कंबोडिया से चल रहे साइबर फ्रॉड का जोधपुर कनेक्शन: 30 बैंक खाते और करोड़ों के नेटवर्क का खुलासा
जोधपुर, नागौर, किशनगढ़ और पंजाब में 7 ठिकानों पर छापे के बाद हुआ खुलासा, फर्जी तरीके से सक्रिय किए गए भारतीय मोबाइल नंबर मलेशियाई नागरिक तक पहुंचाए गए, जिनका इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी में हुआ।...

जोधपुर, नागौर, किशनगढ़ और पंजाब में 7 ठिकानों पर छापे के बाद हुआ खुलासा, फर्जी तरीके से सक्रिय किए गए भारतीय मोबाइल नंबर मलेशियाई नागरिक तक पहुंचाए गए, जिनका इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी में हुआ।
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जोधपुर। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के जयपुर आंचलिक कार्यालय ने साइबर अपराध के एक अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए राजस्थान सहित पंजाब में सात स्थानों पर व्यापक तलाशी अभियान चलाया था। यह कार्रवाई मलेशियाई नागरिक द्वारा किए गए साइबर धोखाधड़ी के मामले में धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत 5 जून 2026 को ईडी की टीमों ने किशनगढ़ (अजमेर), नागौर, जोधपुर तथा लुधियाना (पंजाब) स्थित सात परिसरों पर एक साथ छापेमारी की थी। ईडी ने बुधवार को खुलासा किया है कि कुछ पीओएस (POS) विक्रेताओं ने भारतीय मोबाइल नंबरों को धोखाधड़ीपूर्वक सक्रिय कर विदेशी नागरिकों को उपलब्ध कराया था। बाद में इन्हीं नंबरों का इस्तेमाल कंबोडिया से संचालित साइबर ठगी और ऑनलाइन फ्रॉड गतिविधियों में किया गया।
23 लाख मोबाइल नंबरों की विवेचना में बड़ा खुलासा
साइबर पुलिस स्टेशन, सीआईडी (क्राइम), जोधपुर द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर ईडी ने जांच शुरू की। जांच में सामने आया कि भारत में हजारों भारतीय मोबाइल नंबर धोखाधड़ीपूर्वक सक्रिय किए गए थे। इन नंबरों का उपयोग विभिन्न साइबर अपराधों में किया गया।
जांच एजेंसियों ने करीब 23 लाख मोबाइल नंबरों की समीक्षा की, जिनमें से 36 हजार सिम कार्ड संदिग्ध पाए गए, जबकि लगभग 5,300 सिम कार्ड देशभर में दर्ज सैकड़ों करोड़ रुपये के साइबर धोखाधड़ी मामलों से जुड़े मिले।
इन लोगों की भूमिका जांच में आई सामने
तलाशी और जांच के दौरान ईडी को जानकारी मिली कि राहुल कुमार झा, मोहम्मद शरीफ और संदीप भट्ट ने अन्य सिम विक्रेताओं प्रकाश भील, रामावतार राठी, हरीश मलकार और हेमंत पंवार के साथ मिलकर बड़ी संख्या में सिम कार्ड उपलब्ध कराए।
जांच में सामने आया कि ये सिम विक्रेता विभिन्न दूरसंचार सेवा प्रदाताओं, विशेष रूप से वोडाफोन आइडिया (Vi) के अधिकृत एजेंट (POS Agent) थे। इन एजेंटों को सिम कार्ड जारी करने और सक्रिय करने का अधिकार प्राप्त था।
ईडी के अनुसार आरोपियों ने अपनी अधिकृत पहुंच और तकनीकी सुविधाओं का दुरुपयोग करते हुए फर्जी या भ्रामक जानकारी के आधार पर सिम कार्ड सक्रिय किए। इसके बाद इन सिम कार्डों को साइबर ठगी नेटवर्क तक पहुंचाया गया। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों को यह जानकारी थी कि उनके द्वारा सक्रिय किए गए सिम कार्डों का उपयोग संदिग्ध गतिविधियों में किया जा सकता है।
दस्तावेज जब्त, बैंक खाते और संपत्तियां जांच के घेरे में
तलाशी अभियान के दौरान ईडी ने अपराध से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और अन्य आपत्तिजनक सामग्री जब्त की। साथ ही करीब 30 बैंक खातों की पहचान की गई है, जिनके माध्यम से संदिग्ध वित्तीय लेन-देन होने की आशंका है।
इसके अलावा आरोपित व्यक्तियों से जुड़ी विभिन्न चल एवं अचल संपत्तियों का भी पता चला है। एजेंसी अब इन संपत्तियों के स्रोत, निवेश और धनशोधन से संभावित संबंधों की जांच कर रही है।
देश में साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई
राजस्थान में साइबर अपराध और सिम कार्ड दुरुपयोग से जुड़े मामलों में यह हाल के समय की सबसे महत्वपूर्ण कार्रवाइयों में से एक मानी जा रही है। जांच एजेंसियां अब इस नेटवर्क के विदेशी संपर्कों, वित्तीय लेन-देन और अन्य संभावित सहयोगियों की भूमिका की पड़ताल कर रही हैं।
ईडी का मानना है कि यह नेटवर्क राजस्थान से आगे बढ़कर देश के अन्य राज्यों और विदेशी साइबर अपराध सिंडिकेट से भी जुड़ा हो सकता है। मामले में आगे की जांच जारी है और आने वाले समय में और भी बड़े खुलासे होने की संभावना है।






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