसोई या पक्वान्न या अनसखड़ी को अन्नकूट यज्ञ में सम्मान है। यज्ञ में वन से लाए काष्ठ को हवन के लिए अनिवार्य अंग माना जाता है, वैसे ही इस उत्सव में हमें सूखे मेवे से बनी सामग्री को मान देना चाहिए। यज्ञ में घी और दूध का उपयोग सर्वविदित है, वैसे ही इस उत्सव में दूधघर का भोग सम्मानपूर्वक उपयोग के लिए तैयार किया जाता है।
समग्रत: अन्नकूट केवल भोजन का ढेर मात्र नहीं। वह तो स्वयं भगवान द्वारा किया गया यज्ञ है। ऐसा बोध हमें बार-बार होना जरूरी है। तभी हम इस प्रकार के उत्सवों का आनंद पाने के अधिकारी बनते हैं। क्या कभी इस भाव से आप और हम देवालयों में आकर इस यज्ञ में स्वयं यज्ञकर्ता होने का आनंद ले पाते हैं? अन्यथा तो मिठाई की बहुत बड़ी दुकान और अन्नकूट महामहोत्सव के बीच कोई अंतर ही नहीं होगा।





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