जोधपुर : जहां रेगिस्तान ने पत्रकारिता को आवाज़ दी
जोधपुर की धरती ने रियासतकाल से लेकर वैश्विक मंचों तक पत्रकारिता की समृद्ध परंपरा को सशक्त किया है। हिंदी पत्रकारिता दिवस पर उन सभी ज्ञात-अज्ञात पत्रकारों को नमन, जिनकी कलम ने समाज को दिशा, चेतना और...

भारतीय पत्रकारिता के इतिहास के पन्ने पलटें तो जोधपुर का नाम केवल एक शहर के रूप में नहीं, बल्कि एक जीवंत परंपरा के रूप में सामने आता है। यह वह धरती है जहां शब्दों ने सत्ता से संवाद किया, समाज को दिशा दी और समय के साथ इतिहास को दर्ज किया।रियासतकाल में जब संचार के साधन सीमित थे, तब जोधपुर में मर्दुम शुमारी जैसे प्रकाशन जनजीवन और प्रशासन के बीच सेतु का काम कर रहे थे। समय के साथ यही परंपरा मारवाड़ गजट के रूप में विकसित हुई। मरूधर मित्र को जोधपुर का पहला समाचार पत्र माना जाता है, जिसने जनमत को स्वर देने और पत्रकारिता की नींव मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
राजस्थानी भाषा और लोक चेतना की बात हो तो माणक का योगदान विशेष स्मरणीय है। उन्होंने पत्रकारिता को केवल समाचारों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे भाषा, संस्कृति और जनभावनाओं से जोड़ा। उनके प्रयासों ने राजस्थानी अभिव्यक्ति को नई प्रतिष्ठा दिलाई।जोधपुर की पत्रकारिता की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि यहां की प्रतिभाएं सीमाओं में नहीं बंधीं। राजेंद्र बोडा की आवाज़ बीबीसी लंदन से पूरी दुनिया में गूंजती थी और हिंदी समाचारों के माध्यम से वे लाखों श्रोताओं के लिए विश्वसनीय पहचान बने। प्रो. देव आसोपा ने जर्मन रेडियो से हिंदी समाचार प्रसारित कर यह सिद्ध किया कि मरुधरा की प्रतिभा वैश्विक मंचों पर भी उतनी ही प्रभावशाली है। जोधपुर से जुड़े एक अन्य प्रसारक ने अमेरिका में अपना निजी रेडियो संचालित कर भारतीय भाषाओं और संस्कृति की मशाल विदेशों में जलाए रखी।
पत्रकारिता और सार्वजनिक जीवन के संगम की बात करें तो एच. के. व्यास का नाम आदर से लिया जाता है। वे जोधपुर से विधायक रहे और बाद में दिल्ली के एक प्रमुख समाचार पत्र के प्रधान संपादक बने। वहीं ओम थानवी ने राष्ट्रीय पत्रकारिता में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई और हिंदी पत्रकारिता को व्यापक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय दृष्टि प्रदान की। वरिष्ठ पत्रकार नेमीचंद जैन ‘भावुक’ भी इस गौरवशाली परंपरा के महत्वपूर्ण हस्ताक्षर रहे। वे लंबे समय तक राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित समाचार पत्रों के संवाददाता के रूप में सक्रिय रहे और अपनी जनसरोकारों से जुड़ी पत्रकारिता के लिए सम्मानित हुए।
जोधपुर का पत्रकारिता से रिश्ता केवल समाचार कक्षों तक सीमित नहीं रहा। मुख्यमंत्री रहे जयनारायण व्यास, अचलेश्वर प्रसाद शर्मा, श्रीपाल सिंघी, गोवर्धन हेडाऊ और अनेक अन्य व्यक्तित्वों ने लेखन, विचार और जनसंवाद की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाया। इनके अलावा असंख्य ऐसे नाम हैं जिनकी कलम ने बिना किसी चर्चा या प्रसिद्धि की चाह के समाज को जागरूक बनाने का कार्य किया। इनमें नेमीचंद जैन ‘भावुक’ जैसे समर्पित पत्रकारों का योगदान भी विशेष रूप से स्मरणीय है, जिन्होंने पत्रकारिता को समाज सेवा और जनजागरण का सशक्त माध्यम बनाए रखा।वास्तव में जोधपुर की पत्रकारिता केवल इतिहास नहीं, एक सतत यात्रा है। यह वह मरुधरा है जहां रेत के कणों की तरह अनगिनत कलमकार पैदा हुए, जिन्होंने अपने शब्दों से समाज को दिशा दी।
पत्रकारिता दिवस पर इन सभी ज्ञात-अज्ञात हस्ताक्षरों को नमन करना इसलिए भी आवश्यक है, क्योंकि उनकी मेहनत, निष्ठा और प्रतिबद्धता ने जोधपुर को केवल सांस्कृतिक नगरी ही नहीं, बल्कि भारतीय पत्रकारिता की एक महत्वपूर्ण कर्मभूमि भी बनाया है।





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