हाई प्रोफाइल मुकाबले में बंटा जनादेश
जयपुर संभाग के निकाय चुनावों में भाजपा और कांग्रेस के बीच कड़ा मुकाबला रहा। भाजपा ने अधिक निकायों में बोर्ड बनाए, लेकिन कई जिलों में कांग्रेस और निर्दलीयों ने चुनौती दी, जिससे मिश्रित जनादेश...

जयपुर संभाग
मनीष गोधा,
वरिष्ठ पत्रकार
Table Of Content
- जयपुर संभाग
- नगर निगमों में भाजपा का औसत प्रदर्शन
- जयपुर – जनादेश निर्दलीयों के साथ, बोर्ड भाजपा ने बनाए
- अलवर जिला- भाजपा बेहतर स्थिति में
- दौसा- कांग्रेस ने किया बेहतर प्रदर्शन
- झुंझुनूं – निर्दलीयों के आगे सब फेल
- कोटपूतली-बहरोड़ – निर्दलीयों ने बाजी मारी
- सीकर – कांग्रेस का दबदबा
- खैरथल-तिजारा- भाजपा का दमदार प्रदर्शन
प्रदेश के सबसे बड़े और राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण जयपुर संभाग में सत्तारूढ़ भाजपा और कांग्रेस के बीच लगभग बराबर की टक्कर देखने को मिली। जयपुर संभाग में राजधानी जयपुर, अलवर, सीकर और दौसा भाजपा और कांग्रेस के हैवीवेट नेताओं के जिले हैं। खुद मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, दोनों उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी और प्रेमचन्द बैरवा, मंत्री राज्यवर्धन राठौड़, संजय शर्मा, केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविन्दसिंह डोटासरा, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट जैसे नेता इन जिलों से आते हैं। ऐसे में इस संभाग के चुनावी मुकाबले पर पूरे प्रदेश की नजर थी और मुकाबला भी रोचक हुआ। संभाग के कुल 90 निकायों में भाजपा 49 और कांग्रेस 40 निकायों में बोर्ड बनाने में कामयाब रही। एक निकाय निर्दलीय के नाम रहा। चुनाव परिणाम में भी दोनों दलों के बीच सीटों में बहुत ज्यादा अंतर नहीं था और निर्दलीयों ने दोनों ही दलों को अच्छी टक्कर दी।
चुनाव परिणाम में भाजपा संभाग के जयपुर, अलवर और खैरथल- तिजारा में बेहतर प्रदर्शन करती दिखी। वही कांग्रेस के लिए दौसा, झुंझुनूं और सीकर जिले अच्छे रहे। वही कोटपुतली-बहरोड़ में निर्दलीयों का वर्चस्व दिखा। वैसे चुनाव परिणाम में निर्दलीयों ने पूरे संभाग में ही अच्छा प्रदर्शन किया। जयपुर, झुंझुनूं में तो कई संभागों में निर्दलीय ही किंगमेकर बने नजर आए।
कुल मिलाकर इस संभाग के शहरी मतदाता ने विधानसभा और लोकसभा का ट्रेंड निकाय चुनाव में भी कमोबेश बनाए रखा है। विधानसभा और लोकसभा चुनाव में सीकर, झुंझुनूं और दौसा जैसे जिलों में कांग्रेस ने अच्छी जीत हासिल की थी और वहीं स्थिति इस बार भी दिखी। यह भाजपा के लिए चिंता की स्थिति हो सकती है कि ढाई साल के शासन के बाद भी पार्टी इन जिलों के मतदाता को अपेक्षा के अनुरूप साध नहीं पाई। नए बने जिलों खैरथल- तिजारा और बहरोड- कोटपुतली के मतदाता ने ना तो जिला बनाने वाली कांग्रेस को निहाल किया और ना ही जिला बनाए रखने वाली भाजपा को पूरा समर्थन दिया।
राजधानी जयपुर हमेशा की तरह इस चुनाव में भी भाजपा का गढ़ साबित हुई। पार्टी यहां एक बार फिर नगर निगम में बहुमत पाने और बोर्ड बनाने में सफल रही। चुनाव से पहले कराए गए परिसीमन का पार्टी ने पूरा फायदा उठाया। कांग्रेस जयपुर शहर में टिकिट वितरण में फेल साबित हुई और गुटबाजी ने एक बार फिर कांग्रेस को हरा दिया।
नगर निगमों में भाजपा का औसत प्रदर्शन
जयपुर संभाग में जयपुर और अलवर दो नगर निगम हैं और इनमें भाजपा का प्रदर्शन ठीकठाक रहा। प्रदेश के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित जयपुर नगर निगम में भाजपा 78 सीटों के साथ स्पष्ट बहुमत हासिल कर गई और बोर्ड बनाने में भी सफल रही, हालांकि यह अपेक्षा के अनुरूप नहीं है, क्योंकि पार्टी बहुमत से सिर्फ दो सीट ज्यादा हासिल कर पाई है, जबकि मुख्यमंत्री, दोनों उपमुख्यमंत्री और एक कैबिनेट मंत्री जयपुर से हैं। जयपुर को पार्टी का गढ़ माना जाता है। यहां के दस विधानसभा क्षेत्रों में से पार्टी बगरू और आदर्श नगर में कांग्रेस से पिछड़ गई थी, जबकि सिविल लाइंस में बीजेपी और कांग्रेस की बराबर सीटें थी। हालांकि कांग्रेस का प्रदर्शन भी बहुत अच्छा नहीं रहा और पार्टी सिर्फ 57 सीटें हासिल कर पाई। निर्दलीयों ने 15 सीट पर उल्लेखनीय जीत हासिल की।
वहीं अलवर नगर निगम में तो पार्टी स्पष्ट बहुमत भी हासिल नहीं पाई थी, हालांकि बढ़त में थी और बोर्ड भी बना लिया, लेकिन केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव और राज्य सरकार में मंत्री संजय शर्मा के होने के बावजूद बहुमत से दूरी पार्टी के लिए चिंता का विषय होना चाहिए।
नगर परिषदों में भाजपा के बोर्ड तो बने लेकिन जनादेश मिश्रित था। जयपुर संभाग की नगर परिषदों की बात करें तो भाजपा दस में से छह में बोर्ड बनाने में सफल रही थी, हालांकि उसके पास स्पष्ट बहुमत सिर्फ जयपुर जिले की चौमू नगरपरिषद में था। पार्टी कोटपुतली, बहरोड़, फतहपुर, शाहपुरा और खैरथल में बोर्ड बनाने में सफल रही, इनमें भाजपा को निर्दलीयों का पूरा साथ मिला।
वहीं कांग्रेस के पास सीकर में बहुमत था और झुंझुनूं, खैरथल, दौसा और शाहपुरा में बढ़त थी। पार्टी इनमें से सीकर, झुंझुनूं और दौसा बचाने में कामयाब रही, वहीं तिजारा में निर्दलीयों की मदद से सिर्फ एक पार्षद होने के बावजूद बोर्ड बनाने में सफल रही।
इस दृष्टि से देखा जाए तो जयपुर संभाग के शहरी निकायों से भाजपा को जनादेश के रूप में बहुत अच्छे संकेत नहीं मिले थे, लेकिन सत्ता में होने का फायदा उठाते हुए पार्टी नगरपरिषदों में बढ़त बनाने में सफल रही। चौमू में स्पष्ट बहुमत भाजपा के लिए अच्छा संकेत है क्योंकि पार्टी यहां से विधानसभा का चुनाव हार गई थी। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविन्दसिंह डोटासरा अपने गृह जिले सीकर में पार्टी का दबदबा कायम रखने में सफल रहे।
नगरपरिषद कुल सीट भाजपा कांग्रेस निर्दलीय बोर्ड
कोटपूतली 60 19 13 28 भाजपा
झुंझुनूं 60 15 30 15 कांग्रेस
खैरथल 45 08 20 17 भाजपा
तिजारा 35 03 01 31 कांग्रेस
बहरोड़ 55 20 06 29 भाजपा
दौसा 55 17 24 14 कांग्रेस
सीकर 65 22 38 05 कांग्रेस
फतहपुर 55 13 21 21 भाजपा
चौमू 45 30 12 3 भाजपा
शाहपुरा 55 23 20 12 भाजपा
जयपुर – जनादेश निर्दलीयों के साथ, बोर्ड भाजपा ने बनाए
जयपुर जिले की दो नगरपरिषदों और 16 पालिकाओं के चुनाव परिणाम में जनादेश निर्दलीयों के साथ था, क्योंकि 16 पालिकाओं में से भाजपा के पास दो और कांग्रेस के पास तीन में स्पष्ट बहुमत था। वही 11 पालिकाओं में फैसला निर्दलीयों के हाथ था। जबकि नगरपरिषदों में भाजपा के पास चौमू में स्पष्ट बहुमत था और शाहपुरा में कांग्रेस को बढ़त थी। बोर्ड बनाने में निर्दलीयों का साथ भाजपा को मिला और 18 निकायों में से 12 में भाजपा के बोर्ड बने, जबकि कांग्रेस सिर्फ 6 में ही बोर्ड बना पाई।
अलवर जिला- भाजपा बेहतर स्थिति में
नाम के मामले में बिना मात्रा के इस जिले की 12 नगरपालिकाओं में भाजपा कांग्रेस से बेहतर स्थिति में थी। पार्टी के पास दो पालिकाओं में बहुमत और तीन में अच्छी बढ़त थी। कांग्रेस स्पष्ट बहुमत कहीं भी हासिल नहीं कर पाई, हालांकि तीन जगह बढ़त में रही, वहीं निर्दलीयों के पास दो में बहुमत और एक पालिका में बढ़त थी। निर्दलीय आमर पर सत्ता के साथ रहते हैं इसलिए अलवर नगर निगम सहित 9 निकायों में पार्टी बहुमत नहीं होने के बाद भी बोर्ड बना गई और कांग्रेस तीन पर ही कब्जा जमा पाई।
दौसा- कांग्रेस ने किया बेहतर प्रदर्शन
कांग्रेस के लिए राजनीतिक तौर पर ज्यादातर बार सूटेबल रहे दौसा जिले में इस बार भी पार्टी बेहतर स्थिति में रही। नगर परिषद के साथ ही पार्टी नौ में दो नगर पालिकाओं में स्पष्ट बहुमत के साथ थी, वही तीन में पार्टी के पास बढ़त थी, जबकि भाजपा बहुमत कहीं भी हासिल नहीं कर पाई। हालांकि बढ़त चार पालिकाओं में रही। वैसे यहां चार पालिकाओं में भाजपा-कांग्रेस के बीच कड़ा मुकाबला रहा और सीटों का अंतर ज्यादा नहीं रहा। कांग्रेस यहां 8 और भाजपा 3 निकायों में बोर्ड बनाने में कामयाब रही। कुल मिलाकर कांग्रेस के बड़े नेता सचिन पायलट यहां अपना दबदबा कायम रखने में सफल रहे।
झुंझुनूं – निर्दलीयों के आगे सब फेल
राजनीतिक तौर पर सबसे जागरूक जिलों में गिने जाने वाले झुंझुनूं में जनादेश में निर्दलीयों के आगे सब फेल साबित हुए, क्योंकि 18 नगर पालिकाओं में से चार में निर्दलीयों के पास स्पष्ट बहुमत रहा, वही पांच में बढ़त थी। दो ऐसी पालिकाएं थी, जहां निर्दलीयों और कांग्रेस की सीटें बराबर थी। हालांकि 17 निकायों में बोर्ड भाजपा और कांग्रेस के ही बने। कांग्रेस ने 9 और भाजपा ने 8 निकायों में बोर्ड बनाए, एक निकाय में निर्दलीय अध्यक्ष बना। चुनाव परिणाम में भाजपा दो जगह स्पष्ट बहुमत और एक पालिका में बढ़त बनाने में कामयाब रही। वहीं कांग्रेस ने यहां नगर परिषद और दो पालिकाओं में स्पष्ट बहुमत हासिल करने के साथ दो जगह बढ़त हासिल की। कुल मिलाकर यह जिला हमेशा की तरह कांग्रेस के लिए बेहतर रहा, वहीं निर्दलीयों को बड़ा समर्थन देकर भाजपा कांग्रेस को स्पष्ट संदेश भी दिया कि यहां की शहरी जनता बहुत ज्यादा संतुष्ट दोनों से ही नहीं है।
कोटपूतली-बहरोड़ – निर्दलीयों ने बाजी मारी
दो बड़े कस्बों को मिलाकर बनाए गए इस नए जिले ने चुनाव परिणाम में भाजपा और कांग्रेस से बहुत ज्यादा लगाव नहीं दिखाया और निर्दलीयों पर भरोसा जताया। दोनों नगरपरिषद ही नहीं सात में से चार पालिकाओं में भी वोटर ने इन्हीं पर भरोसा दिखाया है। सत्तारूढ़ भाजपा सिर्फ एक पालिका में बढ़त बना पाई वहीं कांग्रेस पर दो पालिकाओं के वोटर ने भरोसा दिखाया। जिला कांग्रेस ने बनाया था, जनता ने उसे कुछ खास नहीं दिया। भाजपा ने इसे बनाए रखा, जनता ने इसे भी निहाल नहीं किया। हालांकि बोर्ड बनाने के मामले में बंटवारा भाजपा और कांग्रेस के बीच ही हुआ। दोनों नगर परिषद और तीन पालिकाओं में भाजपा का बोर्ड बना, जबकि चार पालिकाओं में कांग्रेस ने बोर्ड बनाया।
सीकर – कांग्रेस का दबदबा
कांग्रेस के लिए विधानसभा और लोकसभा चुनाव के बाद निकाय चुनाव में भी सीकर भरोसेमंद साबित हुआ। पार्टी यहां के 14 निकायों में से सीकर नगर परिषद और एक पालिका में स्पष्ट बहुमत के साथ छह निकायों में बढ़त बनाने में कामयाब रही थी। जबकि भाजपा को फतहपुर नगर परिषद और तीन जगह बढ़त मिली थी। वहीं एक निकाय में मामला बराबरी पर छूटा था, जबकि एक निकाय में निर्दलीय को बढ़त हासिल थी। बोर्ड बनाने में भी कांग्रेस आगे रही और 8 बोर्ड बनाए वही 5 जगह भाजपा के बोर्ड बने। एक बोर्ड का फैसला बाद में घोषित हुआ।
खैरथल-तिजारा- भाजपा का दमदार प्रदर्शन
अलवर जिले की दो तहसीलों को मिला कर बनाए गए इस जिले में भाजपा का दमदार प्रदर्शन रहा। खैरथल नगर परिषद में भाजपा के पास बढ़त थी, वही चार पालिकाओं में से एक में पार्टी का स्पष्ट बहुमत रहा, वही तीन में बढ़त थी। तिजारा नगर परिषद में भाजपा और कांग्रेस दोनों का बहुत खराब प्रदर्शन रहा और बहुत ही नाटकीय घटनाक्रम के बाद सिर्फ एक सीट होने के बावजूद कांग्रेस निर्दलीयों की मदद से यहां बोर्ड बना गई। यहां के सात निकायों में से भाजपा छह में बोर्ड बनाने में सफल रही।






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