साक्षात्कार – मास्टरशेफ तक का सफर तय करने वाली महिला उद्यमी कौशल्या चौधरी से खास बातचीत
डॉ. मधु बैनर्जी,
वरिष्ठ पत्रकार
राजस्थान की मिट्टी के देसी स्वाद, मारवाड़ी संस्कृति की खुशबू और घरेलू परंपराओं को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़कर देशभर में पहचान दिलाने वाली जोधपुर के कुड़ी गांव की कौशल्या चौधरी आज हजारों महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। कभी गांव की साधारण गृहिणी रहीं कौशल्या चौधरी ने अपने संघर्ष, आत्मविश्वास और मेहनत के दम पर ऐसा मुकाम हासिल किया कि आज उनका ‘सीधी मारवाड़ी’ ब्रांड देशभर में अपनी पहचान बना चुका है। यूट्यूब पर लाखों सब्सक्राइबर, देशभर में 58 स्टोर, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मजबूत उपस्थिति और टीवी के लोकप्रिय शो मास्टर शेफ इंडिया तक पहुंचना उनके संघर्ष और सफलता की कहानी को खास बनाता है।
राजस्थान टुडे के लिए वरिष्ठ पत्रकार डॉ. मधु बैनर्जी ने उनसे उनके संघर्ष, समाज, महिलाओं की चुनौतियों, डिजिटल क्रांति और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तृत बातचीत की तो उन्होंने संघर्ष से अपनी सफलता को कुछ यूं बयां किया…
प्रश्न : मारवाड़ी समाज महिलाओं को कितना सपोर्ट करता है? महिलाओं के आगे बढ़ने में सबसे बड़ी मानसिक रुकावट क्या है?
कौशल्या चौधरी : देखिए, समाज हमेशा परिस्थितियों के हिसाब से बनता और बदलता है। पहले के समय में गांवों का जीवन अलग था। पुरुष बाहर जाकर व्यापार, खेती या मजदूरी करते थे और महिलाओं की जिम्मेदारी घर, बच्चे और परिवार संभालने की होती थी। उस दौर में सुरक्षा, संसाधनों की कमी और सामाजिक व्यवस्था के कारण महिलाओं को बाहर जाकर काम करने के अवसर कम मिलते थे। यही सबसे बड़ी मानसिक रुकावट थी। लेकिन आज समय बदल चुका है। महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि पहले महिलाओं को अवसर नहीं मिलते थे, अब जब शिक्षा, तकनीक और अवसर बढ़ गए हैं तो सोच भी बदलनी चाहिए। आज महिलाएं घर के साथ बिजनेस, राजनीति, प्रशासन, सोशल मीडिया और हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही हैं।
प्रश्न : आपकी खुद की यात्रा कैसी रही? क्या बचपन से कुछ अलग करने का सपना था?
कौशल्या चौधरी : मैं गांव के माहौल में पली-बढ़ी हूं। बचपन बहुत साधारण था। कम उम्र में शादी होने से पढ़ाई बीच में रुक गई। सच कहूं तो उस समय इतनी समझ भी नहीं थी कि जिंदगी में आगे क्या करना है। लेकिन शादी के बाद धीरे-धीरे महसूस हुआ कि मेरे अंदर कुछ अलग करने की तमन्ना है। हालांकि उस समय संसाधन बहुत सीमित थे। गांव का माहौल, परिवार की जिम्मेदारियां, बच्चों की परवरिश, इन सबके बीच अपने लिए समय निकालना आसान नहीं था। फिर मैंने यूट्यूब के बारे में जाना। मैंने सोचा कि अगर लोग हिंदी और अंग्रेजी में वीडियो बना सकते हैं तो मैं अपनी मारवाड़ी भाषा में क्यों नहीं बना सकती? जनवरी 2019 में हमने चैनल शुरू किया। सबसे पहले तो मोबाइल खरीदा। बिना संसाधनों के बहुत मुश्किल से कभी छत पर थर्मोकोल लगाकर, लाइट लटका कर तो कभी कैमरा लटका कर मोबाइल से वीडियो रिकॉर्ड किए। एक डेढ़ साल में मेरे मात्र 100 सब्सक्राइबर थे। रेसिपी बनाने की सामग्री का खर्च निकालना भी मुश्किल था। धीरे-धीरे घर की देसी रसोई, घरेलू तरीके और मारवाड़ी अंदाज लोगों को पसंद आने लगा। डेढ़ साल की मेहनत के बाद चैनल मोनेटाइज हो गया। 1000 सब्सक्राइबर और 4000 घंटे वॉच टाइम की शर्त बहुत जल्दी पूरी हो गई। आज करीब 18 लाख लोग हमारे यूट्यूब चैनल से जुड़े हुए हैं।
प्रश्न : क्या परिवार का सहयोग शुरू से मिला?
कौशल्या चौधरी : सबसे बड़ा सपोर्ट मेरे पति का रहा। अगर परिवार साथ न दे तो महिलाओं के लिए आगे बढ़ना मुश्किल हो जाता है। शुरुआत में परिवार और रिश्तेदारों को समझ नहीं आता था कि यह काम आखिर है क्या। मुझे अपने काम पर भरोसा था। धीरे-धीरे जब लोगों ने रिजल्ट देखे तो परिवार का विश्वास भी बढ़ता गया। महिलाओं के लिए सबसे जरूरी है कि वे खुद पर भरोसा रखें। अगर इरादा मजबूत है तो एक दिन लोग आपका साथ जरूर देते हैं।
प्रश्न : मास्टरशेफ तक पहुंचने का सफर कैसा रहा?
कौशल्या चौधरी : यह मेरे जीवन का बहुत खास अनुभव रहा। गांव की रसोई से निकलकर इतने बड़े मंच तक पहुंचना किसी सपने जैसा था। मैंने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन मैं इतने बड़े शो का हिस्सा बनूंगी। लेकिन यही डिजिटल प्लेटफॉर्म की ताकत है। जब लोग आपके काम को पसंद करते हैं तो आपकी पहचान दूर तक पहुंचती है। हमारी पारंपरिक मारवाड़ी रेसिपीज और घरेलू स्वाद लोगों को पसंद आए। उसी ने मुझे आगे बढ़ने का आत्मविश्वास दिया।
प्रश्न : क्या आज भी महिलाओं को परिवार और करियर में से किसी एक को चुनने का दबाव झेलना पड़ता है?
कौशल्या चौधरी : कई जगह आज भी ऐसा होता है। खासकर छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं से उम्मीद की जाती है कि वे पहले परिवार को प्राथमिकता दें। लेकिन मुझे लगता है कि अब संतुलन बनाना सीखना होगा। महिलाएं बहुत जिम्मेदार होती हैं। वे घर भी संभाल सकती हैं और अपना काम भी कर सकती हैं। जरूरत सिर्फ परिवार के सहयोग और सही सोच की है। अगर एक महिला आगे बढ़ती है तो उसका फायदा सिर्फ उसे नहीं, पूरे परिवार और समाज को होता है। इसलिए महिलाओं को रोकने के बजाय उन्हें अवसर देना चाहिए।
प्रश्न : छोटे शहरों और गांवों की महिलाओं के लिए सबसे ज्यादा अवसर किस क्षेत्र में हैं?
कौशल्या चौधरी : आज के समय में सबसे बड़ा अवसर डिजिटल दुनिया में है। सोशल मीडिया और इंटरनेट ने गांव और शहर के बीच की दूरी खत्म कर दी है। अगर किसी महिला को सिलाई आती है, खाना बनाना आता है, खेती की जानकारी है या कोई भी हुनर है, तो वह उसे ऑनलाइन दुनिया तक पहुंचा सकती है। पहले व्यापार के लिए बाजार, दुकान और बड़े निवेश की जरूरत होती थी। लेकिन आज एक मोबाइल फोन भी बिजनेस शुरू करने का माध्यम बन सकता है। मैं हमेशा महिलाओं से कहती हूं कि शुरुआत छोटी करें लेकिन सोच बड़ी रखें।
प्रश्न : सोशल मीडिया ने महिलाओं की जिंदगी में कितना बदलाव किया है?
कौशल्या चौधरी : बहुत बड़ा बदलाव आया है। पहले महिलाओं को घर से बाहर निकलने में भी कई सीमाएं थीं। लेकिन आज सोशल मीडिया ने उन्हें आवाज और पहचान दोनों दी है। कोरोना काल में हमने देखा कि लोग घर बैठे ऑनलाइन पढ़ाई, व्यापार और नौकरी कर रहे थे। उसी तरह महिलाएं भी घर बैठे अपना बिजनेस संभाल सकती हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि अब पहचान बनाने के लिए बड़े शहर जाने की जरूरत नहीं है। अगर आपके पास हुनर है तो सोशल मीडिया आपको दुनिया तक पहुंचा सकता है।
प्रश्न : आपने संघर्ष के दौरान क्या सबसे बड़ी सीख हासिल की?
कौशल्या चौधरी : सबसे बड़ी सीख यही है कि बिना जानकारी के किसी भी क्षेत्र में कदम नहीं रखना चाहिए। मैंने अपने काम में कई गलतियां कीं। कई बार लोगों पर भरोसा किया और नुकसान भी उठाया। एक समय ऐसा भी आया जब हमने ऐप बनवाने के लिए लाखों रुपए लगाए, लेकिन सही जानकारी न होने के कारण हमें नुकसान उठाना पड़ा। उस समय समझ आया कि किसी भी काम में उतरने से पहले उसकी पूरी जानकारी होना जरूरी है।
प्रश्न : आपको क्या लगता है? सरकारी योजनाओं का लाभ महिलाओं तक पहुंच रहा है?
कौशल्या चौधरी : सरकार महिलाओं के लिए बहुत योजनाएं चलाती है। लेकिन जानकारी की कमी सबसे बड़ी समस्या है। गांवों में आज भी कई महिलाओं को पता ही नहीं होता कि उनके लिए कौन-कौनसी योजनाएं हैं। अगर सही मार्गदर्शन मिले तो महिलाएं इन योजनाओं का बहुत अच्छा लाभ उठा सकती हैं।
प्रश्न : नई शुरुआत करने वाली महिलाओं को क्या संदेश देना चाहेंगी?
कौशल्या चौधरी : सबसे पहले खुद पर भरोसा रखिए। कोई भी काम छोटा नहीं होता। दूसरी बात, सीखना कभी बंद मत कीजिए। दुनिया बहुत तेजी से बदल रही है। तकनीक के साथ चलना जरूरी है। और सबसे जरूरी बात, डरिए मत। अक्सर महिलाएं सोचती हैं कि लोग क्या कहेंगे। लेकिन जब आप सफल होती हैं तो वही लोग आपकी तारीफ भी करते हैं।
प्रश्न : भविष्य को लेकर आपका सपना क्या है?
कौशल्या चौधरी : मैं चाहती हूं कि ज्यादा से ज्यादा ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भर बनें। महिलाएं अपनी भाषा, संस्कृति और हुनर पर गर्व करें। हमारी कोशिश है कि मारवाड़ी स्वाद और राजस्थान की परंपरा को देश-दुनिया तक पहुंचाएं। साथ ही ऐसी महिलाओं को प्रेरित करें जो अपने सपनों को सिर्फ इसलिए रोक देती हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि वे कुछ नहीं कर सकतीं। अगर एक गांव की महिला यूट्यूब और सोशल मीडिया के जरिए मास्टरशेफ तक पहुंच सकती है, तो आज हर महिला के लिए रास्ते खुले हैं। जरूरत सिर्फ पहला कदम उठाने की है।







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