मारवाड़ में भगवा लहर
कई जगह मुकाबले इतने रोचक हुए कि लोग चौंक गए। भाजपा प्रदेशाघ्यक्ष मदन राठौड़ के गृह जिले पाली में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरने के बाद भी अपना बोर्ड नहीं बना सकी और वहां भाजपा ने अपना...

जोधपुर सम्भाग
हाल ही सम्पन्न जोधपुर सम्भाग के निकाय चुनावों में सत्ताधारी भाजपा अपना सियासी गढ़ बचाने में न सिर्फ कामयाब रही, बल्कि वार्डों के चुनाव में कड़ी टक्कर देने के बावजूद कांग्रेस बोर्ड बनाने की चढ़ाई में फिसल कर धड़ाम से नीचे आ गिरी। सिर्फ सिरोही व जालोर जिला मुख्यालयों में कांग्रेस बोर्ड बना सकी, बाकी सभी जगह भाजपा ने अपने बहुमत व निर्दलीयों की मदद से बोर्ड बना लिए।
Table Of Content
सम्भाग मुख्यालय जोधपुर के अलावा पाली, बाड़मेर, बालोतरा, जैसलमेर, जालोर, सिरोही और फलोदी जिलों के 41 नगरीय निकायों के 1330 वार्डों में हुए चुनाव के बाद भाजपा ने बोर्ड बनाने के मामले में बाजी मार ली, लेकिन वार्डों और मतों के मामले में उसे कांग्रेस से कड़े मुकाबला का सामना करना पड़ा। भाजपा ने 657 वार्डों में विजय हासिल की तो कांग्रेस के खाते में भी 481 वार्ड आए, जबकि 187 में निर्दलीय प्रत्याशियों व पांच में रालोपा ने जीत हासिल की। भाजपा ने 41 में से 36 निकायों में बोर्ड बना लिए, जबकि कांग्रेस पांच निकायों में ही अपने सभापति बनवा सकी। कई जगह मुकाबले इतने रोचक हुए कि लोग चौंक गए। भाजपा प्रदेशाघ्यक्ष मदन राठौड़ के गृह जिले पाली में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरने के बाद भी अपना बोर्ड नहीं बना सकी और वहां भाजपा ने अपना परचम लहरा दिया।
सम्भाग के निकायों के परिणाम और शहर की सरकार पर कब्जे की तुलना करें तो सामने आता है कि वार्डों के चुनाव में भले ही दोनों दलों में कांटे की टक्कर रही, लेकिन बोर्ड बनाने की लड़ाई में बड़ा अंतर आ गया। कई निकायों में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, लेकिन बोर्ड नहीं बना सकी। दूसरी तरफ भाजपा कई जगह बहुमत से पीछे रहते हुए भी निर्दलीयों के समर्थन से अध्यक्ष, सभापति या महापौर पद हासिल करने में सफल रही। कुल मिलाकर कहानी ये नहीं है कि जोधपुर सम्भाग में भाजपा ने कांग्रेस को बुरी तरह पछाड़ दिया, लेकिन इसमें कोई दो राय नहीं है कि भाजपा ने जीती हुई सीटों को अन्य विजेताओं की मदद से स्थानीय सत्ता में बदलने की क्षमता में कांग्रेस को बुरी तरह मात दी है। भाजपा को स्थानीय सत्ता के स्तर पर स्पष्ट बढ़त मिली है, लेकिन कांग्रेस ने भी अपना अस्तित्व बचाए रखने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
बड़ी ताकत बनकर उभरे निर्दलीय
इन चुनावों निर्दलीय भी एक ताकत बनकर उभरे हैं। पाली, जोधपुर, जालोर, सिरोही, पोकरण और फलोदी सहित अनेक निकायों में निर्दलीय पार्षदों ने बोर्ड गठन में निर्णायक भूमिका निभाई। सम्भाग में 190 वार्डों में जीत के अलावा कई जगह सत्ता का ताला निर्दलीयों की चाबी से ही खुला है। राज्य स्तर पर भी लगभग 27 प्रतिशत वोट लेकर निर्दलीयों ने संकेत दे दिया है कि प्रमुख दलों के आधिकारिक उम्मीदवारों से असंतुष्ट स्थानीय मतदाता हमेशा दूसरे प्रमुख दल की ओर नहीं जाता। वह निर्दलीय को भी विकल्प बना सकता है। इस स्थिति ने प्रदेश के दोनों ही प्रमुख दलों के सामने उम्मीदवार चयन और स्थानीय संगठन की स्थिति को चुनौती पूर्ण बना दिया है।
जोधपुर जिले में कड़ा मुकाबला
जोधपुर जिले में कड़ा मुकाबला देखने को मिला। जिले के सात निकायों के 275 वार्डों में भाजपा ने 129 और कांग्रेस ने 120 वार्ड जीते। निर्दलीयों के खाते में 23 व रालोपा को 3 वार्डों में जीत हासिल हुई। सम्भाग में सबसे कड़ा मुकाबला भी जोधपुर नगर निगम में हुआ। यहां के 100 वार्डों में से भाजपा को 45, कांग्रेस 44, निर्दलीय 10 व एक में रालोपा जीती, लेकिन भाजपा ने सात निर्दलीय अपने पक्ष में कर निगम में अपना बोर्ड बना लिया।
साल 2020 में जोधपुर में दो नगर निगम के 160 वार्ड थे। उस चुनाव में कांग्रेस ने नगर निगम उत्तर और भाजपा ने नगर निगम दक्षिण में अपने बोर्ड बनाए थे। संयुक्त रूप से कांग्रेस व भाजपा के पास क्रमशः 82 व 62 वार्ड थे, लेकिन हाल ही हुए चुनाव में एक निगम बनने के बाद दोनों ही पार्टियां लगभग बराबरी पर आ गई। जिले में नई बनी नगर पालिकाओं मथानिया, तिंवरी, भोपालगढ़ व बालेसर सता तथा पहले से मौजूद बिलाड़ा व पीपाड़ में भी दोनों दलों में टक्कर नजर आई, लेकिन कांग्रेस मथानिया व पीपाड़ में ही बोर्ड बना सकी। भोपालगढ़ में बहुमत के बावजूद भाजपा का सभापति चुन लिया गया।
पाली में बागी ने बिगाड़ा कांग्रेस का खेल
पाली के 10 निकाय में 320 वार्ड में से भाजपा ने 161, कांग्रेस ने 102 और निर्दलीयों व अन्य ने 57 वार्ड जीते। पाली नगर निगम में कांग्रेस 29 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी, लेकिन महापौर के चुनाव में कांग्रेस की बागी राजबाला हिंगड़ ने खेल बिगाड़ दिया। भाजपा की नमिता बुबकिया 33 वोट हासिल कर महापौर बन गई। हिंगड़ 29 वोट ले गई और कांग्रेस प्रत्याशी सुमित्रा केवल तीन वोट मिले। जिले के अन्य निकायों में कांग्रेस को उबरने का मौका तक नहीं मिला। सोजत सिटी, सोजत रोड, सुमेरपुर, तख्तगढ़ व बाली में भाजपा भारी रही। केवल मारवाड़ जंक्शन में कांग्रेस-भाजपा को 11-11 वार्डों में सफलता मिली और आखिरी बोर्ड बनाने की लॉटरी भाजपा के नाम खुल गई।
बाड़मेर में 15 साल बाद फिर भाजपा
बाड़मेर में भाजपा ने 15 साल बाद वापस नगर परिषद पर कब्जा जमाया। परिषद के 55 वार्डों में से भाजपा ने 29 सीटें हासिल कर बहुमत हासिल कर लिया, जबकि कांग्रेस को 21 व निर्दलीयों को पांच सीटें मिली। जिले की चौहटन नगरपालिका में कांग्रेस एक भी सीट नहीं जीत सकी। वहां भाजपा के 11 व 9 निर्दलीय जीते और भाजपा ने आसानी से बोर्ड बना लिया।
जैसलमेर में कड़ा मुकाबला, सभापति भाजपा का
जैसलमेर नगर परिषद व पोकरण नगरपालिका में मुकाबला बराबर का रहा। भाजपा ने जैसलमेर परिषद में बहुमत हासिल कर अपना सभापति चुनवा लिया। भाजपा ने 45 सदस्यीय बोर्ड में 25 सीटें हासिल की, जबकि कांग्रेस को 16 व चार सीटें निर्दलीयों ने जीती। पोकरण की 25 सदस्यीय नगर पालिका में कांग्रेस ने 12 व भाजपा ने 11 सीटें जीती। दो वार्ड निर्दलीयों के खाते में गए, लेकिन बोर्ड पर कांग्रेस ने कब्जा जमा लिया।
बालोतरा में भी भारी पड़ी भाजपा
नवगठित बालोतरा जिले के सात निकायों के 185 में से 105 वार्डों में जीत हासिल कर भाजपा भारी पड़ी। कांग्रेस को 62 व निर्दलीयों को 18 वार्डों में जीत मिली, लेकिन सभी सात निकायों में कमल ही खिला। बालोतरा नगर परिषद के साथ जसोल, समदड़ी, सिवाना, सिणधरी, गुड़ामलानी व धोरीमन्ना में सभी जगह भाजपा को स्पष्ट बहुमत मिला। कांग्रेस कहीं भी मुकाबले में नजर नहीं आई।
जालोर में कांग्रेस की वापसी
जालोर जिले में कांग्रेस झंडे तो नहीं गाढ़ सकी, लेकिन जिला मुख्यालय की नगर परिषद में बहुमत से दो सीट कम होने के बावजूद उसने अपना सभापति बनवा कर वापसी कर ली। लम्बे अरसे से भाजपा का गढ़ रहे जालोर में कांग्रेस सबसे बड़े दल के रूप में उभरी थी। वहां उसे 19, भाजपा को 14 व निर्दलीयों को सात वार्डों में जीत मिली थी, लेकिन कांग्रेस ने चार निर्दलीयों को अपने पक्ष में करके बोर्ड बना लिया। जिले के पांच निकायों में 165 वार्डों के चुनाव में भाजपा को 82, कांग्रेस को 50 व निर्दलीयों को 33 सीटें मिली। जालोर के अलावा कांग्रेस भीनमाल, सांचौर, आहोर व सायला में सभी जगह वार्डों की संख्या में भाजपा से पीछे ही रही और इन सभी में भाजपा के बोर्ड बने।
सिरोही में भाजपा को कड़ी टक्कर
सिरोही के छह निकायों में 180 वार्डों में से 79 पर जीत हासिल कर कांग्रेस ने भाजपा को कड़ी टक्कर दी। भाजपा 77 तो निर्दलीय व अन्य 24 वार्डों में जीते। सिरोही में कांग्रेस ने बोर्ड भी बना लिया। पिंडवाड़ा में कांग्रेस बहुमत हासिल करने के बाद भी अपना बोर्ड नहीं बना सकी। शिवगंज, आबूरोड, माउंट आबू व मंडार नगर पालिकाओं के चुनाव में भाजपा व कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर रही, लेकिन बोर्ड बनाने में भाजपा ने बाजी मार ली।
फलोदी में भी भाजपा का परचम
नए बने फलोदी जिले के दो निकायों फलोदी नगर परिषद व पहली बार बनी बाप नगर पालिका में भाजपा ने कब्जा किया। दोनों निकायों के 60 वार्डों में से भाजपा ने 27, कांग्रेस ने 19 व निर्दलीयों ने 14 वार्ड जीते।
——
संभाग के आंकड़ों की कहानी
निकाय- 41
वार्ड- 1330
भाजपा- 657
कांग्रेस- 481
निर्दलीय- 187
रालोपा- 10
——
बोर्ड
भाजपा- 36
कांग्रेस- 05






No Comment! Be the first one.