क्या इस बार टूटेगा इंतजार?
12 जून से इंग्लैंड में शुरू हो रहे महिला टी20 विश्व कप में भारतीय टीम खिताब की प्रबल दावेदारों में गिनी जा रही है। कप्तान हरमनप्रीत कौर के अनुभव, स्मृति मंधाना की स्थिरता, शेफाली वर्मा की आक्रामकता...

इंग्लैंड में आईसीसी महिला टी20 विश्व कप का आगाज 12 से
विश्व क्रिकेट की निगाहें 12 जून से इंग्लैंड पर टिकने जा रही हैं, जहां आईसीसी महिला टी20 विश्व कप का आगाज होगा। भारत के लिए यह टूर्नामेंट केवल एक और वैश्विक प्रतियोगिता नहीं बल्कि वर्षों से अधूरे पड़े उस सपने को साकार करने का अवसर है, जिसका इंतजार भारतीय महिला क्रिकेट लंबे समय से कर रहा है।
भारतीय टीम पिछले कुछ वर्षों में जिस तरह विकसित हुई है, उसने उसे विश्व क्रिकेट की सबसे मजबूत टीमों में ला खड़ा किया है। टीम में अनुभव भी है और युवा जोश भी। यही कारण है कि इस बार भारत को केवल प्रतिभागी नहीं बल्कि खिताब के गंभीर दावेदार के रूप में देखा जा रहा है।
Table Of Content
- इंग्लैंड में आईसीसी महिला टी20 विश्व कप का आगाज 12 से
- कप्तान हरमनप्रीत पर बड़ी जिम्मेदारी
- स्मृति मंधाना से मजबूत शुरुआत की उम्मीद
- शेफाली का आक्रमण बना सकता है अंतर
- जैमिमा और ऋचा पर मध्यक्रम की जिम्मेदारी
- दीप्ति शर्मा होंगी तुरुप का इक्का
- क्रांति गौड़ पर भी रहेंगी नजरें
- युवा खिलाड़ियों से भी बड़ी अपेक्षाएं
- सबसे बड़ी चुनौती ऑस्ट्रेलिया
कप्तान हरमनप्रीत पर बड़ी जिम्मेदारी
कप्तान हरमनप्रीत कौर के लिए यह विश्व कप विशेष महत्व रखता है। लंबे समय से टीम की अगुवाई कर रहीं हरमनप्रीत ने कई उतार चढ़ाव देखे हैं। बड़े मैचों में उनका अनुभव भारत की सबसे बड़ी ताकत माना जा रहा है। मध्यक्रम में उनकी भूमिका केवल रन बनाने तक सीमित नहीं होगी बल्कि दबाव की परिस्थितियों में पूरी टीम को संभालने की भी होगी।
हरमनप्रीत जानती हैं कि विश्व कप जैसे टूर्नामेंट में एक दो बड़ी पारियां पूरी तस्वीर बदल सकती हैं। ऐसे में कप्तान से बल्ले और नेतृत्व दोनों में प्रभावी प्रदर्शन की अपेक्षा रहेगी।
स्मृति मंधाना से मजबूत शुरुआत की उम्मीद
उपकप्तान स्मृति मंधाना भारतीय बल्लेबाजी का सबसे भरोसेमंद चेहरा हैं। पिछले कुछ वर्षों में उन्होंने लगातार रन बनाकर खुद को विश्व क्रिकेट की सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाजों में स्थापित किया है। इंग्लैंड की परिस्थितियों में नई गेंद को संभालते हुए टीम को मजबूत शुरुआत दिलाने की जिम्मेदारी उनके कंधों पर होगी। यदि मंधाना लय में रहीं तो भारत का शीर्ष क्रम किसी भी गेंदबाजी आक्रमण को चुनौती दे सकता है।
शेफाली का आक्रमण बना सकता है अंतर
टी20 क्रिकेट में शुरुआती छह ओवर बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। भारत को उम्मीद होगी कि शेफाली वर्मा अपनी स्वाभाविक आक्रामक शैली से विपक्षी टीमों पर शुरुआत से दबाव बनाएंगी। शेफाली का बल्ला चलने का अर्थ है कि भारत पावरप्ले में मैच का रुख अपने पक्ष में मोड़ सकता है। उनकी निडर बल्लेबाजी किसी भी विरोधी कप्तान की रणनीति बिगाड़ने की क्षमता रखती है।
जैमिमा और ऋचा पर मध्यक्रम की जिम्मेदारी
जैमिमा रोड्रिग्स भारतीय बल्लेबाजी को संतुलन प्रदान करती हैं। विकेट गिरने की स्थिति में पारी संभालना हो या रनगति बढ़ानी हो, दोनों भूमिकाएं निभाने की क्षमता उनमें मौजूद है। वहीं विकेटकीपर बल्लेबाज ऋचा घोष भारत की सबसे विस्फोटक बल्लेबाजों में शामिल हैं। अंतिम ओवरों में तेजी से रन बटोरने की उनकी कला कई बार भारत को मुश्किल परिस्थितियों से बाहर निकाल चुकी है। विश्व कप में भी उनसे ऐसे ही मैच जिताऊ योगदान की उम्मीद रहेगी।
दीप्ति शर्मा होंगी तुरुप का इक्का
दीप्ति शर्मा टीम की सबसे महत्वपूर्ण ऑलराउंडर हैं। उनकी ऑफ स्पिन और उपयोगी बल्लेबाजी भारत को अतिरिक्त मजबूती प्रदान करती है। टी20 क्रिकेट में ऐसे खिलाड़ी मैच का संतुलन बदल देते हैं और दीप्ति इसी श्रेणी में आती हैं। उनका प्रदर्शन भारत के अभियान की सफलता में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।
क्रांति गौड़ पर भी रहेंगी नजरें
भारतीय महिला क्रिकेट में पिछले कुछ समय में जिन युवा खिलाड़ियों ने तेजी से पहचान बनाई है उनमें तेज गेंदबाज क्रांति गौड़ का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। अपनी गति, सटीक लाइन लेंथ और नई गेंद से विकेट निकालने की क्षमता के कारण उन्होंने चयनकर्ताओं का ध्यान आकर्षित किया है। इंग्लैंड की परिस्थितियां परंपरागत रूप से तेज गेंदबाजों के अनुकूल मानी जाती हैं। ऐसे में यदि क्रांति को अवसर मिलता है तो वह भारत के गेंदबाजी आक्रमण की अप्रत्याशित लेकिन निर्णायक ताकत साबित हो सकती हैं। बड़े मंच पर युवा खिलाड़ियों का निडर प्रदर्शन अक्सर टीमों की किस्मत बदल देता है और भारतीय टीम को उनसे भी ऐसी ही उम्मीद होगी।
युवा खिलाड़ियों से भी बड़ी अपेक्षाएं
भारतीय दल में कई युवा चेहरे भी शामिल हैं जो पहली बार इतने बड़े मंच पर अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए तैयार हैं। इनमें तेज गेंदबाजों और स्पिनरों की नई पीढ़ी पर विशेष नजर रहेगी। इंग्लैंड की परिस्थितियों में यदि युवा खिलाड़ी दबाव झेलने में सफल रहे तो भारत की राह काफी आसान हो सकती है।
सबसे बड़ी चुनौती ऑस्ट्रेलिया
विश्व क्रिकेट में ऑस्ट्रेलिया अब भी सबसे मजबूत टीमों में गिना जाता है। भारत के लिए सबसे कठिन परीक्षा ऑस्ट्रेलिया जैसी टीमों के खिलाफ होगी, जिन्होंने वर्षों से बड़े टूर्नामेंटों में अपना दबदबा बनाए रखा है।
हालांकि भारतीय टीम अब वह टीम नहीं रही जो केवल मुकाबला करने उतरे। पिछले कुछ वर्षों में उसने यह साबित किया है कि वह दुनिया की किसी भी टीम को हराने की क्षमता रखती है।
महिला क्रिकेट में भारत ने कई यादगार उपलब्धियां हासिल की हैं, लेकिन टी20 विश्व कप ट्रॉफी अब भी उसकी झोली से दूर है। इंग्लैंड में शुरू हो रहा यह अभियान उस अधूरे अध्याय को पूरा करने का अवसर लेकर आया है। यदि हरमनप्रीत कौर की अगुवाई में भारतीय खिलाड़ी अपनी क्षमता के अनुरूप प्रदर्शन करने में सफल रहती हैं तो संभव है कि यह विश्व कप भारतीय महिला क्रिकेट के इतिहास का सबसे स्वर्णिम अध्याय बन जाए और करोड़ों भारतीयों का वर्षों पुराना इंतजार आखिरकार समाप्त हो जाए।






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