साक्षात्कार – तकनीक, जैविक खेती और नवाचार से बदलती राजस्थान की कृषि तस्वीर
सुधांशु टाक,
लेखक एवं विश्लेषक
राजस्थान की धरती आज केवल पारंपरिक खेती की पहचान तक सीमित नहीं रही, बल्कि एग्री-टेक और टिकाऊ कृषि नवाचारों का उभरता हुआ केंद्र बनती जा रही है। इसी बदलते दौर में Cultivator के मैनेजिंग डायरेक्टर तरुण प्रजापति ने आधुनिक शिक्षा, वैश्विक दृष्टिकोण और भारतीय कृषि परंपराओं के संतुलित समन्वय से यह साबित किया है कि वास्तविक नवाचार वही है, जो किसानों, समाज और प्रकृति तीनों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सके। लेखक और विश्लेषक सुधांशु टाक से विशेष बातचीत में तरुण प्रजापति ने एग्री-टेक, एआई (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) आधारित खेती, जल प्रबंधन, जैविक कृषि और ग्रामीण युवाओं के भविष्य जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने बताया कि खेती केवल उत्पादन का माध्यम नहीं, बल्कि प्रकृति और मानव जीवन के बीच संतुलन बनाए रखने की एक जिम्मेदारी भी है।
स्वर्गीय नारायण दास प्रजापति की प्रेरणा और विरासत को आगे बढ़ाते हुए Cultivator का उद्देश्य ऐसी कृषि व्यवस्था विकसित करना है, जहां किसान केवल उत्पादक नहीं, बल्कि सम्मानित और सशक्त भागीदार बने। उनका स्पष्ट मानना है कि त्वरित सफलता से अधिक महत्वपूर्ण दीर्घकालिक प्रभाव होता है, और भविष्य उसी खेती का है जो प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर आगे बढ़े। Cultivator की सोच हमेशा यही रही है, ‘जब किसान सशक्त होगा, तभी देश और भविष्य दोनों सुरक्षित होंगे।’
सवाल- आज राजस्थान जैसे राज्य में एग्री-टेक स्टार्टअप्स के लिए सबसे बड़ा अवसर और सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
तरुण प्रजापति- राजस्थान आज एग्री-टेक के लिए केवल एक राज्य नहीं, बल्कि नवाचार प्रयोगशाला बन चुका है। यहां की जलवायु संबंधी चुनौतियां हमें ऐसी तकनीक विकसित करने के लिए प्रेरित करती हैं, जो कम संसाधनों में अधिक उत्पादन दे सके। सबसे बड़ा अवसर टिकाऊ खेती, जल प्रबंधन और जैविक खेती में है, जहां पूरी दुनिया भारत की ओर देख रही है। लेकिन सबसे बड़ी चुनौती छोटे किसानों तक सही तकनीक, प्रशिक्षण और विश्वास पहुंचाना है। तकनीक तभी सफल मानी जाएगी, जब किसान उसे अपनाने में सहज महसूस करे। हमारा मानना है कि तकनीक का उद्देश्य खेती को जटिल बनाना नहीं, बल्कि किसान को सशक्त बनाना होना चाहिए। राजस्थान की धरती में अपार संभावनाएं हैं, बस उन्हें सही दिशा और वैज्ञानिक सहयोग की आवश्यकता है।
सवाल- Cultivator किन प्रमुख समस्याओं को तकनीक के जरिए किसानों के लिए हल करना चाहता है?
तरुण प्रजापति- हमारा उद्देश्य केवल उत्पाद बनाना नहीं, बल्कि किसानों के जीवन को अधिक सुरक्षित, स्थायी और लाभकारी बनाना है। हम किसानों की सबसे बड़ी समस्याएं मिट्टी की गुणवत्ता, जल संरक्षण, उचित मूल्य और फसल की ट्रेसबिलिटी को तकनीक और वैज्ञानिक खेती के माध्यम से हल करने का प्रयास कर रहे हैं। हम पुनर्जीवित जैविक खेती, गुणवत्ता परीक्षण और वैश्विक प्रमाणनों के जरिए किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाज़ार से जोड़ने का कार्य कर रहे हैं। हमारा मानना है कि किसान केवल उत्पादक नहीं, बल्कि प्रकृति का संरक्षक है। हम ऐसी खेती को बढ़ावा देना चाहते हैं, जहां किसान की आय बढ़े, मिट्टी जीवित रहे और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रकृति सुरक्षित बनी रहे।
सवाल- क्या आपको लगता है कि एआई, इंटरनेट ऑफ थिंग्स और ड्रोन जैसी तकनीकें छोटे किसानों तक व्यावहारिक रूप से पहुंच पा रही हैं, या अभी यह केवल बड़े किसानों तक सीमित हैं?
तरुण प्रजापति- शुरुआत में ये तकनीकें केवल बड़े किसानों तक सीमित थीं, लेकिन अब धीरे-धीरे छोटे किसान भी इनके लाभ को समझने लगे हैं। भारत में स्मार्टफोन और इंटरनेट की बढ़ती पहुंच ने इस बदलाव को गति दी है। एआई आधारित सलाह, सेंसर तकनीक और ड्रोन अब खेती को अधिक सटीक, कम लागत वाली और वैज्ञानिक बना रहे हैं। हालांकि अभी भी जागरूकता और वहनीयता एक बड़ी चुनौती है। हमें ऐसी किसान-अनुकूल तकनीक विकसित करनी होगी, जो सरल भाषा, कम लागत और स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप हो। हमारा विश्वास है कि आने वाला समय समावेशी एग्री-टेक का होगा, जहां तकनीक हर किसान तक पहुंचेगी।
सवाल- राजस्थान की जलवायु और पानी की कमी को देखते हुए एग्री-इनोवेशन में कौन-सी तकनीक सबसे ज्यादा असर डाल सकती है?
तरुण प्रजापति- राजस्थान जैसे राज्य में जल प्रबंधन आधारित तकनीक ही भविष्य की सबसे महत्वपूर्ण कृषि तकनीक है। सूक्ष्म सिंचाई, मिट्टी की नमी की निगरानी और एआई आधारित जल प्रबंधन प्रणाली खेती में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती हैं। इसके साथ पुनर्जीवित खेती और जैविक मिट्टी प्रबंधन, मिट्टी की जलधारण क्षमता को बढ़ाने में अत्यंत प्रभावी हैं। यदि किसान कम पानी में अधिक पोषण वाली खेती अपनाएं, तो राजस्थान पूरी दुनिया के लिए टिकाऊ कृषि का उदाहरण बन सकता है। भविष्य उसी खेती का है, जो प्रकृति के साथ संघर्ष नहीं, बल्कि संतुलन बनाकर चले।
सवाल- किसी ऐसे नवाचार का उदाहरण साझा कीजिए, जिसने किसानों की आय या उत्पादकता में वास्तविक बदलाव किया हो।
तरुण प्रजापति- हमारे लिए सबसे प्रभावशाली बदलाव जैविक और ट्रेसबिलिटी आधारित खेती मॉडल रहा है। जब किसानों को केवल उत्पादन तक सीमित न रखकर गुणवत्ता आधारित अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों से जोड़ा गया, तब उनकी आय और आत्मविश्वास दोनों में वास्तविक परिवर्तन देखने को मिला। हमने अपनी शिक्षा और वैश्विक दृष्टिकोण को भारतीय कृषि की जड़ों से जोड़ते हुए किसानों के लिए ऐसा मॉडल विकसित किया, जहां वैज्ञानिक खेती, वैश्विक जैविक प्रमाणन और निष्पक्ष व्यापार व्यवस्था को प्राथमिकता दी गई। इस सोच की प्रेरणा कंपनी के संस्थापक स्वर्गीय नारायणदास प्रजापति की दूरदर्शिता से मिली, जिन्होंने हमेशा प्रकृति, किसानों और शुद्ध खेती को व्यवसाय से ऊपर रखा। कई किसानों ने पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर औषधीय पौधों और जैविक वनस्पति खेती को अपनाया, जिससे उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। यह केवल आर्थिक बदलाव नहीं था, बल्कि किसानों के सम्मान, आत्मनिर्भरता और अगली पीढ़ी के भविष्य को मजबूत करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।
सवाल- युवा उद्यमियों के लिए एग्री-टेक क्षेत्र में फंडिंग जुटाना कितना कठिन है?
तरुण प्रजापति- एग्री-टेक में फंडिंग चुनौतीपूर्ण जरूर है, लेकिन असंभव नहीं। निवेशक अब ऐसे स्टार्टअप्स को महत्व दे रहे हैं, जो केवल लाभ नहीं, बल्कि स्थायित्व और सामाजिक प्रभाव पर काम कर रहे हों। सबसे महत्वपूर्ण है स्पष्ट दृष्टि, जमीनी समझ और दीर्घकालिक प्रतिबद्धता। कृषि क्षेत्र में परिणाम धीरे-धीरे सामने आते हैं, इसलिए धैर्य और विश्वसनीयता बहुत जरूरी है। हम मानते हैं कि यदि आपका उद्देश्य किसानों और प्रकृति दोनों के हित में है, तो सही लोग और सही अवसर समय के साथ आपके साथ जुड़ते जाते हैं।
सवाल- क्या भारत में किसान अब तकनीक अपनाने के लिए पहले से ज्यादा तैयार हैं? इस बदलाव के पीछे क्या कारण हैं?
तरुण प्रजापति- भारतीय किसान अब पहले से कहीं अधिक जागरूक और तकनीक के प्रति खुला है। कोविड के बाद किसानों ने डिजिटल मंचों, ऑनलाइन जानकारी और बाज़ार से सीधे जुड़ने की ताकत को समझा है। नई पीढ़ी के किसान अब केवल खेती नहीं, बल्कि कृषि उद्यमिता की सोच के साथ आगे बढ़ रहे हैं। सरकारी योजनाएं, मोबाइल इंटरनेट और सफलता की वास्तविक कहानियों ने इस बदलाव को गति दी है। आज किसान यह समझ चुका है कि तकनीक केवल सुविधा नहीं, बल्कि भविष्य की आवश्यकता है।
सवाल- आने वाले पांच वर्षों में आपको कौन-सा एग्री-टेक ट्रेंड सबसे ज्यादा परिवर्तनकारी लगता है?
तरुण प्रजापति- हमें लगता है कि एआई आधारित सटीक कृषि और पुनर्जीवित जैविक खेती आने वाले वर्षों में सबसे अधिक परिवर्तनकारी साबित होंगे। भविष्य की खेती केवल अधिक उत्पादन पर नहीं, बल्कि मिट्टी के स्वास्थ्य, जल संरक्षण और पोषण गुणवत्ता पर आधारित होगी। ट्रेसबिलिटी और ब्लॉकचेन जैसी तकनीकें उपभोक्ताओं को यह जानने में मदद करेंगी कि उनका भोजन कहां और कैसे उगाया गया है। दुनिया अब स्वच्छ, नैतिक और पारदर्शी कृषि की ओर बढ़ रही है, और भारत इस परिवर्तन का नेतृत्व कर सकता है।
सवाल- ग्रामीण युवाओं को एग्री-इनोवेशन और स्टार्टअप्स की तरफ आकर्षित करने के लिए क्या बदलाव जरूरी हैं?
तरुण प्रजापति- सबसे पहले हमें खेती की छवि बदलनी होगी। कृषि केवल पारंपरिक श्रम नहीं, बल्कि नवाचार, विज्ञान और उद्यमिता का क्षेत्र है। ग्रामीण युवाओं को आधुनिक प्रशिक्षण, डिजिटल शिक्षा और बाज़ार संबंधी अनुभव देना बहुत जरूरी है। यदि गांवों में कृषि इनक्यूबेशन केंद्र, कौशल विकास कार्यक्रम और तकनीकी प्रयोगशालाएं विकसित हों, तो युवा खेती को एक सम्मानजनक और लाभकारी करियर के रूप में अपनाएंगे। हमें युवाओं को यह विश्वास दिलाना होगा कि नवाचार का भविष्य गांवों से भी जन्म ले सकता है।
सवाल- अगर आज कोई युवा राजस्थान से एग्री-टेक स्टार्टअप शुरू करना चाहता है, तो आप उसे सबसे पहली सलाह क्या देंगे?तरुण प्रजापति- मैं उसे यही सलाह दूंगा कि पहले किसान को समझिए, फिर तकनीक बनाइए। जमीनी वास्तविकता से जुड़ाव सबसे महत्वपूर्ण है, क्योंकि खेती केवल आंकड़ों का विषय नहीं, बल्कि भावनाओं, प्रकृति और जीवन से जुड़ी हुई प्रक्रिया है।







No Comment! Be the first one.